13 September 2020

WISDOM -----

   किसी  का  मूल्यांकन   उसके  बहिरंग  रूप  से  नहीं  ,  वरन  उसकी  संस्कार  निधि  द्वारा  किया  जाना  चाहिए  l   वास्तव  में  सुन्दर   तो वही  है   जो  दूसरों  और  स्वयं  के  प्रति   अच्छी  भावनाएं  रखे  l   सुंदरता  का  संबंध   व्यक्तित्व  की  चमक  से  है   और  यह  तभी  पैदा  होती  है   जब  व्यक्ति  के  भाव , विचार   व  व्यवहार  अच्छे  हों   l   मैक्सिको  सिटी   में  पैदा  हुई    अश्वेत  लुपिटा  न्योंगो    को  हॉलीवुड  फिल्म   ' 12  इयर्स  ए   स्लेव  '  में  बेहतरीन  अदाकारी  के  लिए  सर्वश्रेष्ठ  सह - अभिनेत्री  का  पुरस्कार  मिला  l   पुरस्कार  मिलने  के  उपरांत  उसे  एक  पत्र  मिला  ,  जिसमे  कुछ  इस  प्रकार  लिखा  था  --- '  प्रिय  लुपिटा ,  तुम  बहुत  किस्मत  वाली  हो  l   तुम  अश्वेत  हो  ,  यानि  तुम्हारा  रंग  काला  है  ,  फिर  भी  तुम्हे  इतनी  शोहरत  और  सफलता  मिली  l     मैं  बाहरी  सौंदर्य    को  बढ़ाने  के  प्रयास  में  लगती   ,  उससे  पहले   तुम्हे  मिली  सफलता   ने  मुझे   यह  एहसास   कराया  कि   सुंदरता  बाहर  की  नहीं  ,  अंदर  की  होनी  चाहिए   l '  पत्र  लिखने  वाली  लड़की  भी   अश्वेत  थी   और  उसे  लगता  था   कि   काले  रंग  वाली  लड़कियों  को  सफलता  नहीं  मिल  सकती  l     शरीर    की  सुंदरता  पार्थिव  है    यह  सुंदरता  उम्र  बढ़ने  के  साथ - साथ  अधिक  दिनों  तक  टिकी   नहीं  रह  सकती  l  केवल  व्यक्ति  के  अच्छे  कार्य  ही  होते  हैं  ,  जो  पुण्य  रूप  में  संचित  होकर   उसके  ओज   को  बढ़ाते  हैं   और  उसे  आकर्षक  बनाते  हैं  l 

