27 August 2023

WISDOM -----

   संत  रज्जब  सदा  परवरदिगार  की  प्रार्थना  में  निमग्न  रहते  थे  और  जो  भी  उनके  संपर्क  में  आता  , उसे  भी  अच्छे  पथ  पर  चलने  की  प्रेरणा  देते  l  उनके  गाँव  में  जुबेर  नामक  एक  व्यक्ति  रहता  था  ,  उसे  जुआ  खेलने , शराब  पीने  और  लोगों  को  निरर्थक  परेशान  करने  की  आदत  थी  l  एक  दिन  ज्यादा  शराब  पीकर  वह  नाली  में  गिर  पड़ा  l  उसकी   गन्दी  आदतों    के  कारण  कोई  उसकी  सहायता  के  लिए  आगे  नहीं  आया  l  ऐसे  में  संत  रज्जब  उधर  से  निकले  l  उन्होंने  उसे  उठाया , उसका  मुंह  धुलाया   और  उसके  होश  में  आने  तक   उसकी  देखभाल  की  l  उसके  होश  में  आने  पर  वे  उससे  बोले --- " नौजवान  जिस  मुँह  से  परवरदिगार  को  बुलाते  हैं  ,  उसे  शराब  पीकर  कुत्सित  करना  किसी  गुनाह  से  कम  नहीं  है  l "  संत  रज्जब  की  कही  यह  बात  जुबेर  के  दिल  में  बैठ  गई   और  वह  सदा  के  लिए  नेक  इनसान  बन  गया  l 

24 August 2023

WISDOM -----

  ' क्रोध  एक  ऐसा  विकार  है  ,जो  अकल्पनीय  क्षति  पहुंचा  सकता  है  l '------- श्रेणिक  नामक  एक  राजा  था  l  चेलना  नाम  की  उसकी  रानी  थी  l  एक  बार  दोनों  महावीर  तीर्थंकर  के  दर्शन  कर  लौट  रहे  थे  तो  रानी  ने  देखा  कि  एक  दिगंबर  मुनि  भयंकर  शीत  में  तप  कर  रहे  हैं  l  यात्रा  में  रानी  बेहद  थक  गईं  थी  इसलिए   महल  में  लौटने  पर  उन्हें  गहरी  नींद  आ  गई  l  उनका  एक  हाथ   शीत  के  कारण  बिस्तर  से  नीचे  लटककर  अकड़  गया  l  आँखें  खुली  तो  बहुत  दरद  था  l  जब  सेंक  दिया  जा  रहा  था   तो  रानी  के  मन  में  सहज  ही  उस  मुनि  की  स्मृति  हो  आई  ,  जो  निर्वस्त्र  बैठा   भयावह  शीत  झेलता  तप  कर  रहा  था  ,  वे  बोल  उठीं --- " हे  भगवान  !  उस  बेचारे  का  क्या  हाल  होगा  , जब  मेरा  यह  हाल  हो  गया  है  ! "  राजा  ने  शब्द  सुने , संदेह  जन्मा   कि  रानी  के  मन  में  अवश्य  ही  कोई  परपुरुष  है  l  वे  बाहर  निकले   और  क्रोध  से  पागल  होकर  मंत्री  से  बोले  ---- "  रानी  अंदर  सो  रही  है  , तुम  अंत:पुर  जला  दो  l "  इसके  बाद  मन  शांत  करने  राजा  भगवान  महावीर  के  पास  पहुंचे  l  पहुँचते  ही    भगवान  महावीर  बोले  ---- "  चेलना  पवित्र  है , पतिव्रता  है  l  यह  तुमने  क्या  किया  ! "  तुरंत  राजा   श्रेणिक  वापस  लौटे  l  पूछा --- " महल  जला  दिया  क्या  ? "  मंत्री  ने  कहा ---- " हाँ , आपकी  आज्ञा  थी  l "  राजा  एकदम  शोक  में  डूब  गए  l  मंत्री  ने  कहा --- " राजन  !  दुःखी  न  हों  l मैं  जानता  था  , आपने  निर्णय  आवेश  में  लिया  l  महल  व  रानी  सुरक्षित  हैं   l  मैंने  प्रतीक  रूप  मर  हस्ति शाला  जला  दी  l " राजा  प्रसन्न  भाव  से  रानी  के  पास  पहुंचे  l   फिर  राजा  ने  संकल्प  लिया  कि   कभी  कोई  निर्णय  होश  खोकर ,  क्रोध  में  नहीं  लेंगे  l  

