7 August 2021

WISDOM -------

 मदनमोहन  नाम  का  एक  नवयुवक    आगरा  के  प्रसिद्ध   कॉलेज   में  शिक्षा  प्राप्त  करने  पहुंचा  l   उसने  खाड़ी  का  धोती - कुरता  पहना  हुआ  था  व  माथे  पर  तिलक  लगा  रखा  था   l  वो  दिन  भारत  की  गुलामी  के  दिन  थे  l   अत:  शिक्षक  ने   उसकी   इस  वेशभूषा  को  देखकर  उससे  अंग्रेजी  में  पूछा ---- " तुम्हे  ब्रिटिश  वेशभूषा  में   कक्षा  में  आना  चाहिए  था  l  :  यह  सुनकर  मदनमोहन   ने   शिक्षक  से  अंग्रेजी  में  ही  प्रश्न  किया  ---- "  मैं  इस  देश  का  वासी  हूँ  ,  फिर  मैं  अपने   ही    देश  में    भारतीय  वेशभूषा  में  क्यों  नहीं  आ  सकता   ? "  उसके  इस  प्रश्न  का  उत्तर  शिक्षक` के  पास  नहीं  था   l   उन्हें  चुप  होना  पड़ा    कालांतर  में  यही   मदनमोहन       स्वामी  कृष्णबोधानंद  के  नाम  से  विख्यात   हुए  l   इन्होने  1942   में  सम्पूर्ण  भारत  में  स्वदेशी  चलाने   की  प्रेरणा  दी   l 

6 August 2021

WISDOM -----

   प्रत्येक  व्यक्ति  अपने  जीवन  में   सफल  होना  चाहता  है ,  जो  लक्ष्य  उसने  निर्धारित  किया  है  ,  उसे  पा  लेना  चाहता  है  l   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  ने  सफलता  के  दो  मूल  मन्त्र  बताएं  हैं  -----  अपनी क्षमता  का  पूर्ण  उपयोग    एवं   ईश्वर     विश्वास   l   ये  दोनों  ही  सफलता  की  कुंजी  हैं   l   आचार्य  श्री  लिखते  हैं ----  हमें  अपने   कार्य  को  करने   के  लिए  बड़ी  मेहनत  करनी  चाहिए   l   जब  तक  हम   पूरा     प्रयास      न  कर  लें   तब  तक  हमें   मेहनत  करनी  चाहिए  l   यदि  प्रयास  करते - करते  हम   थक  भी  जाएँ   तो  हमें  अपनी  ऊर्जा  फिर  से  बटोरकर   पुन  :  उस  काम  में  जी  जान  से  जुट  जाना  चाहिए   l   जब  किसी  भी  कार्य  को  मन  से  , शरीर  से  एवं  भाव  से  करने  लगते  हैं   तो  हम  अपनी  क्षमता  का  पूर्ण    सदुपयोग    करने  लगते  हैं    l   अपनी   क्षमता  का  पूर्ण   उपयोग  करने  के   साथ  हमें    ईश्वर  पर  भरोसा  करना  ही  चाहिए   l   इसका  अर्थ  है   कि   हम  यह  भावना  रखते  हुए    भगवान  से  प्रार्थना  करें   कि   हे  प्रभु   !  हम  अपनी  सम्पूर्ण  क्षमता  लगाकर  जो  कर  सकते  थे    कर  चुके   l   हमारी  क्षमता  सीमित   है  परन्तु  आप   पूर्ण  व  अनंत  हैं  ,  आपकी  क्षमता  व  ऊर्जा  कभी  खत्म  होने  वाली  नहीं  है   l   अब  हमारा  सफल  होना  या  न  होना    केवल  आपके  वश  में  है  ,  हमें  आप  पर  पूर्ण  विश्वास  है  ,  आप  हमारी  मदद  करें  l   यही  है  ईश्वर  विश्वास   l  "  

WISDOM ------

   महाराष्ट्र  के  प्रख्यात  विद्वान्  पंडित  परचुरे  शास्त्री  को  कोढ़  की  बीमारी  हो   गई  l  परिवार  व  समाज  ने  उन्हें  उपेक्षित  कर  दिया  l   गहन  निराशा  में  उन्होंने  निश्चय  किया  कि   वे  अपना  अंतिम  समय   बापू  के  आश्रम  में  बिताएंगे   और  वे  सेवाग्राम  के  पास   एक  निर्जन  मार्ग  पर  लेट  गए   l   उन्हें  बहुत  लोगों  ने  देखा  , परन्तु  सेवा  के  लिए  कोई  आगे  नहीं  आया   l   बापू  को  जैसे  ही  यह  पता  चला   तो  वे  तुरंत  उनको   आश्रम  ले  आये   और  उनकी  महीनों  तक  सेवा  की   l  परचुरे  शास्त्री   बापू  के  सदव्यवहार   से  स्वस्थ  हो  गए  l   बापू  ने  कोरे  उपदेश  नहीं  दिए  ,  वे  जो  कहते  थे  उसको  अपने  आचरण  से   सिद्ध  करते  थे   l 

