किसी का मूल्यांकन उसके बहिरंग रूप से नहीं , वरन उसकी संस्कार निधि द्वारा किया जाना चाहिए l वास्तव में सुन्दर तो वही है जो दूसरों और स्वयं के प्रति अच्छी भावनाएं रखे l सुंदरता का संबंध व्यक्तित्व की चमक से है और यह तभी पैदा होती है जब व्यक्ति के भाव , विचार व व्यवहार अच्छे हों l मैक्सिको सिटी में पैदा हुई अश्वेत लुपिटा न्योंगो को हॉलीवुड फिल्म ' 12 इयर्स ए स्लेव ' में बेहतरीन अदाकारी के लिए सर्वश्रेष्ठ सह - अभिनेत्री का पुरस्कार मिला l पुरस्कार मिलने के उपरांत उसे एक पत्र मिला , जिसमे कुछ इस प्रकार लिखा था --- ' प्रिय लुपिटा , तुम बहुत किस्मत वाली हो l तुम अश्वेत हो , यानि तुम्हारा रंग काला है , फिर भी तुम्हे इतनी शोहरत और सफलता मिली l मैं बाहरी सौंदर्य को बढ़ाने के प्रयास में लगती , उससे पहले तुम्हे मिली सफलता ने मुझे यह एहसास कराया कि सुंदरता बाहर की नहीं , अंदर की होनी चाहिए l ' पत्र लिखने वाली लड़की भी अश्वेत थी और उसे लगता था कि काले रंग वाली लड़कियों को सफलता नहीं मिल सकती l शरीर की सुंदरता पार्थिव है यह सुंदरता उम्र बढ़ने के साथ - साथ अधिक दिनों तक टिकी नहीं रह सकती l केवल व्यक्ति के अच्छे कार्य ही होते हैं , जो पुण्य रूप में संचित होकर उसके ओज को बढ़ाते हैं और उसे आकर्षक बनाते हैं l
13 September 2020
12 September 2020
WISDOM -------
आज का समय ' यूज एंड थ्रो ' का है l धन - वैभव को प्रमुखता देने के कारण मनुष्य भी चाहे वह नर हो या नारी , वस्तु की तरह उसे इस्तेमाल किया जाता है l हम इनसान बने , वस्तु नहीं , इसके लिए जागरूकता की जरुरत है l एक छोटी सी कहानी है जो यह बताती है कि कोई शक्तिवान , अहंकारी यदि किसी कमजोर की मदद लेता है तो निश्चित ही उसके पीछे उसका कोई बड़ा स्वार्थ होता है l स्वार्थ पूरा होते ही उसे उपेक्षित ( थ्रो ) कर दिया जाता है l विद्वानों का कथन है कि हम विवेकशील बने , सतर्क रहें , कहीं हमारी योग्यता का फायदा गलत लोग तो नहीं उठा रहे l कहानी है ---- एक शेर को एक बार बारहसिंगा खाने की बड़ी इच्छा हुई l उसने एक सभा की और सियारों से कहा कि वह चलने - फिरने में असमर्थ है , अत: बारहसिंगा को पकड़ने में वे उसकी मदद करें , तो उन्हें भी उसका मांस खाने को मिलेगा l सियार बहुत खुश हुए , अपनी ख़ुशी जंगल में सबसे बताते फिरे , कि देखो शेर को भी हमारी जरुरत है l लोमड़ी ने उन्हें बहुत समझाया कि बारहसिंगा खाने के बाद शेर तुमको भी मार डालेगा , उसकी बातों में न आओ l लेकिन सियार तो सियार , वे लालच में अपना होश खो बैठे थे l आखिर सियार के सहयोग से शेर ने बारहसिंगा को मारा l मांस का बंटवारा शेर को ही करना था --- उसने शिकार के टुकड़े किए और कहा --' एक टुकड़ा राजवंश का है l दूसरा टुकड़ा अधिक पुरुषार्थ करने के कारण मेरा है और तीसरा स्वयंवर जैसा, उसे पाने के लिए प्रतिद्वंदिता में जो आना चाहे , वो मेरे साथ संघर्ष करे l " सियार को लोमड़ी की बात याद आ गई , किसी तरह जान बचाकर वे भागे l कहानी की यही शिक्षा है कि धूर्त के साथ सहयोग भी हितकारी नहीं होता , जहाँ तक हो उससे बचना चाहिए l
