28 August 2023

WISDOM -----

  श्रीराम  के  एक  ही  शिष्य  हैं ,  हनुमान जी  l  बड़े  से  बड़ा  काम  कर  के  भी   उन्हें  कोई  अहंकार  नहीं  l  परम  समर्थ  और  सतत  राम -नाम  का  जप  l  जब  वे  लंका  जलाकर   अकेले  ही   रावण  का  मान  मर्दन  कर   प्रभु  के  पास  लौटे   और  प्रभु  ने  पूछा   कि  त्रिभुवन  विजयी   रावण  की  लंका  को  तुमने  कैसे  जलाया   हनुमान  !  तब  उन्होंने  कहा --- सो  सब  तव  प्रताप  रघुराई  l  नाथ  न  कछू  मोरि  प्रभुताई  l     श्री  हनुमान जी  व्याकरण  के  पंडित , वेदज्ञ ,  ज्ञान  शिरोमणि, बड़े  विचारशील , तीक्ष्ण  बुद्धि  और  अतुल  पराक्रमी  हैं  , लेकिन  अति  विनम्र  हैं  ,  अहं  उन्हें  छू  भी  नहीं  गया  है  l  सभी  भक्तों  के  वे  आदर्श  हैं  l  श्रीराम  कहते  हैं ----- सुनु  सुत   तोहि   उरिन  मैं  नाहीं  l  देखेउँ  करि  बिचार  मन  माहीं  l  

27 August 2023

WISDOM ----

  संत  तुलसीदास जी  और  कवि  रहीम  ,  दोनों  घनिष्ठ  मित्र  थे  l  दोनों  एक  दूसरे  को  कविता  लिखकर  भेजते  थे   और  कई  बार  इसी  माध्यम  से  वार्तालाप  किया  करते  थे  l  एक  बार  रहीमदास जी  के  मन  में   जिज्ञासा  उठी  कि   गृहस्थी  में  रहकर  भगवान  की  भक्ति  कैसे  की  जा  सकती  है  ?  इसलिए  उन्होंने  एक  दोहा  लिखकर   तुलसीदास जी  को  भेजा  --- चलन  चहत  संसार  की  ,  मिलन  चहत  करतार l  दो  घोड़े  की  सवारी  ,  कैसे  निभे  सवार  l  '  अर्थात    सांसारिक  चलन  में  रहकर   भी  उस  परमात्मा  से  मिलने  का  प्रयास  क्या  दो  घोड़ों  की  सवारी  करने  जैसा  नहीं  है  ,  जिसे  निभाना  सवार  के  लिए   असंभव  सा  है  l      उत्तर  में  तुलसीदास जी  ने  रहीमदास जी   को  लिखकर  भेजा ---- चलन  चहत  संसार  की ,  हरि  पर  राखो  टेक  l   तुलसी  यूँ  निभ  जाएंगे  ,  दो  घोड़े  रथ  एक  l     अर्थात  सांसारिक  कार्यों  को  करते  हुए  भी   द्रष्टि  प्रभु  पर  ही  रखनी  चाहिए  l  ऐसा  करने  पर  जीवन  वैसे  ही  चलेगा  ,  जैसे  दो  घोड़ों  के  होते  हुए  भी   एक  रथ  सहजता  से  चलता  है   l  दूसरे  शब्दों  में  यदि  हमारा  मन   व  मस्तिष्क   सदा  प्रभु  भक्ति  में  लीन  रहे   तो  गृहस्थ   रहते  हुए  भी   हरि भक्ति   संभव  है  l  तुलसीदास जी  का  उत्तर  पाकर  रहीमदास जी  गदगद  हो  उठे  l  

WISDOM -----

   संत  रज्जब  सदा  परवरदिगार  की  प्रार्थना  में  निमग्न  रहते  थे  और  जो  भी  उनके  संपर्क  में  आता  , उसे  भी  अच्छे  पथ  पर  चलने  की  प्रेरणा  देते  l  उनके  गाँव  में  जुबेर  नामक  एक  व्यक्ति  रहता  था  ,  उसे  जुआ  खेलने , शराब  पीने  और  लोगों  को  निरर्थक  परेशान  करने  की  आदत  थी  l  एक  दिन  ज्यादा  शराब  पीकर  वह  नाली  में  गिर  पड़ा  l  उसकी   गन्दी  आदतों    के  कारण  कोई  उसकी  सहायता  के  लिए  आगे  नहीं  आया  l  ऐसे  में  संत  रज्जब  उधर  से  निकले  l  उन्होंने  उसे  उठाया , उसका  मुंह  धुलाया   और  उसके  होश  में  आने  तक   उसकी  देखभाल  की  l  उसके  होश  में  आने  पर  वे  उससे  बोले --- " नौजवान  जिस  मुँह  से  परवरदिगार  को  बुलाते  हैं  ,  उसे  शराब  पीकर  कुत्सित  करना  किसी  गुनाह  से  कम  नहीं  है  l "  संत  रज्जब  की  कही  यह  बात  जुबेर  के  दिल  में  बैठ  गई   और  वह  सदा  के  लिए  नेक  इनसान  बन  गया  l 

