सारा यूरोप यूनान की फौजों से संत्रस्त था l अजेय समझी जाने वाली यूनानियों की धाक उन दिनों सब देशों पर छाई हुई थी l यूनानी फौजें जिस पर भी आक्रमण करतीं , वह हिम्मत हार कर बैठ जाता और अपनी पराजय स्वीकार कर लेता l रोम के सेनापति सीजर ने देखा कि इस व्यापक पराजय का कारण लोगों में व्याप्त आत्महीनता ही है , जिसके कारण उन्होंने अपने को दुर्बल और यूनानियों को बलवान स्वीकार कर लिया है l इस मन: स्थिति को बदला जाना चाहिए l सीजर ने अपने देश की दीवारों पर यह वाक्य लिखवाया ----- ' यूनानी फौजें तभी तक अजेय हैं , जब तक हम उनके सामने घुटने टेके बैठे हैं l आओ , तनकर खड़े हो जाएँ l ' इस वाक्य का रोम की जनता पर जादू जैसा असर हुआ l जमकर लड़ाई लड़ी गई और अजेय समझा जाने वाला यूनान परास्त हो गया l
7 February 2021
6 February 2021
WISDOM ------
ऋषियों का कहना है कि ---- अहंकार से अज्ञान उपजता है , इससे व्यक्ति को दिशा भ्रम हो जाता है l दिशा - भ्रम होने पर व्यक्ति न करने योग्य करता है और न सोचने योग्य सोचता है l अहंकार से उपजे अज्ञान के कारण व्यक्ति स्वयं अपने विनाश को निमंत्रण दे डालता है l पुराण में एक कथा है ---- एक राजा था l वह राजा स्वयं और उसकी समस्त प्रजा गायत्री साधना करती थी एवं एकादशी का व्रत करती थी l इसके प्रभाव से उनके राज्य में समस्त प्रजा बहुत प्रसन्न तथा स्वस्थ थी और मृत्यु के बाद कोई भी नरक में नहीं जाता था l इससे यमराज को बड़ी परेशानी थी l संभवत: स्वर्ग में बहुत भीड़ हो जाये , यह भी बहुत चिंता की बात है l उन्होंने अपनी ब्रह्मा जी से कही कि ऐसा कोई उपाय करें जिससे राज्य वासी नरक में आने लगें l ब्रह्मा जी ने पहले तो बहुत मना किया फिर यमराज की चिंता को समझते हुए बोले ---- तुम किसी भी तरीके से उस राजा के अहंकार को जगाओ , शेष सभी कार्य अहंकार से उपजा अज्ञान स्वयं कर लेगा l ' यमराज का प्रयत्न सफल हुआ l --------------- ऋषि कहते हैं ---- अशांति का मूल कारण स्वार्थ और अहंकार है l और इसके समाधान का उपाय है ---- प्रेम , सात्विक प्रेम , सेवा और परोपकार l इससे स्वार्थ और अहंकार गलता है और ईश्वर का सान्निध्य प्राप्त होता है l
5 February 2021
WISDOM ------
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं --- ' लोकसेवियों के पतन का कारण मुख्य रूप से तीन दुष्प्रवृत्तियाँ हैं ---- वासना , तृष्णा और अहंता l वासना और तृष्णा की दौड़ तो व्यक्ति को थकाती है , पर अहंता का मुख तो सुरसा के मुख से भी ज्यादा विशाल है , जो व्यक्ति का सर्वनाश किए बिना चैन से नहीं बैठता l अहंता के भूखे को दुनिया जहान की सारी प्रशंसा , सारा यश , सारा मान - सम्मान , सारा बड़प्पन, सारे अधिकार , सारी सत्ता अपने ही हाथों में देखने का पागलपन सवार हो जाता है l ' आचार्य श्री आगे लिखते हैं ---- " इस संसार के इतिहास में सबसे ज्यादा अपराध इसी अहंता के कारण हुए हैं l रावण से लेकर कंस , दुर्योधन को उनकी अहंता ही ले डूबी l अहंकार ही है जिसके कारण लोग आपस में लड़ते हैं l प्रतिशोध , उत्पीड़न इन सबका कारण अहंता ही है l कथा चाहे रावण की हो या हिरण्यकशिपु की या सिकंदर , तैमूरलंग , चंगेज खां , शिशुपाल की ---- इन सबके अंत का कारण उनके सिर पर सवार अहंता ही रही l यह अहंता ही है जो इन चक्रवर्ती सम्राटों को ले डूबी l आचार्य श्री कहते हैं ---- इस दुष्प्रवृति से सदा व निरंतर सावधान रहने की आवश्यकता है l '