11 September 2020
WISDOM -----
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ----- ' धनी होने में बुराई नहीं है l बुरा है यह समझना कि धन अपने साथ हर सुख - सुविधा का साधन लेकर आएगा , क्योंकि ऐसा होना संभव नहीं है l व्यक्ति चाहे कितना भी धनी हो , लेकिन ख़ुशी , शान्ति और प्रेम के लिए उसे अलग से प्रयास करने होंगे l '
मशहूर हास्य अभिनेता चार्ली चैपलिन का बचपन अभावों में व्यतीत हुआ , लेकिन बाद में बहुत अमीर होते हुए भी उन्होंने हमेशा यह याद रखा कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता l अमेरिका के प्रसिद्ध उद्दोगपति ऐंड्र्यू कारनेगी ने ब उन्होंने हुत पैसा कमाने के बाद भी अपना सारा धन गरीबों के लिए पुस्तकालय बनाने में खरच कर दिया l अमेरिका के चौथाई से ज्यादा सार्वजनिक पुस्तकालय कारनेगी के दान से ही खड़े हो पाए l बाद में उन्होंने एक साक्षात्कार में यह कहा भी था कि उन्हें जीवन में सबसे ज्यादा संतोष दुनिया का सर्वाधिक अमीर बनने में नहीं , बल्कि गरीबों के लिए पुस्तकालय बनाने से मिला l
10 September 2020
WISDOM----
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी का कहना है --- केवल विचारों पर संयम करना पर्याप्त नहीं है l विचारों के साथ वाणी पर संयम करना अनिवार्य है l वाणी की वाचालता शक्ति के क्षरण के अतिरिक्त संबंधों में कटुता भी पैदा करती है l वाणी के माध्यम से हमारी मानसिक शक्तियों का सर्वाधिक क्षरण होता है l अहंकार , कामुकता , क्रोध , द्वेष से लेकर तृष्णा , वासना की अभिव्यक्ति का माध्यम भी वाणी बन जाती है l अंदर के कुत्सित उद्वेग वाणी के माध्यम से शब्दों का आकार पाते हैं l इसलिए वाणी की शक्ति का संरक्षण , संयम व सदुपयोग भी शक्ति संरक्षण का एक महत्वपूर्ण आधार कहा जा सकता है l
WISDOM -------
मृत्यु होने पर अपनी धन - दौलत छोड़कर जाना हमारी मज़बूरी है क्योंकि यही प्रकृति का नियम है कि व्यक्ति खाली हाथ आता है और खाली हाथ जाता है l इसलिए ऋषियों ने , आचार्य ने सिखाया है कि जीवन को उदारतापूर्वक जिएं l यही शिक्षण देने वाली एक कथा है ----- एक गाँव में एक सेठ था , वह बहुत धनवान था लेकिन बहुत दुःखी रहता था क्योंकि उसके गाँव वाले उससे बहुत नफरत करते थे l एक दिन उसने गाँव वालों से कहा --- ' तुम सब मुझसे इतनी नफरत क्यों करते हो l मैं अपनी सारी सम्पति दान में दे दूंगा जिससे सारा गांव खुशहाल हो जायेगा , लेकिन मरने के बाद दूंगा l तुम लोग कुछ साल इंतजार भी नहीं कर सकते l " गाँव के लोग उसका उपहास करते , भला - बुरा कहते l एक दिन सेठ को किसी काम से दूसरे गाँव जाना था , वह एक जंगल से होकर गुजर रहा था l रास्ते में थककर पेड़ के नीचे विश्राम करने लगा l उस पेड़ से थोड़ी दूरी पर एक गाय और सुअर आपस में बात कर रहे थे l सेठ जानवरों की भाषा समझता था सो ध्यान से सुनने लगा l --- सुअर गाय से कह रहा था --- " मुझे समझ में नहीं आता कि सभी तुमसे ``इतना क्यों प्यार