24 August 2023

WISDOM -----

  ' क्रोध  एक  ऐसा  विकार  है  ,जो  अकल्पनीय  क्षति  पहुंचा  सकता  है  l '------- श्रेणिक  नामक  एक  राजा  था  l  चेलना  नाम  की  उसकी  रानी  थी  l  एक  बार  दोनों  महावीर  तीर्थंकर  के  दर्शन  कर  लौट  रहे  थे  तो  रानी  ने  देखा  कि  एक  दिगंबर  मुनि  भयंकर  शीत  में  तप  कर  रहे  हैं  l  यात्रा  में  रानी  बेहद  थक  गईं  थी  इसलिए   महल  में  लौटने  पर  उन्हें  गहरी  नींद  आ  गई  l  उनका  एक  हाथ   शीत  के  कारण  बिस्तर  से  नीचे  लटककर  अकड़  गया  l  आँखें  खुली  तो  बहुत  दरद  था  l  जब  सेंक  दिया  जा  रहा  था   तो  रानी  के  मन  में  सहज  ही  उस  मुनि  की  स्मृति  हो  आई  ,  जो  निर्वस्त्र  बैठा   भयावह  शीत  झेलता  तप  कर  रहा  था  ,  वे  बोल  उठीं --- " हे  भगवान  !  उस  बेचारे  का  क्या  हाल  होगा  , जब  मेरा  यह  हाल  हो  गया  है  ! "  राजा  ने  शब्द  सुने , संदेह  जन्मा   कि  रानी  के  मन  में  अवश्य  ही  कोई  परपुरुष  है  l  वे  बाहर  निकले   और  क्रोध  से  पागल  होकर  मंत्री  से  बोले  ---- "  रानी  अंदर  सो  रही  है  , तुम  अंत:पुर  जला  दो  l "  इसके  बाद  मन  शांत  करने  राजा  भगवान  महावीर  के  पास  पहुंचे  l  पहुँचते  ही    भगवान  महावीर  बोले  ---- "  चेलना  पवित्र  है , पतिव्रता  है  l  यह  तुमने  क्या  किया  ! "  तुरंत  राजा   श्रेणिक  वापस  लौटे  l  पूछा --- " महल  जला  दिया  क्या  ? "  मंत्री  ने  कहा ---- " हाँ , आपकी  आज्ञा  थी  l "  राजा  एकदम  शोक  में  डूब  गए  l  मंत्री  ने  कहा --- " राजन  !  दुःखी  न  हों  l मैं  जानता  था  , आपने  निर्णय  आवेश  में  लिया  l  महल  व  रानी  सुरक्षित  हैं   l  मैंने  प्रतीक  रूप  मर  हस्ति शाला  जला  दी  l " राजा  प्रसन्न  भाव  से  रानी  के  पास  पहुंचे  l   फिर  राजा  ने  संकल्प  लिया  कि   कभी  कोई  निर्णय  होश  खोकर ,  क्रोध  में  नहीं  लेंगे  l  

23 August 2023

WISDOM -----

   1 . एक  व्यापारी  घोड़े  पर  नमक  और  एक  गधे  पर  रुई  की  गांठें  लादे  जा  रहा  था  l  रास्ते  में  एक  नदी  मिली  l  पानी  में  घुसते  ही  घोड़े  ने  पानी  में   डुबकी   लगाईं   तो  काफी  नमक  पानी  में  घुल  गया  l  गधे  ने  घोड़े  से  पूछा  --- यह  क्या  कर  रहे  हो  ?  घोड़े  ने  कहा --- वजन  हल्का  कर  रहा  हूँ  l  यह  सुनकर  गधे  ने  भी   दो  डुबकी  लगाईं  ,  पर  उससे  गांठें  भीगकर  इतनी  भारी  हो  गईं  कि  उसे  ढोने  में  गधे  की  जान  आफत  में  पड़  गई  l   आचार्य  जी  कहते  हैं --- कुरीतियों  और  कुप्रचलनों  की   बिना  समझे -बूझे  की  गई  नक़ल   कठिनाइयाँ  बढ़ाती  है  , सुविधा  नहीं  l '  

