23 September 2022

WISDOM ----

 भिखारी  दिन  भर  भीख  मांगता -मांगता  शाम  को  एक  सराय  में  पहुंचा  और  भीतर  की  कोठरी  में  भीख  की  झोली  रखकर  सो  गया  l  थोड़ी  देर  बाद  एक  किसान  आया  l  उसके  पास  रुपयों  की  थैली  थी  l  किसान  बैल  खरीदने  गया  था  l  रात  को  वह  भी  उसी  सराय  में  रुका  जहाँ  भिखारी  था  और  वह  रुपयों  की  थैली  अपने  सिराहने  रखकर  सो  गया  l  भीख  की  झोली  रुपयों  की  थैली  से  बोली  --- : बहन  !  हम तुम  एक  बिरादरी  के  हैं  , इतनी  दूर  क्यों  हैं ,  आओ  हम  तुम  एक  हो  जाए  ? ' रुपयों  की  थैली  ने  हंसकर  कहा --- " बहन  ! क्षमा  करो ,  यदि  मैं  तुमसे  मिल  गई  तो  संसार  में  परिश्रम  और  पुरुषार्थ  का  मूल्य  ही  क्या  रह  जायेगा  l "

22 September 2022

WISDOM ----

   कलियुग  का  सबसे  बड़ा  लक्षण  है ---दुर्बुद्धि  l  ईर्ष्या  द्वेष  इतना  है  कि  मनुष्य  अपनी  सारी  ऊर्जा   दूसरों  का  सुख  छीनने  में  लगा  देता  है  l  व्यक्ति  को  जो  ईश्वर  ने  दिया  है  वह  उसमें  खुश  नहीं  होता  ,  उसकी  नजर  हमेशा  उन  पर  होती  है  जिनसे  वह  ईर्ष्या  करता  है  l  अपने  प्रतिद्वंदी  को  सुख  का , सम्मान  का  एक  कतरा  भी  मिल  जाये  यह  उसे  मंजूर  नहीं  होता  l  वह  अपनी  पूरी  शक्ति , पूरे  साधन  लगाकर  उसके  सुखों  के  मध्य  दीवार  खड़ी  कर  देता  है  l  यह  एक  तरह  की  मानसिक  बीमारी  है , पागलपन  है  l  सत्साहित्य  का  अध्ययन  न  करने  के  कारण  वह  अपना  अनमोल  जीवन  ऐसे  ही  गँवा  देता  है  l  कंस  ने  देवकी  के  सात  नवजात  पुत्रों  का  वध  किया  , उन्हें  जेल  में  बहुत  कष्ट  दिया   l  गोलोक  में  राधा जी  कृष्ण  से  पूछती  हैं  कि  कंस  इतना  निर्दयी  और  अत्याचारी  है  , कहीं  वो  देवकी  और वसुदेव  की  हत्या  न  कर  दे  l  तब  भगवान  कहते  हैं  --- नहीं , कर्मों  के  अनुसार  जो  विधान  बनता  है , उससे  ज्यादा  कोई  कुछ  नहीं  कर  सकता  l  कहने  का  तात्पर्य  है  कोई  किसी  के  भाग्य  को  नहीं  बदल  सकता  ,  जो  ऐसा  दुस्साहस  करता  है  तो  कंस  और  रावण  की  तरह  स्वयं  भगवान  उसका  अंत  कर  देते  है  l  आज  संसार  में  मनुष्य  का  सामना  ऐसे  ही  रावण , कंस , दुर्योधन , मंथरा , सूर्पनखा  जैसे  लोगों  से  होता  है  , ऐसे  लोगों  के  मध्य  जीवन  जीने  के  लिए  जीवन  जीने  की  कला  के  ज्ञान  की  जरुरत  होती  है  l  ऐसे  हठी  लोग  मर  जाते  हैं  पर  सुधरते  नहीं  हैं   इसलिए  हमें  ही  स्वयं  को  समझाना  है  कि   वे  अपने  संस्कार  के  अनरूप  अपना  कार्य  करते  रहें  और  हम  उनकी  ओर  से  अपना  ध्यान  हटाकर  ,   ईश्वर  विश्वास  का  सहारा  लेकर  जीवन -पथ  पर  आगे  बढ़ते  रहें  l  