23 August 2023

WISDOM -----

   1 . एक  व्यापारी  घोड़े  पर  नमक  और  एक  गधे  पर  रुई  की  गांठें  लादे  जा  रहा  था  l  रास्ते  में  एक  नदी  मिली  l  पानी  में  घुसते  ही  घोड़े  ने  पानी  में   डुबकी   लगाईं   तो  काफी  नमक  पानी  में  घुल  गया  l  गधे  ने  घोड़े  से  पूछा  --- यह  क्या  कर  रहे  हो  ?  घोड़े  ने  कहा --- वजन  हल्का  कर  रहा  हूँ  l  यह  सुनकर  गधे  ने  भी   दो  डुबकी  लगाईं  ,  पर  उससे  गांठें  भीगकर  इतनी  भारी  हो  गईं  कि  उसे  ढोने  में  गधे  की  जान  आफत  में  पड़  गई  l   आचार्य  जी  कहते  हैं --- कुरीतियों  और  कुप्रचलनों  की   बिना  समझे -बूझे  की  गई  नक़ल   कठिनाइयाँ  बढ़ाती  है  , सुविधा  नहीं  l '  

2 .  एक  परिवार  में  विवाह  का  अवसर  था , बहुत  मेहमान  इकट्ठे  थे  ,  बहुत  मिष्ठान -पकवान  बन  रहे  थे  ,  तब  घर  की  एक  पालतू  बिल्ली  ने  बहुत  उधम  मचाया  l  हर  चीज  में  मुँह  डाल  देती   और  जूठा  कर  देती  l  घर  की  मालकिन  ने  उसे  पकड़कर  नांद  के  नीचे  बंद  कर  दिया  l  फिर  वह  काम  में  लग  गई  l  कई  रोज  काम  में  व्यस्त  रहने  के  कारण   उसे  बिल्ली  को  निकालने  की  बात  याद  न  रही   और  वह  बिल्ली  उसी  में  दबकर  मर  गई  l  बारात  जब  लौटकर  आई  और  बहू  ने  घर  में  प्रवेश  किया  ,  उसी  समय  मालकिन  को  बिल्ली  की  याद  आई  l  उसे  निकाला  गया  , तो  मरी  मिली  l  उसे  फिंकवाया  गया  l  नई  बहू  यह  सब  देख  रही  थी  l  उसने  समझ  लिया  कि   यही  इस  घर  की  परंपरा  है  l  उसके  एक  पुत्र  हुआ  l  पुत्र  के  बड़े  होने  पर  उसका  विवाह  हुआ , बारात  गई   और  नई  बहू  आई  l  उसने  भी  बारात  जाने  से  पहले  एक  बिल्ली  नांद  के  नीचे  बंद  की  ,  वह  बिल्ली  मर  गई   और  जैसे  ही  नई  बहू  ने  घर  में  प्रवेश  किया  ,  उसने   उस  मरी  बिल्ली  को  फिंकवाया  l  जो  उसने  देखा  था  ,  उसे  कुल  परंपरा  समझा  और  उसी  का  पालन  करने  में  अपना  धर्म  और  कल्याण  समझा  l   आजकल  विभिन्न  जातियों  और  धर्मों  में  ऐसी  ही  कई  अंध  परम्पराएँ  फैली  हैं  ,  जिनकी  कोई  उपयोगिता  नहीं  है   लेकिन  बिना  विचारे   उनका  क्रम  चलता  रहता  है  ,  भेड़ों  की  तरह  सब  उनका  अंधानुकरण   करते  चले  जाते  हैं  , उसमें  अपना  समय , ऊर्जा  व  धन  बरबाद   करते  हैं  l  