5 August 2021

WISDOM-------

      श्रीमद्भगवद्गीता  के   महान   व्याख्याकार  लोकमान्य  तिलक   ने   गीता  के  एक  श्लोक  की  अनुभूति  की  , श्लोक  में  भगवान  कहते  हैं  ---- जिस  प्रकार  एक  ही  सूर्य  , सम्पूर्ण  लोकों  को  प्रकाशित  करता  है  ,  उसी  प्रकार  एक  ही  आत्मा  ,  सम्पूर्ण  क्षेत्र  को  प्रकाशित  करती  है   l   तिलक  इस  श्लोक  पर  विचार  कर  रहे  थे  ,  उन्होंने  अपनी  मन: स्थिति  बताते  हुए  एक  स्थान   पर लिखा  है  -------   वर्षा  के  दिन  थे   ,   एक  सुबह  रास्ते  से  निकलते  समय   उन्होंने  देखा   रास्ते  के  किनारे   जगह - जगह  गड्ढे   बन  गए  हैं  ,  इन  गड्ढों   में  पानी  भर  गया  था  ,  कुछ  गड्ढे  बड़े  थे  ,  कुछ  छोटे  थे  ,  सब  में  पानी  भरा  था  ,  कुछ  में  जानवर   नहा    रहे  थे  कुछ  खाली  थे   l   सुबह  का  समय  था  ,  उस  समय  जो  दृश्य  था    उसने  मुझे  नई   अनुभूति  प्रदान  की   l   तिलक  लिखते  हैं --- मैंने  देखा  सूरज  एक  है  ,  गंदे  गड्ढे  में  भी  उसी  का  प्रतिबिम्ब  है   और  स्वच्छ  जल  में  भी  ,  दोनों  में  कोई  अंतर  नहीं  है   l   गंदगी  जल  में  है  लेकिन  प्रतिबिम्ब  वैसा  ही  निर्दोष  और  पवित्र  है  ,  फिर   यह  एक  सूर्य    समूची  धरती  पर  कितने  ही  सरोवरों  आदि  में  प्रकाशित  होगा   l   एक  ही  सूर्य  सारे  संसार  को  प्रकाशित  करता  है  l   "             सूर्य  एक  है ,  एक  ही  गगन   है  , प्रकाश  एक  है  ,    मनुष्य  ने  अपने  स्वार्थ  और  अहंकार  के  कारण    ही  ऊंच - नीच   ,  बड़े - छोटे  तथा  जाति   व  धर्म  के  आधार  पर  भेदभाव  किए   हैं  l 

WISDOM ------

     सोमनाथ  लूटकर  महमूद  गजनवी  लौट  रहा  था  तो  मार्ग  में   राजपूतों  की  एक  टुकड़ी  से  मुकाबला  करना  पड़ा  l   उसकी  विशाल  सेना  के  सामने   मात्र  सौ -सवा  सौ   रणबाँकुरे   खड़े  थे   l  गजनवी  हँस   पड़ा  ,  बोला  ---- " इन  बेवकूफों  को  समझाओ  l   क्यों  जान  देते  हो  l "  घुड़सवारों  का  नेतृत्व  एक  अस्सी  साल  के  वृद्ध  कर  रहे  थे   l   वे  बोले  --- " बादशाह  !  हम  राजपूत  मृत्यु  से  कभी  नहीं  डरते  l   हमारी  निगाह  में  तुम  एक  लुटेरे  हो   l   भारत  विजेता  कहकर  हमारा  अपमान   न  करो   l   जब  तक  इस  धरती  पर  एक  भी  राजपूत  जीवित  है  ,  तब  तक  भारत  विजय  का  स्वप्न  भी  मत  देखना   l  "  युद्ध  छिड़  गया  l   उस  छोटे  से  समूह  ने  वह  कौशल  दिखाया    कि   एक  -  एक  ने  दस - दस  को  मार   गिराया   l   गजनवी  की  सेना  को  पसीना  आ  गया  l   पर  वे  कब  तक  टिकते  l   सभी  वीरगति  को  प्राप्त  हुए   l  महमूद  गजनवी  अपने  सेनापति  से  बोलै  ---- " तुम  ठीक  कहते  हो   l   इस  देश  में  बल  से  कुछ  प्राप्त  नहीं  किया  जा  सकता  l   इसे  मात्र  छल  से  ही  हराया  जा  सकता  है  l   गजब  के  हैं  ये  लोग  l  "     हमारी   आपसी  फूट   और  जागरूकता  की  कमी   ने  ही  देश  को  युगों  की  गुलामी  दी  ------ 