4 February 2021
WISDOM ----
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ---- ' आलोचनाओं का जवाब देने में जो शक्ति और ऊर्जा खरच होती है , उससे कई रचनात्मक कार्य किए जा सकते हैं l जो आलोचनाओं की परवाह किए बिना अपने कार्य पर ध्यान देते हैं , वे ही कुछ अच्छा कर पाते हैं l इसलिए आलोचना तो सुननी चाहिए l यदि वास्तव में आलोचना के अनुसार हमारे अंदर कमियां हैं , तो उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए , न कि आलोचना करने वाले की निंदा करनी चाहिए l '
WISDOM -----
इसे मनुष्य की दुर्बुद्धि ही कहेंगे कि वे अपनी कमियों की ओर नहीं देखते , अपनी गलतियों को सुधार कर अपनी जड़ों को मजबूत नहीं करते बल्कि अपनी सारी ऊर्जा दूसरों की कमियाँ निकालने तथा दूसरों की जड़ें हिलाने में गँवा देते है l इसका परिणाम बड़ा दुःखदायी होता है l महाभारत का यह प्रसंग इसी सत्य को बताता है ------ महाभारत का एक पात्र है --- ' शकुनि ' , जो बहुत ही धूर्त , कुटिल और षड्यंत्र करने में माहिर था l शकुनि गांधार नरेश था , लेकिन वह हमेशा अपनी बहन गांधारी के पास हस्तिनापुर में ही रहा l शकुनि जैसा व्यक्ति अपनी बहन गांधारी जो महान पतिव्रता थी , गुरु द्रोण , भीष्म पितामह जैसी महान विभूतियों के बीच रहने पर भी अपनी कुटिलता को नहीं छोड़ सका l सारा जीवन वह दुर्योधन के मन में विषबीज बोता रहा l अपने भानजे दुर्योधन को युवराज बनाने के लिए उसने पांडवों को रास्ते से हटाने के _लिए अनेकों षड्यंत्र रचे l भीम को खीर में जहर पिलाया , पांडवों को अग्नि में भस्म करने हेतु लाक्षागृह का षड्यंत्र रचा , फिर पांडवों को जुए के लिए चुनौती देकर उनको बहुत अपमानित किया l इन सब षड्यंत्रों का परिणाम हुआ --- महाभारत l शकुनि खुद तो डूबा , अपने साथ पूरे कौरव वंश को ले डूबा l महाभारत में शकुनि तो मारा गया , उसके षड्यंत्रों में उसके भागीदार होने के कारण कौरव वंश का ही अंत हो गया l कोई आँसू पोछने वाला भी नहीं बचा l
3 February 2021
WISDOM ------ एक छोटी सी चूक का कितना बड़ा परिणाम
हम सब इनसान हैं और हम सब से गलतियाँ होती है l कभी - कभी विवेकहीनता के कारण एक छोटी सी गलती बहुत बड़े दंगे में बदल जाती है l इसे ही समझाने के लिए पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी एक कहानी कहते हैं ----- कलिंग देश का राजा नाश्ते में दही और शहद खा रहा था l अधिकारियों से आवश्यक बातें भी कर रहा था कि थोड़ा सा शहद जमीन पर गिर गया l राजा तो दरबार में चला गया l शहद गिरने से जमीन पर बहुत मक्खियाँ आ गईं l उन मक्खियों को खाने के लिए बहुत सी छिपकली आ गईं l अब उन छिपकलियों को