22 August 2023

WISDOM ------

   1 . हकीम  लुकमान  से  लोगों  ने  पूछा ---" वे  इतने  बुद्धिमान  कैसे  बने  ? " तो  वे  बोले --- "मुझे  बुद्धि  मूर्खों  से  मिली  l " लोगों  ने  पूछा  --- "कैसे ? '  लुकमान  बोले ---- " मैंने  उनके  जीवन  को  बारीकी  से  देखा   और  उनके  जीवन  में  जो  छोड़ने  लायक  लगा ,  उसे  अपने  जीवन  में  भी  छोड़  दिया  l  प्रेरणा  प्राप्त  करने  के  लिए   संसार  के  सभी  मार्ग  उपलब्ध  हैं  l " 

2 .  प्राचीन  समय  में  जब  मनुष्य  के  पास  प्रकाश  नहीं  था   तब  लोगों  ने  अंधकार  को   दूर  करने  के  अनेकों  उपाय   सोचे  किन्तु  कोई  भी  कारगर  नहीं  हुआ  l  किसी  ने  सुझाव  दिया  कि  हमें  अंधकार  को   टोकरी  में  भरकर   गड्ढे  में  डाल  देना  चाहिए  l  लोगों  ने  टोकरी  लेकर  ऐसा  प्रयास  करना  आरम्भ  कर  दिया  l  धीरे -धीरे  इसने  एक  प्रथा  का  रूप  ले  लिया  l  उसी  समय  एक  युवक  का  विवाह  एक  विदुषी  महिला  से  हो  गया  l  प्रथा  के  अनुरूप  उससे  भी  अंधकार  को   फेंकने  का  कार्य  करने  के  लिए  कहा  गया  l  यह  सुनकर  वह  हँसने  लगी  l  उसने  सूखे  पत्तों  को  एकत्र  किया   और  फिर  दो  पत्थरों  को  टकराया   तो  लोग  चकित  होकर  देखते  रह  गए  कि  आग  पैदा  हो  गई  और  अँधेरा  दूर  हो  गया  l  उस  दिन  से  लोगों  ने  अँधेरा  फेंकना  छोड़  दिया  , क्योंकि  वे  आग  जलाना  सीख  गए  थे  l  हम  भी  उन  गाँव  वालों  की  तरह  हैं  ,  जो  पाप , दोष , दुर्गुणों  से  लड़ते  रहते  हैं  ,  जबकि  सद्गुणों  को  अपनाने  पर  ये  अपने  आप  छूट  जाते  हैं  l  आचार्य श्री  लिखते  हैं  --हमें  अपने  जीवन  में  सकारात्मक  होना  चाहिए  l  प्रारम्भ  में   किसी  एक  अवगुण  को  छोड़ें  और  उसके  खाली  स्थान  को  किसी  एक  सद्गुण  से  भरें  l  ऐसा  निरंतर  प्रयास  करते  रहने  से  सन्मार्ग  पर  चलने  की  आदत  हो  जाएगी  और  जीवन  सकारात्मक  दिशा  में  ही  बढ़ेगा  l 

