5 August 2018

WISDOM ------- हमें अपने जीवन में अच्छे और सकारात्मक विचारों के सहारे आगे बढ़ना चाहिए

  हमारा  जीवन  हमारे  दिमाग  में  चल  रहे  विचारों  का  ही  ठोस  रूप  है  l  जैसे  विचार  होंगे  , वैसी  ही  हमारी  भावनाएं  होंगी,  वैसा  ही  हमारा  व्यक्तित्व  होगा   और  वैसा  ही  हमारा  जीवन  होगा  l 
 हमें  अपने  विचारों  और  कल्पनाओं  में  अच्छी, श्रेष्ठ    व  उजली   भावनाओं  को  देखना  चाहिए  ,  इसी  से  हमें  अपने  जीवन  में  सफल  होने  में  मदद  मिलती  है   l   -----
  जब  रात्रि  में  गाड़ी  में  सफर  किया  जाता तो  उसकी  हेडलाईट    मात्र   सौ - दो सौ   मीटर  दूर  तक  ही   मार्ग  दिखा  पाती  है  ,  लेकिन  वाहन  चालक  की  कल्पना  में   हेडलाईट   से  दीखने  वाली   दूरी   नहीं  होती  बल्कि  उसकी  कल्पना  में  मंजिल  होती  है   l   इस  तरह  वाहन  चालक   पूरी  रात्रि  में   उस  सौ - दो  सौ   मीटर  के  उजाले  के  सहारे   कई  सौ  किलोमीटर  का  सफर  तय  कर  जाता  है  क्योंकि  दिखाई  देने  वाली  रोशनी  गाड़ी  के   आगे  बढ़ने  के  साथ - साथ  बढ़ती  जाती  है  l 
  जिस  तरह  वाहन  चालक  रात्रि  में  रोशनी  को  देखता  है   और  अपने  आस - पास  के  अँधेरे  को   नजरअंदाज  करता  है   l  उसी  तरह  हमें  भी  अपने  विचारों  और  कल्पनाओं  में   उजली  भावनाओं  को  देखना  चाहिए   l  यही  उजाला  हमें  जीवन में  सफल  बनाता  है   l        

3 August 2018

WISDOM ------ बुरे समय में चुप रहना चाहिए

  मानव  मन  के   मर्मज्ञ  कहते  हैं   की  बुरे  समय  में  चुप  रहना  सीखो   ---  दुःख  के  क्षण  में  ,  बुरे  समय  में  वाणी  का  प्रयोग  न्यूनतम  कर  देना  चाहिए  l   बुरे  समय  में  व्यक्ति  इतनी  घुटन  अवं  असहजता   अनुभव  करता   है   कि  उसकी  अभिव्यक्ति  वाणी  के  क्रूर  प्रयोग  के  रूप  में  होने  लगती  है   l 
  बुरे  समय  में  पीड़ित  व्यक्ति  अनर्गल  प्रलाप  करता  है  ,  अपनी  वेदना  का  दोषारोपण    औरों  पर  मढ़ता  है   और  स्वयं  को  निर्दोष  साबित  करता  है   l   तर्कहीन  प्रलाप  से  समस्या  सुलझने  के  बजाय  उलझ  जाती  है   l :;अत:  वाणी  के  प्रयोग  से  बचना  चाहिए   l 

1 August 2018

WISDOM ----------------

 सफलता  जिस  ताले  में  बंद  रहती  है   वह  दो  चाबियों  से  खुलता  है  -- एक  परिश्रम  और  दूसरा  सत्प्रयास  l  कोई  भी  ताला  यदि    बिना  चाबी  के    खोला  गया  तो   आगे  उपयोगी  नहीं  रहेगा   l  इसी  प्रकार  यदि  परिश्रम  और  प्रयास  का  माद्दा  अपने  अन्दर  पैदा   नहीं   किया  गया   तो   कोई  भी  थोपी  सफलता  टिक  न  सकेगी   l  जीवन  में  किये  गए  सत्कार्य  ही   स्वर्ग  की  घंटी  बजाते  हैं  l  दरवाजा  अवश्य  खुलेगा   l   