करते हैं और मुझे कोई पूछता तक नहीं , जबकि मेरे तो मरने के बाद मेरा गोश्त , चर्बी , चमड़ा सभी कुछ इनके काम आता है , फिर भी जीते जी मुझे नफरत की नजर से देखा जाता है l और तुमको सदा सम्मान मिलता है , लोग इतने प्यार से पालते हैं l " गाय सुअर से बोली --- ' भाई देखो , मैं जीते जी उन्हें दूध देती हूँ , और वह सब मैं उन्हें उदारता पूर्वक देती हूँ l तुम तो जीते जी उन्हें कुछ नहीं देते l तुम्हारे मरने के बाद ही उन्हें कुछ मिलता है l दुनिया का एक दस्तूर जान लो ' लोग भविष्य में विश्वास नहीं करते ```` वे वर्तमान में विश्वास करते हैं l अत: यदि तुम उन्हें जीते जी कुछ दो तो वे तुम्हे बेहतर ढंग से अपनाएंगे l " यह सुनकर सेठ को अपनी गलती का एहसास हुआ , वह वापस गाँव आया और अपनी आय का एक अंश गरीब और जरूरतमंदों के लिए खर्च करने लगा l गाँव वालों को भी उससे अपनापन हो गया और सेठ का जीवन भी संतोष व ख़ुशी से भर गया l
9 September 2020
WISDOM -----
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं --- ' इस संसार में अंधकार भी है और प्रकाश भी , स्वर्ग भी है और नरक भी , पतन भी है और उत्थान भी , त्रास भी है और आनंद भी l इन दोनों में से मनुष्य अपनी इच्छानुसार जिसे चाहे चुन सकता है l कुछ भी करने की सभी को छूट है , पर प्रतिबन्ध इतना ही है कि कृत्य के प्रतिफल से बचा नहीं जा सकता l स्रष्टा के निर्धारित क्रम को तोड़ा नहीं जा सकता l
WISDOM----- कलियुग का एक लक्षण है --- लोग अच्छाई में भी बुराई खोज लेते हैं
एक कथा है ---- एक बार एक आदमी एक ऐसे गाँव में पहुँच गया , जहाँ सब अंधे रहते थे l नेत्रहीन होते हुए भी वे सभी काम आसानी से कर लेते थे l वहां उसे एक लड़की मिली बहुत सुन्दर थी , शिष्ट थी l उस गाँव में सभी अंधे थे , वह भी अंधी थी l उस आदमी को उससे प्रेम हो गया l वह उसे उसके सौंदर्य का भान कराता l सुन्दर दृश्यों का वर्णन करता , रंग बताता तो वह पूछती कि कैसा होता है ये रंग ? वह बार - बार यही कहता कि इसके लिए आँखे होनी चाहिए l उस लड़की ने उससे विवाह करने के लिए घर के बुजुर्गों से बात की , पर साथ में यह भी बताया कि उसमे एक बहुत बड़ी कमी है कि उसे दिखाई देता है l वह हम लोगों की तरह नहीं है l सभी अंधे बुजुर्ग बोले --- " यह बड़ी भयावह बीमारी है l सारी तकलीफें इसी से पैदा होती हैं l तुम चिंता न करो , हम उसका इलाज कर देंगे , फिर तुम्हारी शादी उससे करा देंगे l " सब अंधे उसके पीछे पड़ गए , उनका चक्रव्यूह इतना प्रबल था कि वह उनके जाल में फँस गया l लेकिन उसकी आँखे थी , उसमे विवेक था , वह जागरूक था इसलिए उन अंधों के , उसके विवेक को नष्ट करने के , उसकी जागरूकता को पनपने न देने के सारे प्रयास विफल हो गए l वह किसी तरह बच कर निकल भागा l लड़की कहती रही , हम तुमसे प्रेम करते हैं , मत भागो , लेकिन वह उस चक्रव्यूह से बच निकला l
अंधों के गाँव में देखना भी एक बीमारी है l आज के संसार की स्थिति भी ऐसी है l विवेकवान होना , जागरूक होना भी एक बीमारी है , बनो तो उनके जैसे l