21 September 2022

WISDOM ----

 पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं --- ' जीवन  एक  अनंत  प्रवाह  है  l मनुष्य  माया -मोह  में  फंसकर  कर्म  करता  रहता  है  , इस  कारण  जीवन  का  आवागमन  का  कर्म  चलता  रहता  है  l  मनुष्य  कर्मानुसार  एक -दूसरे  का  कर्ज  ही  देने  आता  है  l  केवल  मनुष्य  रूप  में  ही  नहीं , पशु -पक्षी  बनकर  भी  कर्ज  चुकाना  पड़ता  है  l  एक  कथा  है ---- एक  सेठ  जब  धन  उधार  देता  था   तो  यह  लिखवा  लेता  था  कि  यदि  इस  जन्म  में  कर्ज  न  चुका  सके  तो  अगले  जन्म  में  चुका  देंगे  l  चार  चोरों  ने  सोचा  अगला  जन्म  किसने  देखा  है  ?  चलो  रुपया  उधार  लेकर  कुछ  दिन  मौज -मस्ती  करेंगे  l  यह  सोचकर  सेठ  के  पास  गए  l  सेठ  ने  रूपये  दे  दिए   और  अगले  जन्म  में  चुका  देने  वाले  प्रमाण   पत्र   पर  हस्ताक्षर  करा  लिए  l  चोरों  ने  रात  को  वहीँ  रुकने  का  निश्चय  किया  ,  सेठ  ने  उन्हें  अपने  बाहर  के  कमरे  में  रुकने  की   व्यवस्था  कर  दी  l  कमरे  के  निकट  ही  गाय  और  बैल  बंधे  थे  l  एक  चोर  जानवरों  की  बोली  समझता  था  l  रात  में  उसने  सुना , गाय  कह  रही  थी  ---" भैया , मेरा  कर्ज  तो  सुबह  समाप्त  हो  जायेगा  , कल  दूध  देकर  मेरी  मुक्ति  हो  जाएगी  l "  बैल  ने  कहा --- " बहन , मुझ  पर  तो  अभी  बहुत  कर्ज  बाकी  है  l  पता  नहीं  कब  छुटकारा  मिलेगा  ? "  चोर  सुबह  तक  रुक  गए  l  सुबह  उन्होंने  देखा  कि  दूध  देने  के  बाद  गाय  मर  गई  l  चोर  डर  गए  ,  सेठ  के  पास  जाकर  यह  कहकर  धन  वापस  कर  दिया  कि  हम  अगले  जन्म  के  लिए  कर्जदार  नहीं  बनना  चाहते  l   उन्होंने  ईमानदारी  से  जीवन  जीने  का  निश्चय  किया  l   ----- कलियुग  में  दुर्बुद्धि  का  फेर  है  ,  लोग  अगले  जन्म  का  सोचते  नहीं  , करोड़ों  कर्ज  लेकर  भाग  जाते  हैं  ,  यदि  हम  अपने  धर्म ग्रंथों  पर  , ऋषियों  की  वाणी  पर  विश्वास  करते  हैं  तो  इतने  कर्ज  को  कितने  जन्मों  में  , किस  तरह  चुकाएंगे  , यह  सारा  हिसाब -किताब  करना  धर्मराज  के  लिए  भी  बहुत  कठिन  कार्य  है  l  