12 September 2020

WISDOM -------

   आज   का   समय  ' यूज  एंड  थ्रो  '  का  है   l    धन - वैभव  को  प्रमुखता  देने  के  कारण   मनुष्य  भी  चाहे  वह  नर   हो  या  नारी  ,  वस्तु  की  तरह  उसे  इस्तेमाल  किया  जाता  है  l   हम  इनसान   बने ,  वस्तु  नहीं  ,  इसके  लिए  जागरूकता  की  जरुरत  है  l   एक  छोटी  सी  कहानी  है   जो  यह  बताती  है  कि   कोई  शक्तिवान , अहंकारी     यदि  किसी  कमजोर  की  मदद  लेता  है   तो  निश्चित  ही  उसके  पीछे  उसका  कोई  बड़ा  स्वार्थ  होता  है  l   स्वार्थ  पूरा  होते  ही  उसे  उपेक्षित  ( थ्रो ) कर  दिया  जाता  है  l    विद्वानों   का कथन  है   कि   हम  विवेकशील  बने ,  सतर्क  रहें  ,  कहीं  हमारी  योग्यता  का  फायदा  गलत  लोग   तो  नहीं  उठा  रहे  l   कहानी  है ---- एक  शेर  को   एक  बार  बारहसिंगा  खाने  की   बड़ी  इच्छा  हुई   l   उसने  एक  सभा  की   और  सियारों  से  कहा   कि   वह  चलने - फिरने  में  असमर्थ  है  , अत:  बारहसिंगा  को  पकड़ने  में  वे  उसकी  मदद  करें ,   तो  उन्हें  भी  उसका  मांस  खाने  को  मिलेगा  l   सियार  बहुत  खुश  हुए  ,  अपनी   ख़ुशी  जंगल  में  सबसे  बताते   फिरे ,  कि   देखो  शेर  को  भी  हमारी  जरुरत  है  l   लोमड़ी  ने  उन्हें  बहुत  समझाया   कि   बारहसिंगा  खाने   के बाद  शेर  तुमको  भी  मार  डालेगा  ,  उसकी  बातों  में  न  आओ  l   लेकिन  सियार  तो  सियार  ,  वे  लालच  में  अपना  होश  खो  बैठे  थे  l   आखिर   सियार  के सहयोग  से  शेर  ने  बारहसिंगा  को  मारा  l  मांस  का  बंटवारा  शेर  को  ही  करना   था --- उसने  शिकार  के  टुकड़े  किए   और  कहा --' एक  टुकड़ा  राजवंश  का  है  l   दूसरा  टुकड़ा  अधिक  पुरुषार्थ  करने  के  कारण  मेरा  है   और  तीसरा  स्वयंवर  जैसा,   उसे  पाने  के  लिए   प्रतिद्वंदिता  में  जो  आना  चाहे  ,  वो  मेरे  साथ  संघर्ष  करे  l  "  सियार  को  लोमड़ी  की  बात  याद  आ  गई  ,  किसी  तरह  जान  बचाकर  वे  भागे  l  कहानी   की यही  शिक्षा  है   कि   धूर्त  के  साथ  सहयोग  भी   हितकारी नहीं  होता  ,  जहाँ  तक  हो  उससे  बचना  चाहिए  l 

11 September 2020

WISDOM -----

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ----- ' धनी   होने  में  बुराई  नहीं  है  l   बुरा  है  यह  समझना  कि   धन  अपने  साथ  हर   सुख - सुविधा  का  साधन  लेकर  आएगा  ,   क्योंकि  ऐसा  होना  संभव  नहीं  है  l   व्यक्ति  चाहे  कितना  भी  धनी   हो  , लेकिन  ख़ुशी ,  शान्ति   और  प्रेम  के  लिए   उसे  अलग  से  प्रयास  करने  होंगे  l '

  मशहूर  हास्य  अभिनेता  चार्ली  चैपलिन   का  बचपन  अभावों  में  व्यतीत  हुआ  ,   लेकिन  बाद  में   बहुत  अमीर  होते  हुए  भी   उन्होंने  हमेशा  यह  याद  रखा   कि   पैसा  ही  सब  कुछ  नहीं  होता  l   अमेरिका  के   प्रसिद्ध   उद्दोगपति    ऐंड्र्यू   कारनेगी   ने  ब उन्होंने  हुत  पैसा  कमाने  के  बाद  भी   अपना  सारा  धन   गरीबों  के  लिए  पुस्तकालय  बनाने  में  खरच  कर  दिया  l   अमेरिका  के  चौथाई  से  ज्यादा  सार्वजनिक  पुस्तकालय   कारनेगी   के  दान  से  ही  खड़े  हो  पाए  l   बाद  में    उन्होंने   एक  साक्षात्कार  में  यह  कहा  भी  था  कि   उन्हें  जीवन  में  सबसे  ज्यादा  संतोष   दुनिया  का  सर्वाधिक  अमीर   बनने  में  नहीं  ,  बल्कि  गरीबों  के  लिए  पुस्तकालय  बनाने  से  मिला  l 