2 .  एक  परिवार  में  विवाह  का  अवसर  था , बहुत  मेहमान  इकट्ठे  थे  ,  बहुत  मिष्ठान -पकवान  बन  रहे  थे  ,  तब  घर  की  एक  पालतू  बिल्ली  ने  बहुत  उधम  मचाया  l  हर  चीज  में  मुँह  डाल  देती   और  जूठा  कर  देती  l  घर  की  मालकिन  ने  उसे  पकड़कर  नांद  के  नीचे  बंद  कर  दिया  l  फिर  वह  काम  में  लग  गई  l  कई  रोज  काम  में  व्यस्त  रहने  के  कारण   उसे  बिल्ली  को  निकालने  की  बात  याद  न  रही   और  वह  बिल्ली  उसी  में  दबकर  मर  गई  l  बारात  जब  लौटकर  आई  और  बहू  ने  घर  में  प्रवेश  किया  ,  उसी  समय  मालकिन  को  बिल्ली  की  याद  आई  l  उसे  निकाला  गया  , तो  मरी  मिली  l  उसे  फिंकवाया  गया  l  नई  बहू  यह  सब  देख  रही  थी  l  उसने  समझ  लिया  कि   यही  इस  घर  की  परंपरा  है  l  उसके  एक  पुत्र  हुआ  l  पुत्र  के  बड़े  होने  पर  उसका  विवाह  हुआ , बारात  गई   और  नई  बहू  आई  l  उसने  भी  बारात  जाने  से  पहले  एक  बिल्ली  नांद  के  नीचे  बंद  की  ,  वह  बिल्ली  मर  गई   और  जैसे  ही  नई  बहू  ने  घर  में  प्रवेश  किया  ,  उसने   उस  मरी  बिल्ली  को  फिंकवाया  l  जो  उसने  देखा  था  ,  उसे  कुल  परंपरा  समझा  और  उसी  का  पालन  करने  में  अपना  धर्म  और  कल्याण  समझा  l   आजकल  विभिन्न  जातियों  और  धर्मों  में  ऐसी  ही  कई  अंध  परम्पराएँ  फैली  हैं  ,  जिनकी  कोई  उपयोगिता  नहीं  है   लेकिन  बिना  विचारे   उनका  क्रम  चलता  रहता  है  ,  भेड़ों  की  तरह  सब  उनका  अंधानुकरण   करते  चले  जाते  हैं  , उसमें  अपना  समय , ऊर्जा  व  धन  बरबाद   करते  हैं  l  

22 August 2023

WISDOM ------

   1 . हकीम  लुकमान  से  लोगों  ने  पूछा ---" वे  इतने  बुद्धिमान  कैसे  बने  ? " तो  वे  बोले --- "मुझे  बुद्धि  मूर्खों  से  मिली  l " लोगों  ने  पूछा  --- "कैसे ? '  लुकमान  बोले ---- " मैंने  उनके  जीवन  को  बारीकी  से  देखा   और  उनके  जीवन  में  जो  छोड़ने  लायक  लगा ,  उसे  अपने  जीवन  में  भी  छोड़  दिया  l  प्रेरणा  प्राप्त  करने  के  लिए   संसार  के  सभी  मार्ग  उपलब्ध  हैं  l " 