20 September 2022

WISDOM -----

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य  जी  लिखते  हैं --- 'इस  समय  का  सबसे  बड़ा  दुर्भाग्य  यह  है  कि  इस  समय  सभी  वर्णों  ने  अपनी -अपनी  गरिमा  को  भुला  दिया  है  l  इस  समय  केवल  एक  ही  वर्ण  रह  गया  है  वह  है ---व्यापारी  l डॉक्टर , इंजीनियर , कलाकार , शिक्षक , पंडित ,क्षत्रिय , वैश्य  आदि  सभी  अपना  कर्तव्य  भूलकर  केवल  धन  के  पीछे  लगे  हैं  l  सारा  व्यवहार  पैसे  के  लिए  ही  चल  रहा  है  l '  वर्तमान  की  स्थिति  इतनी  विकट  है  कि  अमीरी  की  भी  दौड़  है  l  कौन  सबसे  आगे  है  ?  यह  भी  सत्य  है  कि  केवल  ईमानदारी  और  सच्चाई  से  बहुत  अमीर  नहीं  हुआ  जा  सकता  l  मेहनत  तो  करनी  पड़ती  है  लेकिन  वह  अधिकांशत:  दंद -फंद   और  हेरा -फेरी  जैसी  नकारात्मक  दिशा  में  ज्यादा  होती  है  l  ऐसी  दौड़  का  कोई  सकारात्मक  परिणाम  भी  नहीं  होता  ---- एक  कथा  है ---- एक  सेठ जी  थे  , अथाह  धन -सम्पदा  थी  l  दिन -रात  भागा -दौड़ी  करते  , खाने -पीने  का  भी  कोई  होश  नहीं  l  उनके  घर  में  एक  नौकर  सेठ जी  को  देखकर  सदा  यही  सोचा  करता  कि  ये  बेचारे  सेठ  किसके  लिए  इतनी  मेहनत  कर  रहे  हैं  ,  इतना  धन  किसके  लिए  जोड़  रहे  हैं  ?  एक  कन्या  है  उसका  विवाह  हो  ही  गया  l  अब  वो  नौकर  था , उसे  सेठ  को  समझाने  की  हिम्मत  नहीं  थी  l  विधि  का  विधान  देखिए  , एक  दिन  सेठ  को  अचानक  हार्ट अटैक  आया  और  वे  परलोक  सिधार  गए  l  सेठ  की  खूबसूरत   पत्नी  ने  उस  नौकर  से  विवाह  कर  लिया  l  उसे  अपने  प्रश्न  का  उत्तर  मिल  गया  ,कि  वो  बेचारा  सेठ  उसी  के  लिए  दिन -रात  एक  किए  था  l  

एक  और  कथा  है --- व्यक्ति  चाहे  इस  लोक  में  हो  या  उस  लोक  में  ,  धन  का  लालच  ऐसा  है  जो  कभी  जाता  नहीं  l --- एक  सेठ जी  की  मृत्यु  हो  गई  l  जीवन  में  कुछ  दान -पुण्य  भी  किया  था  ,  कुछ  पापकर्म , शोषण  आदि  भी  किया  था  l  जब  धर्मराज  के  यहाँ  हिसाब -किताब  हुआ  तो  धर्मराज  ने  कहा ---" सेठ जी  !  आपके  लिए  कुछ  दिन  का  स्वर्ग  है , कुछ  दिन  का  नरक l  आप  पहले  कहाँ  जाना  पसंद  करेंगे  ?  सेठ जी  ने  कहा --- " महाराज  ! चाहे  स्वर्ग  हो  या  नरक   मुझे  तो  वहां  भेज  दो  ,  जहाँ  चार  पैसे  की  आमदनी  हो  l  "  इस  समय  का  सत्य  यही  है  कि  धन  प्राथमिकता  है  उसके  बदले  चाहे  बीमारी , तनाव , अनिद्रा   कुछ  भी  हो  l  