20 August 2023

WISDOM -----

    धर्म  के  नाम  पर  लोग  कितना  लड़ते -झगड़ते  हैं   लेकिन  सत्य   यही  है  कि  जैसे  सूर्य  एक  है  वैसे  ही  ईश्वर  भी  एक  है , हम  अपनी  सुविधा  अनुसार  उसे  अपने -अपने  ढंग  से  पुकारते  हैं l बहुत  सरल  ढंग  से  देखें  तो  एक  हिन्दू  अचानक  दुर्घटना  होने , चोट  लगने  पर  कहेगा 'हाय  राम ',  मुस्लिम  कहेगा  'उई  अल्लाह '   ईसाई  कहेगा  'ओ माय गॉड '  !  पुकारते  सब  उसी  अज्ञात  शक्ति  को  हैं  बस  ! भाषा  अलग  और  नाम  अलग  है  l  सभी  धर्मों  की  मूल  शिक्षा  एक  सी  हैं , सभी  ने  सत्य , अहिंसा , प्रेम , करुणा , दया , ईमानदारी , कर्तव्यपालन   आदि  सद्गुणों  को  अपनाकर  सन्मार्ग  पर  चलने  पर  जोर  दिया  है  l  अपने  ईश्वर  को  पुकारने  के  तरीके  चाहे  हमारे  भिन्न -भिन्न  हों   लेकिन  धर्म  सारे  संसार  के  लिए  एक  ही  हो  ' मानव  धर्म ' --मनुष्य  की  चेतना  विकसित  हो  , वह  सच्चा  इन्सान  बनें  , तभी  संसार  में  सुख -शांति  आएगी  l -------  जापानी  संत  नान -इन  के  पास  एक  कैथोलिक  पादरी  मिलने  गए  l  उन्होंने  उनसे  कहा --- " मेरे  पास  ईसा   के  उपदेशों  की  एक  पुस्तक  है  , यह  मुझे  अत्यंत  प्रिय  है  l  मैं  इसे  आपको  पढ़कर  सुनाना  चाहता  हूँ  l " संत  नान -इन  ने  कहा  --- " अवश्य  , यह  मेरे  ऊपर  अनुग्रह  होगा   l "  यह  सुनकर  पादरी  ने  'दि सरमन  ऑन  दि  माउंट  '  की  कुछ  पंक्तियाँ  पढ़ीं  l  इन्हें  सुनकर  नान -इन  भावविभोर  हो  गए  l  उनकी  आँखों  से  आँसू  बह  निकले   और  वह  ध्यानस्थ  हो  गए  l  ध्यान  टूटने  पर  उन्होंने  कहा --- " ये  तो  बुद्ध  के  वचन  हैं , इन्हें  सुनकर  मैं  धन्य  हो  गया  l " यह  सुनकर  पादरी  बोले  ---"  लेकिन  ये  तो  ईसा  के  वचन  हैं   l "  इस  पर  नान -इन  ने  कहा --- "  तुम  जो  भी  नाम  दो  , पर  मैं  कहता  हूँ  , जहाँ  ज्ञान  और  प्रेम  अपने  शिखर  पर  होते  हैं ,  मानव  चेतना  का  शिखर  होता  है  , वहां  सब  एक  हैं ,  फिर  उनका  स्वरुप  कोई  भी  क्यों  न  हो  l "

19 August 2023

WISDOM -----

     छत्रपति  शिवाजी  अपने  गुरु   समर्थ  गुरु  रामदास    को  आनंद  में  निमग्न  देखा  तो  उनका  मन  हुआ  कि  राज्य , शासन  और  अन्य  परेशान  करने  वाले  दायित्वों  से  छुटकारा  पा  लिया  जाए  l  इसलिए  जब  एक  दिन  समर्थ  गुरु  का  आगमन  हुआ   तो  शिवाजी  ने  उनसे  कहा --- " गुरुदेव  ! मैं  राज्य  के  इन  झंझटों  से  परेशान  हो  गया  हूँ  l  नित्य  प्रति  नई  उलझनें  , इसलिए  मैं  संन्यास  लेने  की  सोच  रहा  हूँ  l "  गुरुदेव  बोले  --- " हाँ , ठीक  है  l संन्यास  ले  लो  , इससे  अच्छा  और  क्या  हो  सकता  है  l  "  शिवाजी  प्रसन्न  हो  गए   और  बोले  --- "  आप  कोई  ऐसा  व्यक्ति  बताइए  , जिसे  मैं  राज्य  सौंप  सकूँ  l "  समर्थ  बोले --- " मुझे  राज्य  दे  दे  और  निश्चिन्त  होकर  वन  में  चला  जा  ! "  शिवाजी  ने  हाथ  में  जल  लेकर   राज्य  दान  का  संकल्प  कर  लिया   और  वन  को  जाने  लगे  l  उन्होंने  दैनिक  दिनचर्या  के  कुछ  सामान  ले  जाना  चाहा   तो  समर्थ  बोले ---- " तुम  राज्य  दान  कर  चुके  हो  ,  तुम्हारा  उस  पर  कोई  अधिकार  नहीं  l  तब  शिवाजी  खाली  हाथ  ही  जाने  लगे   तो  समर्थ  बोले ---- "  दिनचर्या  के  लिए  साधनों  की  आवश्यकता  पड़ेगी  ,  वो  कहाँ  से  लाओगे  ? " शिवाजी  ने  उत्तर  दिया ---- " कहीं  नौकरी  कर  लूँगा  ,  उन्ही  पैसों  से  व्यवस्था  बना  लूँगा  l "  समर्थ  ने  हँसते  हुए  कहा --- "  राज्य  तो  तुम  मुझे  दे  ही  चुके  हो ,  अब  तुम्हे  नौकरी  करनी  है  तो  मेरे  सेवक  बनकर   इस  राज्य  का  सञ्चालन  करो  l  यह  राज -काज  ही  तुम्हारी  नौकरी  है  l "  इसके  उपरांत  छत्रपति  शिवाजी  को  राज्य  करने  में  कभी  कोई  तनाव   अनुभव  नहीं  हुआ  l  सत्य  यही  है  कि  मनुष्य  कार्य  करने  से  नहीं ,  वरन  उसे  बोझ  समझकर   करने  से  तनावग्रस्त  होता  है  ,  कार्य  को  प्रसन्नतापूर्वक  , दायित्व  रूप  में   करने  से  मन  निष्कलुष  और  तनावमुक्त  रहता  है  l  