2 .  प्राचीन  समय  में  जब  मनुष्य  के  पास  प्रकाश  नहीं  था   तब  लोगों  ने  अंधकार  को   दूर  करने  के  अनेकों  उपाय   सोचे  किन्तु  कोई  भी  कारगर  नहीं  हुआ  l  किसी  ने  सुझाव  दिया  कि  हमें  अंधकार  को   टोकरी  में  भरकर   गड्ढे  में  डाल  देना  चाहिए  l  लोगों  ने  टोकरी  लेकर  ऐसा  प्रयास  करना  आरम्भ  कर  दिया  l  धीरे -धीरे  इसने  एक  प्रथा  का  रूप  ले  लिया  l  उसी  समय  एक  युवक  का  विवाह  एक  विदुषी  महिला  से  हो  गया  l  प्रथा  के  अनुरूप  उससे  भी  अंधकार  को   फेंकने  का  कार्य  करने  के  लिए  कहा  गया  l  यह  सुनकर  वह  हँसने  लगी  l  उसने  सूखे  पत्तों  को  एकत्र  किया   और  फिर  दो  पत्थरों  को  टकराया   तो  लोग  चकित  होकर  देखते  रह  गए  कि  आग  पैदा  हो  गई  और  अँधेरा  दूर  हो  गया  l  उस  दिन  से  लोगों  ने  अँधेरा  फेंकना  छोड़  दिया  , क्योंकि  वे  आग  जलाना  सीख  गए  थे  l  हम  भी  उन  गाँव  वालों  की  तरह  हैं  ,  जो  पाप , दोष , दुर्गुणों  से  लड़ते  रहते  हैं  ,  जबकि  सद्गुणों  को  अपनाने  पर  ये  अपने  आप  छूट  जाते  हैं  l  आचार्य श्री  लिखते  हैं  --हमें  अपने  जीवन  में  सकारात्मक  होना  चाहिए  l  प्रारम्भ  में   किसी  एक  अवगुण  को  छोड़ें  और  उसके  खाली  स्थान  को  किसी  एक  सद्गुण  से  भरें  l  ऐसा  निरंतर  प्रयास  करते  रहने  से  सन्मार्ग  पर  चलने  की  आदत  हो  जाएगी  और  जीवन  सकारात्मक  दिशा  में  ही  बढ़ेगा  l 

20 August 2023

WISDOM -----

    धर्म  के  नाम  पर  लोग  कितना  लड़ते -झगड़ते  हैं   लेकिन  सत्य   यही  है  कि  जैसे  सूर्य  एक  है  वैसे  ही  ईश्वर  भी  एक  है , हम  अपनी  सुविधा  अनुसार  उसे  अपने -अपने  ढंग  से  पुकारते  हैं l बहुत  सरल  ढंग  से  देखें  तो  एक  हिन्दू  अचानक  दुर्घटना  होने , चोट  लगने  पर  कहेगा 'हाय  राम ',  मुस्लिम  कहेगा  'उई  अल्लाह '   ईसाई  कहेगा  'ओ माय गॉड '  !  पुकारते  सब  उसी  अज्ञात  शक्ति  को  हैं  बस  ! भाषा  अलग  और  नाम  अलग  है  l  सभी  धर्मों  की  मूल  शिक्षा  एक  सी  हैं , सभी  ने  सत्य , अहिंसा , प्रेम , करुणा , दया , ईमानदारी , कर्तव्यपालन   आदि  सद्गुणों  को  अपनाकर  सन्मार्ग  पर  चलने  पर  जोर  दिया  है  l  अपने  ईश्वर  को  पुकारने  के  तरीके  चाहे  हमारे  भिन्न -भिन्न  हों   लेकिन  धर्म  सारे  संसार  के  लिए  एक  ही  हो  ' मानव  धर्म ' --मनुष्य  की  चेतना  विकसित  हो  , वह  सच्चा  इन्सान  बनें  , तभी  संसार  में  सुख -शांति  आएगी  l -------  जापानी  संत  नान -इन  के  पास  एक  कैथोलिक  पादरी  मिलने  गए  l  उन्होंने  उनसे  कहा --- " मेरे  पास  ईसा   के  उपदेशों  की  एक  पुस्तक  है  , यह  मुझे  अत्यंत  प्रिय  है  l  मैं  इसे  आपको  पढ़कर  सुनाना  चाहता  हूँ  l " संत  नान -इन  ने  कहा  --- " अवश्य  , यह  मेरे  ऊपर  अनुग्रह  होगा   l "  यह  सुनकर  पादरी  ने  'दि सरमन  ऑन  दि  माउंट  '  की  कुछ  पंक्तियाँ  पढ़ीं  l  इन्हें  सुनकर  नान -इन  भावविभोर  हो  गए  l  उनकी  आँखों  से  आँसू  बह  निकले   और  वह  ध्यानस्थ  हो  गए  l  ध्यान  टूटने  पर  उन्होंने  कहा --- " ये  तो  बुद्ध  के  वचन  हैं , इन्हें  सुनकर  मैं  धन्य  हो  गया  l " यह  सुनकर  पादरी  बोले  ---"  लेकिन  ये  तो  ईसा  के  वचन  हैं   l "  इस  पर  नान -इन  ने  कहा --- "  तुम  जो  भी  नाम  दो  , पर  मैं  कहता  हूँ  , जहाँ  ज्ञान  और  प्रेम  अपने  शिखर  पर  होते  हैं ,  मानव  चेतना  का  शिखर  होता  है  , वहां  सब  एक  हैं ,  फिर  उनका  स्वरुप  कोई  भी  क्यों  न  हो  l "