19 September 2022

WISDOM -----

श्रीमद् भगवद्गीता  में  भगवान  कहते  हैं ---ज्ञान , कर्म  और  भक्ति  का  समन्वय  जीवन  के  समग्र  विकास  के  लिए  अनिवार्य  है  l  इन  तीनों  का  समन्वय  होने  पर  ही  सुख , शांतिमय  जीवन  बीत  सकेगा  l    कर्म  और  भक्ति  के  अभाव  में  ज्ञानी  व्यक्ति , अहंकारी  बन  सकते  हैं  l   ज्ञान  के  अभाव  में  मनुष्य  के  कर्म  दुष्कर्म  हो  सकते  हैं    और  ज्ञान  व  कर्म  के  अभाव  में   केवल  भक्ति  व्यक्ति  को  अन्धविश्वासी  तथा  अकर्मण्य  बना  सकती  है  l  भक्ति  भी  ज्ञान  और  कर्म  से  युक्त  होनी  चाहिए  l    एक  कथा  है ----- मरने  के  बाद  एक  व्यक्ति  की  आत्मा  को  यमदूत  धर्मराज  के  सामने  ले  गए  , दूतों  ने  बताया --- " यह  एक  बड़ा  धर्मात्मा  है  l युवावस्था  में  अपने  माता -पिता  और  स्त्री , बच्चों  को  छोड़कर  यह  जंगल  में  चला  गया  और  जीवन  भर  तप  करता  रहा  l  "  धर्मराज  ने  कहा --- " कर्तव्यों  का  त्याग  कर  कोई  व्यक्ति  धर्मात्मा  नहीं  बन  सकता  l  परिवार  के  लोगों  के  साथ  विश्वासघात  कर  के  इसने  अधर्म  ही  कमाया  ,  ऐसा  भजन  किस  काम  का  जो  कर्तव्यों  को  भुलाकर  किया  जाए  l  इसे  पुन:  धरती  पर  भेजो  और  कर्तव्य  पालन  के  साथ  भजन  करने  का  आदेश  करो  ,  तभी  इसे  स्वर्ग  में  स्थान  मिलेगा  l   "   यमदूतों  ने  दूसरे  व्यक्ति  की  आत्मा  उपस्थित  की  और  कहा --- " यह  व्यक्ति  बड़ा  कर्तव्यपरायण  है  l  काम  को  ही  सब  कुछ  समझता  है  l  इसकी  पत्नी  बीमार  पड़ी  और  मर  गई  ,  पर  यह  उसकी  कुछ  भी  परवाह  न  कर  के  अपने  कर्तव्य  में  ही  लगा  रहा  l " धर्मराज  ने  कहा --- " ऐसे  ह्रदयहीन  का  स्वर्ग  में  क्या  काम  ?  भावना पूर्वक  किया  गया  कर्तव्य  ही  प्रशंसनीय  हो  सकता  है  l  जिसे  अपने  नैतिक  कर्तव्यों  का  ज्ञान  नहीं  ,  उसकी  शारीरिक  दौड़ -धूप  क्या  महत्त्व  रखेगी  l  इसे  प्रथ्वी  पर  भेजो  और  कहो  कि  भावना पूर्वक  जीवन  जिए  और  दूसरों  से  प्रेम  करना  सीखे  ,  तभी  उसे  स्वर्ग  में  स्थान  मिलेगा  l  "  एक  तीसरे  व्यक्ति  की  आत्मा  लाई  गई  l  यमदूतों  ने  कहा --- " यह  एक  साधारण  गृहस्थ  है l  सदा  आस्तिक  रहा , प्रेमपूर्वक  परिवार  को  सुविकसित  किया , पवित्र  जीवन  जिया  और  दूसरों  के  उत्थान  के  लिए  निरंतर  प्रयत्न  करता  रहा  l "  धर्मराज  ने  कहा --- " स्वर्ग  ऐसे  ही  लोगों  के  लिए  बनाया  गया  है  ,  इसे  आदरपूर्वक  ले  जाओ  और  आनंद पूर्वक  यहाँ  रहने  की  व्यवस्था  कर  दो  l  "  स्वर्ग  का  अधिकारी  वही  हो  सकता  है  जिसने  ज्ञान , कर्म  और  भक्ति  तीनों  को  जीवन   में  अपनाया  है   l 