17 August 2023

WISDOM ----

  तनाव  कहीं  बाहर  से  नहीं  आता  , यह  हमारी  अपनी  ही  कमजोरियों  से  उपजता  है  l  नाम , पद , यश , सम्मान  पाने  की  इच्छा  ही  हमें  तनाव  देती  है  l  यदि  हम  अपने  मन  में   इस  सत्य  को  बैठा  लें   कि  ' देने  वाला  ईश्वर  है  , वह  जो  दे  वह  अच्छा  है  , और  जो  न  दे  उसमें  कहीं  न  कहीं  हमारी  ही  कोई  भलाई  छुपी  है    हमने  अपना  कर्तव्य  किया  , आगे  ईश्वर  की  मर्जी  '     तो  हमें  कभी  कोई  तनाव  नहीं  होगा  l  सुख -चैन  की  नींद  आना  ईश्वर  की  बहुत  बड़ी  देन   है  l  ----एक  बार  गाँधी जी  का  एक  परिचित  धनाढ्य  व्यक्ति  गांधी जी  से  मिलने  पहुंचा  l  उसने  कहा  --- " गांधी जी  !  आप  तो  जानते  हैं  कि  मैंने  लाखों  रूपये  खरच  कर  के  धर्मशाला  का  निर्माण  कराया  था  l  अब  गुटबाजों  ने  मुझे  ही  प्रबंध  समिति  से  हटा  दिया  l  ऐसे  लोग  समिति  में  आ  गए  हैं  , जिनका  धन  की  द्रष्टि  से  योगदान   नगण्य  ही  है  l  इस  संबंध  में  क्या  न्यायालय में  मामला  दर्ज  कराना  उचित  नहीं  होगा  ? "   गांधी जी  ने  कहा --- "  तुमने  धर्मशाला  धर्मार्थ  बनाई  थी   या  उसे  व्यक्तिगत  संपत्ति  बनाए  रखने  के  लोभ  में  ?  असली  धर्म  तो  वह  होता  है  ,  जो  बिना  लाभ  की  इच्छा  के  किया  गया  हो  l  तुम  अभी  तक  नाम  व  प्रसिद्धि  का  लालच  नहीं  त्याग  पाए  हो  , इसलिए  तुम  धर्मशाला  में  प्रबंध  समिति  के  पद  से   हटाए  जाने  से  दुःखी  हो   l  मेरी  बात  मानो   तो  तुम  धर्मशाला   की  प्रबंध  समिति  में  पद   और  नाम  की  प्रसिद्धि   के  मोह  को  त्याग  दो  l  इससे  तुम्हारे  मन  को  शांति  प्राप्त  होगी  l "  यह  सुनकर  उस  व्यक्ति  ने  संकल्प   किया  कि  अब  वह  पद   अथवा  नाम  के  लोभ  में  कभी  नहीं  पड़ेगा   l