10 September 2020

WISDOM----

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  का  कहना  है ---  केवल  विचारों  पर  संयम  करना  पर्याप्त  नहीं  है   l   विचारों  के  साथ  वाणी  पर  संयम  करना  अनिवार्य  है  l   वाणी  की  वाचालता  शक्ति  के  क्षरण  के  अतिरिक्त   संबंधों  में  कटुता  भी  पैदा  करती  है   l   वाणी  के  माध्यम  से  हमारी  मानसिक  शक्तियों  का  सर्वाधिक  क्षरण  होता  है   l   अहंकार , कामुकता , क्रोध , द्वेष  से  लेकर   तृष्णा , वासना   की  अभिव्यक्ति  का  माध्यम  भी  वाणी   बन  जाती  है   l   अंदर  के  कुत्सित    उद्वेग   वाणी  के  माध्यम  से  शब्दों  का  आकार   पाते  हैं  l   इसलिए  वाणी  की  शक्ति  का   संरक्षण , संयम  व  सदुपयोग   भी  शक्ति  संरक्षण  का  एक  महत्वपूर्ण   आधार  कहा  जा  सकता  है l 

WISDOM -------

  मृत्यु   होने पर  अपनी  धन - दौलत  छोड़कर  जाना   हमारी  मज़बूरी  है   क्योंकि  यही  प्रकृति  का  नियम  है  कि   व्यक्ति  खाली   हाथ  आता  है  और  खाली  हाथ  जाता  है  l   इसलिए  ऋषियों  ने , आचार्य  ने  सिखाया  है  कि   जीवन  को  उदारतापूर्वक  जिएं  l   यही  शिक्षण  देने  वाली  एक  कथा  है  -----   एक  गाँव  में  एक  सेठ  था ,  वह  बहुत  धनवान  था  लेकिन  बहुत   दुःखी   रहता  था   क्योंकि  उसके  गाँव वाले   उससे बहुत  नफरत  करते  थे  l   एक  दिन  उसने  गाँव  वालों  से  कहा  --- ' तुम   सब मुझसे  इतनी  नफरत  क्यों  करते  हो   l  मैं  अपनी  सारी   सम्पति  दान  में  दे  दूंगा  जिससे  सारा  गांव  खुशहाल  हो  जायेगा  ,  लेकिन  मरने  के  बाद  दूंगा  l  तुम  लोग  कुछ  साल  इंतजार  भी  नहीं  कर  सकते  l  "  गाँव  के  लोग  उसका  उपहास  करते , भला - बुरा  कहते  l   एक  दिन  सेठ  को   किसी  काम  से  दूसरे  गाँव  जाना  था  ,  वह  एक  जंगल  से  होकर  गुजर  रहा  था   l  रास्ते  में  थककर   पेड़  के  नीचे   विश्राम  करने  लगा  l   उस  पेड़  से  थोड़ी  दूरी   पर   एक  गाय  और  सुअर   आपस  में  बात  कर  रहे  थे   l   सेठ  जानवरों  की  भाषा  समझता  था  सो  ध्यान  से  सुनने  लगा   l --- सुअर   गाय  से  कह  रहा  था --- " मुझे  समझ  में  नहीं  आता  कि   सभी  तुमसे  ``इतना  क्यों  प्यार  करते  हैं   और  मुझे  कोई  पूछता  तक  नहीं  , जबकि   मेरे    तो  मरने  के  बाद   मेरा   गोश्त , चर्बी , चमड़ा   सभी  कुछ  इनके  काम  आता  है  ,  फिर  भी  जीते  जी  मुझे  नफरत  की  नजर  से  देखा  जाता  है  l   और  तुमको  सदा  सम्मान   मिलता है  ,  लोग  इतने  प्यार  से  पालते  हैं  l  "  गाय  सुअर   से  बोली --- ' भाई  देखो , मैं  जीते जी  उन्हें   दूध  देती  हूँ  , और  वह  सब  मैं  उन्हें  उदारता पूर्वक  देती  हूँ  l  तुम  तो  जीते जी  उन्हें  कुछ  नहीं  देते  l   तुम्हारे  मरने  के  बाद  ही  उन्हें   कुछ मिलता  है   l   दुनिया  का  एक  दस्तूर  जान  लो  ' लोग  भविष्य  में  विश्वास  नहीं  करते  ```` वे  वर्तमान  में  विश्वास  करते  हैं   l  अत:  यदि  तुम  उन्हें  जीते जी  कुछ    दो    तो   वे  तुम्हे  बेहतर  ढंग  से  अपनाएंगे  l "  यह   सुनकर सेठ  को  अपनी  गलती  का  एहसास   हुआ  , वह  वापस   गाँव आया  और  अपनी  आय   का  एक  अंश  गरीब  और  जरूरतमंदों    के  लिए  खर्च  करने   लगा  l  गाँव  वालों  को  भी  उससे  अपनापन  हो  गया  और  सेठ   का जीवन  भी  संतोष  व  ख़ुशी  से  भर  गया  l 