18 September 2022

WISDOM -----

 मनुष्य  के  जीवन के  विभिन्न  पक्ष  हैं  ,इनमें  सबसे  महत्वपूर्ण  है  आर्थिक  पक्ष  l  आर्थिक  क्षेत्र  में  विकार  आ  जाने  से  ही  जीवन  का  प्रत्येक  पक्ष  गड़बड़ा  जाता  है  l  संसार  में  जो  बड़ी -बड़ी  क्रांतियाँ  हुई  हैं  उनके  मूल  में  जो  कारण  था  वह --आर्थिक  था  l  एक  समय  था  जब  केवल  व्यापार  -व्यवसाय  में  हानि -लाभ  देखा  जाता  था  l  आज  संसार  में  इतनी  अधिक  समस्याएं  इसलिए  हैं  कि  जीवन  का  प्रत्येक  क्षेत्र  व्यवसाय  बन  गया  है  , इस  कारण  उस  क्षेत्र  की  पवित्रता  समाप्त  हो  गई  है  l  ईमानदारी  ,सच्चाई  से  काम  करने  वाले  बहुत  हैं   लेकिन  उनकी  तुलना  में  दीमक  की  प्रकृति  की  संख्या  बहुत  अधिक  है  l  अमीर  और  गरीब  को  देखने  का  नजरिया  भी  भिन्न  है   l  एक  वृद्ध  व्यक्ति  मजदूरी  करे , ठेला  चलाए ,  बहुत  मेहनत  कर  के  परिवार  का  पालन पोषण  करे  तो  वह  दया  का  पात्र  है  लेकिन  वह    व्यक्ति  जिसने  जीवन  में  नौकरी  कर  के  पर्याप्त  धन  कमा  लिया , उसके  पास  जमा -पूंजी   आदि  सब  कुछ  है  लेकिन  फिर  भी  वह  और  धन  कमाने  के  लिए  , समाज  में  अपनी  पहचान  बनाये  रखने  के  लिए   या  समय  व्यतीत  करने  के  लिए  कहीं  न  कहीं  जुड़ा  है  ,  अब  क्योंकि  वह  समर्थ  है  इसलिए  उसके  प्रति  कोई  भाव  नहीं  है  जबकि  सत्य  ये  है  कि  ऐसे  व्यक्ति  कहीं  काम  कर  के  युवा  पीढ़ी  का  हक  छीन  रहे  हैं  l  धन  को  ही  स्टेटस  सिम्बल  माना  जाने  के  कारण  अब  ऐसे  व्यक्ति  समाज  को  अपने  ज्ञान  का  लाभ  नहीं  देते  बल्कि  सारे  गुर ,  सभी  बारीकियां  समझ  आ  जाने  के  कारण   भ्रष्टाचार  में  बड़ा  योगदान  देते  हैं  l  इन  सबके  पीछे  सबसे  बड़ा  कारण  है  ---दुर्बुद्धि  l  दुर्बुद्धि  के  कारण  ही  संसार  में  सारी  समस्याएं  हैं  l 