4 August 2021

WISDOM------

   धर्म  का  अर्थ  है  ---- सत्य  और  न्याय  के  पथ  पर  चलना ,    अत्याचार , अन्याय  का  विरोध  करना  l   जो  लोग  अनैतिक  और  अमर्यादित  कार्य  कर  रहे  हैं  ,  उनका  विरोध  करना  ,  उन्हें  ऐसा  करने  से  रोकना  धर्माचरण  है  l   युगों  से  यही  देखा  गया  है   कि   धर्म  की  बात  करने  वाले  ही  धर्म  के  विरुद्ध  कार्य  करते  है   ,  अत्याचारी  और  अन्यायी  का  समर्थन  करते  हैं   l   महाभारत  में  कुलगुरु  कृपाचार्य    धर्म   की  सूक्षम्ता  को  गहराई  से  जानते  थे   l  कुलगुरु  का  कर्तव्य  होता  है  कि   कुल  में  धर्म  की  प्रतिष्ठा  हो   l   लेकिन  उन्होंने  दुर्योधन  की  अनीति  का  कभी  विरोध  नहीं  किया  ,  जब  द्रोपदी  का  चीरहरण  हुआ  तब  भी  वे  खामोश  रहे  l   प्रभावशाली  लोग  जब  अत्याचार  और  अन्याय    को  होते  देख    चुप  रहते  हैं  ,   तो  इससे  अत्याचारियों  को  और  बढ़ावा  मिलता  है  और  उसका  परिणाम  महाभारत   के  रूप  में  सामने   आता   है   l 

3 August 2021

WISDOM -----

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं  ----- "  मनुष्य  शरीर  होने  के    नाते     जीवन  में  गलतियों  का  होना  स्वाभाविक  है  ,  पर  उन  गलतियों  से  सीख  प्राप्त  करना   महत्वपूर्ण  घटना  है   l  सामान्य   मनुष्य   एक  गलती  करता  है  ,  उससे  कुछ  सीखता  नहीं    है  ,  और  आदतन  वही   गलतियाँ   बार - बार  करते  चला  जाता  है  l   आचार्य श्री  लिखते    हैं   ----- "  यदि  लोग  अपने  दोषों  का  चिंतन  किया  करें  ,  उन्हें  स्वीकार  कर  लिया  करें    और  उनका  दंड  भी  उसी  साहस  के  साथ  भुगत  लिया  करें    तो  व्यक्ति  की  आत्मा  में  इतना  बल  आ  जाता  है    कि   कोई  और  साधन - सम्पन्नता   न  होने  पर  भी   वह  संतुष्ट  जीवन  जी  सकता  है   l   "                                            आज  के  समय  में  बढ़ते  हुए  तनाव  ,   सिरदर्द    का  एक  बड़ा  कारण  यह  भी  है   कि   लोग  अपने  दोषों  को  छिपाते  हैं   l   अच्छाई  में  गजब  का  आकर्षण  होता  है  ,  इस  कारण  बुरे  से  बुरा  व्यक्ति  भी    स्वयं  को  समाज  में  अच्छा  व  सदाचारी  दिखाना  चाहता   है    ,   अपने   दोषों  को  ,     अपने  द्वारा  किए   गए  गलत  कार्यों  को  समाज  से  छुपाना  चाहता  है   l   कुत्सित  मानसिकता  के  व्यक्ति    लोगों  की  ऐसी  कमजोरियों  का  पता  लगाकर   उनसे  अपना  स्वार्थ  सिद्ध  करते  हैं  ,  उनको  ब्लैकमेल  करते  हैं    l   यदि  मनुष्य  के  जीवन  में  अध्यात्म  विकसित  हो  जाए   तो  वह  अपने  जीवन  को  खुली  किताब  रखे  ,  अपने  दोषों  को    साहस  के  साथ  स्वीकार  करे  और  दूर  करने  का    निरंतर  प्रयास  करें   l   आचार्य श्री    लिखते  हैं  ---- ' जो  दोषों  को  छिपाते  हैं   वे  गिरते  चले  जाते  हैं   पर  जो  बुराइयों  को  स्वीकार  करता  है  ,  उसकी  आत्महीनता  तिरोहित  हो  जाती  है  l    भूल  को  स्वीकार  करने  से   और  उसका  प्रायश्चित  करने  से    आत्मा  की  जटिल  ग्रंथियां  मुक्त  होती  जाती  हैं  ,  ऐसे  साहसी  व्यक्ति  ही   सांसारिक  सुख - वैभवों  का   भी  लाभ  पाते  हैं   l  "