खाने के लिए बिल्ली आ गई l यह सब देख कहीं से एक कुत्ता आ गया , उसने बिल्ली को पकड़ लिया l नए कुत्ते को अपने क्षेत्र में आया देख मोहल्ले के चार - पांच कुत्ते उससे लड़ने आ गए l बिल्ली तो भाग गई , वे कुत्ते आपस में बहुत देर तक लड़ते रहे , एक - दूसरे को घायल कर दिया l इस बीच उन कुत्तों के मालिक आ गए l अपने कुत्ते को घायल देख वे आपस में बहस करने लगे , बात बढ़ गई , उनमे आपस में मारपीट हो गई l वे ब्राह्मण और ठाकुर थे l ब्राह्मणों को पता चला कि ठाकुर ने ब्राह्मण को पीट दिया , यह अपमान वे सह न सके l पूरे शहर के ब्राह्मण और ठाकुर इकट्ठे हो गए और दंगा हो गया l शहर में ऐसा बलवा देख वहां के चोर - डाकुओं को मौका मिल गया , उन्होंने राजा का खजाना लूट लिया l यह सब देख राजा बहुत दुखी हुआ , उसने कमेटी बिठाई l दंगा क्यों हुआ , इसकी तह में जाने के लिए योग्य अधिकारियों को नियुक्त किया l कमेटी ने रिपोर्ट दी तब पता लगा कि राजा की लापरवाही से शहद गिर गया , उसी की वजह से यह सब दंगा हुआ l ' इसलिए आचार्य श्री कहते हैं कि यह सारा ढांचा हमारी विवेकशीलता पर टिका हुआ है l
WISDOM ------
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ---- ' यदि संगठित रूप से अत्याचार , अन्याय का प्रतिरोध किया जाए तो शक्तिशाली बर्बरता को भी परास्त किया जा सकता है l एक कहानी है ----- एक पेड़ पर चिड़िया का घोंसला था l उसी पेड़ के नीचे चींटी का बिल भी था l चींटी और चिड़िया में गहरी दोस्ती थी l उस घोंसले में चिड़िया के छोटे - छोटे बच्चे थे l जब चिड़िया उन बच्चों के लिए दाना लेने जाती तब चींटी वहीँ पेड़ के आसपास रहकर उसके बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखती l एक दिन चिड़िया दाना लेने गई हुई थी , तभी वहां से एक मदमस्त हाथी निकला l चींटी ने दौड़कर उस हाथी को सचेत किया कि तुम इस पेड़ से दूर होकर निकलो , इसमें चिड़िया के घोंसले में छोटे बच्चे हैं l लेकिन हाथी को तो अपनी शक्ति का अहंकार था , उसने चींटी की उपेक्षा कर दी और अपनी सूँड से पेड़ को जोर से हिला दिया , उसकी कुछ डालें भी तोड़ दीं l चिड़ियाँ का घोंसला टूट गया , उसके बच्चे भी गिरकर - दबकर मर गए l चींटी बहुत उदास हो गई , जब चिड़िया आई तो सब कुछ बिखरा हुआ देखकर दोनों खूब फूट -फूटकर रोईं l फिर दोनों ने परस्पर धैर्य बँधाया और कहा कि ऐसे रोने से काम नहीं चलेगा l आज हाथी ने अपने अहंकार में हमारा घोंसला तोड़ा है , कल किसी और का तोड़ेगा l दोनों ने मिलकर उस हाथी को ढूँढ़ लिया , जब हाथी सैर को निकला तो चिड़िया उसके चारों और चीं - चीं कर उड़ने लगी l हाथी समझ गया , बोला --- तू छोटी चिड़िया मेरा क्या बिगाड़ेगी , तुझे तो मैं एक ही बार में कुचल दूंगा l हाथी अपने अहंकार में था , मौका पाकर चींटी उसकी सूँड में घुस गई l अब तो हाथी चिंघाड़ने लगा ,------ छोटी सी चींटी ने हाथी को परास्त कर दिया l वह समझ गया कि ईश्वर ने यदि हमें कोई शक्ति दी है तो हमें कमजोर की रक्षा करनी चाहिए , उस पर अत्याचार नहीं करना चाहिए l