30 July 2018

WISDOM ----------

   सम्राट  पुष्यमित्र  का  अश्वमेध  सानंद  संपन्न  हुआ   और  दूसरी  रात  अतिथियों  की   विदाई   के  उपलक्ष्य  में   नृत्य - उत्सव  रखा  गया  l  यज्ञ  के  ब्रह्मा  महर्षि  पतंजलि    उस  उत्सव  में  सम्मिलित  हुए  l   महर्षि  के  शिष्य  चैत्र   को   उस  आयोजन  में  महर्षि  की  उपस्थिति  अखरी   l  उस  समय  तो  उसने  कुछ  नहीं  कहा  ,  पर  एक  दिन  जब  महर्षि  योगदर्शन  पढ़ा  रहे  थे  ,  तो  चैत्र  ने  पूछा --- " गुरुवार  !  क्या  नृत्य - गीत  के  रस - रंग   चितवृतियों   के  निरोध  में  सहायक  होते  हैं    l  "
    महर्षि  ने  शिष्य  का  अभिप्राय  समझा   l  उन्होंने  कहा --- सौम्य    !  आत्मा  का  स्वरुप  रसमय  है  l  रस  में  उसे  आनंद  मिलता  है  l  वह  रस  विकृत  न  होने  पाए   और  अपने  शुद्ध  स्वरुप  में  बना  रहे  ,  इसी  सावधानी  का  नाम  संयम  है   l  विकार  की    आशंका   से     रस  का  परित्याग   कर  देना  उचित  नहीं  है  l  क्या  कोई  किसान  पशुओं  द्वारा  खेत  चरे  जाने  के  भय  से   कृषि  करना  छोड़  देता  है   ?  यह  तो  संयम  नहीं  पलायन  है   l   रस रहित  जीवन  बनाकर  किया  गया   संयम  प्रयत्न  ऐसा  ही  है  जैसे   जल  को  तरलता   और  अग्नि  को  ऊष्मा  से  वंचित  करना  l  "

WISDOM ----- रुग्णता ( रोग ) असंयम की प्रतिक्रिया भर है

   हकीम  लुकमान  कहते  हैं --- कि  मनुष्य  समय  से  पहले  मरने  और  गढ़ने   के   लिए   अपनी  कब्र  अपनी  जीभ  से  स्वयं  ही  खोदता  है   l  इसका  तात्पर्य  यह  है  कि चटोरेपन  के  वशीभूत   जिह्वा  अनुपयोगी  पदार्थों  को   अनावश्यक  मात्रा   में  उदरस्थ   करती   है    और  जीवन - मरण  का संकट  उत्पन्न  करती  है  l  
  यदि   असंयम  पर ----- वासना  और  लिप्सा  पर   नियंत्रण  स्थापित  किया  जा  सके   और  सुसंयत  जीवनक्रम  अपनाकर   उस  पर  आरूढ़  रहा  जा  सके   तो  रुग्णता  की  जड़ें    अपने  आप  सूखती  चली  जाएँगी   और  बिना  चिकित्सा  और  उपचार    के  भी  निरोग   बना   जा   सकेगा   l 

28 July 2018

WISDOM ------ व्यक्ति चाहे कितना भी धनी हो , लेकिन ख़ुशी , शांति और प्रेम के लिए उसे अलग से प्रयास करने पड़ेंगे

 धन  कमाना  व्यक्ति  की  नैसर्गिक  आवश्यकताओं  में  से  एक  है  ,  लेकिन  धन  की  सार्थकता  तभी  है  ,  जब  उसका  इस्तेमाल  करने  वाले  के  पास  सद्बुद्धि  और  सदभावनाएँ  हों ,  अन्यथा   यही  पैसा कई  तरह  की  बुराइयों  को   जन्म  देकर  पतन  की  राह  पर  भी  ले  आता  है  l 
   अमेरिका  के  प्रसिद्द  उद्दोगपति  एंड्रयु  कारनेगी  ने   बहुत  धन  कमाने  के  बाद   अपना  सारा  धन  गरीबों  के  लिए  पुस्तकालय  बनाने  में  खर्च  कर  दिया   l  उन्होंने  एक  साक्षात्कार  में  कहा  था  कई  उन्हें  जीवन  में  सबसे  ज्यादा  संतोष  दुनिया  का  सर्वाधिक  अमीर  बनने  में  नहीं  ,  बल्कि  गरीबों  के  लिए   पुस्तकालय  बनाने  से  मिला  l  

27 July 2018

WISDOM ---- क्रोध से बचें

  ' क्रोध  एक  ऐसा  विष  है   जो  मनुष्य  के  चिंतन  और  व्यक्तित्व  को  विषाक्तता  में  बदल  देता  है  l  क्रोध  एक  ऐसे  विकार  के  रूप  में  है  , जो  कई  तरह  की  बीमारियों  को  जन्म  देता  है  l  चिकित्सकों  के  अनुसार  कैंसर , उच्च  रक्त चाप , सिरदर्द   और  मानसिक  रोगों  की   एक  मुख्य  वजह  क्रोध  ही  है  l   यह  एक  ऐसा  मनोविकार  है  जो  बुद्धि , विवेक  और  भावना  सबको  नष्ट  कर  देता  है   l
   क्रोध  का  सबसे  पहला  प्रहार   विवेक  पर  और  दूसरा   प्रहार  होश  पर  होता  है   l  इसलिए  कठिन  कार्यों  ,  संकट  के   समय   व  अपमान  होने  पर  धैर्य  धारण  की  सलाह  दी  जाती  है  l  इसके  अलावा  शारीरिक  और  मानसिक  उर्जा  का   जितना  क्षय  क्रोध  से  होता  है    उतना  किसी  दूसरी  वजह  से  नहीं  होता  l
 यदि  क्रोध  पर  नियंत्रण  पाना  है  तो  हमें  अपनी  समझ  को  इतना  परिपक्व  कर  लेना  चाहिए  की  वह  क्रोध  के  आवेश  में  न  आ  सके   l