9 September 2020

WISDOM -----

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं --- ' इस  संसार  में   अंधकार   भी  है  और  प्रकाश   भी ,  स्वर्ग  भी  है  और  नरक  भी  ,  पतन  भी  है  और  उत्थान  भी ,  त्रास   भी  है   और  आनंद  भी  l   इन  दोनों  में  से  मनुष्य   अपनी  इच्छानुसार   जिसे  चाहे  चुन  सकता  है   l   कुछ  भी  करने  की  सभी  को  छूट  है  ,  पर  प्रतिबन्ध  इतना  ही  है   कि   कृत्य  के  प्रतिफल  से  बचा  नहीं  जा  सकता  l   स्रष्टा  के  निर्धारित  क्रम  को   तोड़ा   नहीं   जा  सकता   l 

WISDOM----- कलियुग का एक लक्षण है --- लोग अच्छाई में भी बुराई खोज लेते हैं

   एक  कथा  है ---- एक  बार  एक  आदमी  एक  ऐसे  गाँव  में  पहुँच  गया  ,  जहाँ  सब  अंधे  रहते  थे  l  नेत्रहीन  होते  हुए  भी  वे  सभी  काम  आसानी  से  कर  लेते  थे  l   वहां  उसे  एक  लड़की  मिली  बहुत  सुन्दर  थी , शिष्ट  थी  l   उस  गाँव  में  सभी  अंधे  थे  ,  वह  भी  अंधी  थी  l  उस  आदमी   को  उससे  प्रेम  हो  गया  l   वह  उसे  उसके  सौंदर्य  का  भान  कराता  l  सुन्दर  दृश्यों  का  वर्णन  करता , रंग  बताता   तो  वह  पूछती  कि   कैसा  होता  है  ये  रंग   ?  वह  बार - बार  यही  कहता  कि   इसके  लिए  आँखे  होनी  चाहिए  l   उस  लड़की  ने    उससे   विवाह  करने  के  लिए  घर  के  बुजुर्गों   से    बात  की   ,  पर  साथ  में  यह  भी  बताया  कि   उसमे  एक  बहुत  बड़ी  कमी  है  कि   उसे  दिखाई  देता  है  l   वह  हम  लोगों  की  तरह  नहीं  है  l   सभी  अंधे  बुजुर्ग  बोले --- " यह  बड़ी  भयावह  बीमारी  है  l   सारी   तकलीफें  इसी  से  पैदा  होती  हैं  l   तुम  चिंता  न  करो , हम  उसका  इलाज   कर देंगे  ,  फिर  तुम्हारी  शादी   उससे  करा  देंगे  l  "  सब  अंधे  उसके  पीछे  पड़   गए  ,  उनका  चक्रव्यूह  इतना  प्रबल  था    कि   वह   उनके  जाल  में  फँस   गया  l       लेकिन उसकी  आँखे  थी ,  उसमे  विवेक  था ,  वह  जागरूक  था   इसलिए  उन  अंधों  के ,  उसके  विवेक  को  नष्ट  करने  के  ,  उसकी  जागरूकता  को  पनपने  न  देने  के  सारे  प्रयास  विफल  हो  गए   l   वह  किसी  तरह  बच  कर  निकल  भागा  l  लड़की  कहती  रही  ,  हम  तुमसे  प्रेम  करते  हैं , मत  भागो  ,  लेकिन  वह  उस  चक्रव्यूह  से  बच  निकला  l    

अंधों    के  गाँव  में  देखना  भी  एक  बीमारी  है  l   आज  के  संसार  की  स्थिति  भी  ऐसी  है   l  विवेकवान  होना , जागरूक  होना  भी  एक  बीमारी  है  ,   बनो  तो  उनके  जैसे  l