WISDOM ----

 तुलसीदास जी  ने  कहा  है ----  'कर्मप्रधान  विश्व  करि  राखा  l जो  जस  करहि  सो  तस  फल  चाखा  l   पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---' यह  कर्मफल  कभी -कभी  तुरंत  ही  इसी  जन्म  में  मिल  जाता  है  , परन्तु  कभी -कभी  ऐसा  भी  होता  है  कि  दुष्ट  कर्म  करने  वाले  तो  सुखी  और  संपन्न  दिखाई  देते  हैं  तथा  त्यागी , तपस्वी  दुखी  होते  हैं  तो  विश्वास  डगमगा  जाता  है  l  मनुष्य  सोचता  है  कि  जब  दुष्ट  व्यक्ति  आराम  का  जीवन  जीते  हैं  और  सज्जन  कष्ट  पा  रहे  हैं  तो  फिर  त्याग -तपस्या  का  जीवन  क्यों  जिएं  ? यह  भावना  मनुष्य  को  उद्दंड  और  नास्तिक  बना  देती  है  l  विधाता  ने  मनुष्य  को  कर्म  करने  की  छुट  दी  है  , परन्तु  फल  को  अपने  हाथ  में  रखा  है  l  यदि  झूठ  बोलते  ही  मनुष्य  की  जीभ  काटकर  गिर  जाती  , चोरी  करते  ही  हाथ  कट  जाते  तो  व्यक्ति  दुष्कर्म  करने  से  डरता  , किन्तु  कर्म  का  फल  विधि  के  विधान  के  अनुसार  मिलता  है   तो  पापी  व्यक्ति  को  फलता -फूलता  देखकर  मनुष्य  आस्थाहीन  हो  जाता  है  l  आचार्य श्री  लिखते  हैं --यह  बात  निश्चित  है  कि  ईश्वर  के  यहाँ  देर  है , अंधेर  नहीं  l ''    कर्म  का  फल  कब  और  कैसे  मिलेगा  , यह  काल  निश्चित  करता  है  l एक  कथा  है ------  एक  स्त्री  नि:संतान  थी  l  किसी  तांत्रिक  ने  उसे  बताया  कि  किसी  बच्चे  को  मरवाकर  गड़वा  दे  तो  उसके  संतान  होगी  l  उसने  दूर  गाँव  के  किसी  गरीब  बच्चे  के  साथं  ऐसी  ही  निर्दयता  की  l   ईश्वर  की  लीला  देखिए  उसके  दो  पुत्र  हुए  l  दोनों  ही  बहुत  सुन्दर  और  होनहार   l  उस  स्त्री  के  कर्म  का  जिन्हें  पता  था  , वे  सब  यहो  कहते  थे  कि  देखो  इस  औरत  ने  कितना  नीच  कर्म  किया  और  भगवान  ने  इसको  सजा  देने  के  बदले  दो -दो  बेटे  दे  दिए  l  ईश्वर  के  यहाँ  कितना  अंधेर  है  ?  बच्चे  बड़े  हुए , पढ़ने -लिखने  में  बहुत  होशियार , देखने  में  सुंदर  लेकिन  एक  दिन  दोनों  नदी  में  नहा  रहे  थे  , अचानक  एक  का  पैर  फिसला  l  दूसरा  उसे  बचाने  के  लिए  आगे  बढ़ा  तो  वह  भी  संभल  नहीं  सका  और  दोनों  नदी  में  डूब  गए  l  तब  वह  रो -रोकर  सब  से  यही  कह  रही  थी थी  कि  भगवान  में  मेरे  पाप  की  सजा  मुझे  दे  दी  l  ईश्वर  के  घर  देर  है , अंधेर  नहीं  l '  कर्मफल  का  नियम  स्वयं  ईश्वर  पर  भी  लागू  होता  है  l  भगवान  राम  ने  बालि  को  छिपकर  बाण  मारा  था  ,  अगले  जन्म  में  वे  कृष्ण  बने  और  बालि  बहेलिया  और  उसने  उसी  प्रकार  उसी  बाण   को  उन्हें  मारा  और  उनकी  जीवन  लीला  समाप्त  हुई  l  राजा  दशरथ  ने  श्रवण कुमार  को  तीर  मारा  था  ,  उसके  माता -पिता  की  मृत्यु  पुत्र -शोक  में  हो  गई  l  उनके  शाप  के  कारण  राजा  दशरथ  की  मृत्यु  भी  पुत्र -शोक  में  हुई  l  गीता  में  भगवान  ने  कहा  है --- 'गहना  कर्मणोगति  l '