22 April 2022

WISDOM -----

  लघु  कथा -----  ' संसार  अपनी  गति  से  चलता  है   लेकिन  अच्छे -अच्छों  को  यह  भ्रम  हो  जाता  है  कि   उनके  बिना  काम  नहीं  चल  सकता   l ' ----- मुर्गा  बांग  देता  है  और  सूरज  उगता  है  l   एक  व्यक्ति  को  यह  विश्वास  हो  गया  कि  सूरज  उगता  ही  उसके  मुर्गे  की   बांग   से  है  l   एक  दिन  उस  आदमी  का  झगड़ा   गाँव  वालों  से  हो  गया  l  उसने  कहा  ---- ' याद  रखना   यदि  मैं  अपने  मुर्गे  को  लेकर   गाँव  से  चला  जाऊंगा  ,  तो  सूरज   नहीं  उगेगा  तुम्हारे  गाँव  में   l  फिर  बैठे  रहना  अँधेरे  में  l   वह  मुर्गा  लेकर   दूसरे   गाँव  चला  गया  l    दूसरे   दिन  तड़के  मुर्गे  ने  बांग  दी   और  सूरज  निकला   इस  गाँव  में   l   उस  आदमी  ने  कहा  ---- अब  पीटते  होंगे  सिर   उस  गाँव  के  लोग  l   मुझसे  बिगाड़  कर   व्यर्थ  ही  अंधकार   की  मुसीबत  मोल  ले  ली   l '  उसे  भ्रम  था   कि   जहाँ  उसका  मुर्गा  बांग  देता  है   सूरज  वहीँ  निकलता  है   l          

2 .   बादल  गरज  रहे  थे  l    उन्हें  गरजते  बहुत  देर  हो  गई  पर  उससे  कुछ  खास  बात  नहीं  हुई   l   पर  जब  एक  बार  बिजली    कड़की    और  गिरी    तो  कई  पेड़  जलकर  खाक  हो  गए   l  एक  व्यक्ति  बादलों  की  गरज  को  बहुत  महत्त्व  दिया  करता  था   और  उन्ही  में  शक्ति  भरी  मानता  था   l  पर  जब  उसने  इस  बार  का  घटनाक्रम  देखा  तो  अपना  विचार  बदल  दिया  l  समझ  गया  कि  गरजने  वाले  चमत्कार  नहीं  दिखाते  हैं  ,  सामर्थ्य  तो  चमकने  वाली  शक्ति  में  होती  है  l  इसके  बाद  उसने  अपनी  आदत  सुधारी  ,  गरजना  बंद  कर  दिया  और  चमकने  वाली  पद्धति  अपनाई   l 

21 April 2022

WISDOM ------ --- प्रेरक लघु कथा ----

  एक  राजा  के  राज्य  में  एक  नदी  बहती  थी   l   जो  आगे  चलकर    दूसरे   राजा     के  राज्य  में  जाती  थी   l    पहले  राजा  ने   कई  जगह  बाँध  बनवा  रखे  थे  ताकि  पानी  खेतों  में  पहुँचता  रहे   l   फिर  भी  अगले  राजा  के  राज्य  में   भी  नदी  का  पानी   पहुँचता  ही  था   l  पहला  राजा  बड़ा  ईर्ष्यालु  था  l    उसने  हुकुम  दिया  कि   अपनी  नदी  का  एक  बूंद  पानी  भी   पडोसी  राज्य  में  न  जाने  पाए   ,  इसके  लिए  ऊँचे - ऊँचे  बाँध  बना  दिए  जाएँ   l   इससे  दूसरे  राजा  के  राज्य  में  सूखे  की  स्थिति  बन  गई   और  पहले  राजा  राजा  के  राज्य  में   रुका  हुआ  पानी  इतना  अधिक  जमा  हो  गया   जिससे  सारी   जमीन  ही  डूब  गई   ,  मकान  भी  बैठ  गए   l    जो  दूसरों  का  बुरा  चाहता  है  उसका   पहले  अपना  बुरा  होता  है  l                                                                   2 .          एक   बूढा  आदमी  पेड़  के  समीप  आकर  खड़ा  हुआ  l  बोला ---- " अरे ,  फल  नहीं  सो  नहीं   ,  फूल    भी  नहीं  और  पत्ते  भी  नहीं    l   बसंत  में  तुम्हारी  बहार  देखते  ही  बनती  थी   l  पेड़  ने  लम्बी  आह  भरी  और  बोला  ----" काश  !  तुमने  अपना  झुर्री  भरा  चेहरा  देख  लिया  होता   l बसंत  ऋतू  तो  सदा  आती  जाती  रहेगी    पर  बूढी  पीढ़ी    और  प्रथा  - परंपरा  को   अपना  दायित्व  पूरा  करते    हुए  नयों  के  लिए  भी   स्थान  खाली  करना    होता     है  अन्यथा  यह  स्रष्टि  ही  बूढी  होकर   समाप्त  हो  जाएगी   l  "  बात  वृद्ध  की    सभी  को   समझ  में  आ  गई  l   

20 April 2022

WISDOM -------

   व्यक्तित्व  का  उत्थान -पतन  किस  प्रकार  सुख -दुःख  का  कारण  बनता  है  ,  इस  पर  गुरुकुल  में  विचार विमर्श  चल  रहा  था  l    पूर्णिमा  पर   चंद्रमा  के  शीतल  प्रकाश  को  देखकर   महर्षि  गार्ग्य   से  उनके  एक  शिष्य  ने  पूछा ---- ' पंद्रह  दिन  चंद्रमा  की  आभा  बढ़ती  रहती  है  ,  पंद्रह  दिन  घटती  रहती  है   l  इसका  रहस्य  क्या  है   ? "  महर्षि  गार्ग्य   ने  समझाया  ----- " तात  ! विधाता  ने  चंद्रमा  का  यह  क्रम  ,  यह  बताने  के  लिए   अपनाया  है   कि  व्यक्तित्व  के  विकास  से  लोग   न  केवल  स्वयं  प्रकाशित  होते  हैं  ,  वरन  संसार  को  भी  प्रकाशित  करते  हैं  ,  जबकि  पतन  की  और   उन्मुख   होने  वाले   क्षीण  होते  हैं   और  अज्ञान  के  अंधकार  में  गिरकर  नष्ट  हो  जाते  हैं   l   "           लोभ ,  लालच , तृष्णा   के  कारण     व्यक्ति   स्वयं  ही  पतन  के  गर्त  में  गिरता  जाता  है   ,  इस  सत्य  को  समझाने  वाली  एक  कथा  है  ------- '  एक  बार  भगवान  श्रीराम  के  दरबार  में  एक  कुत्ता  न्याय  मांगने  आया  ,  उसने  मानव  बोली  में  कहा ---- ' प्रभो  !  एक  ब्राह्मण  ने  मेरे  सर  पर  प्रहार  किया   है ,  उसे  दंड  दीजिये  l  '   ब्राह्मण  को  बुलवाया  गया  , वह  बोला ---- "  हे  भगवन  !  मैं  भूखा  था  ,  भोजन  हेतु  बैठता  इसके  पूर्व  ही  यह  कुत्ता   मेरे  सामने  आकर  बैठ  गया   l   मेरे  कहने  पर  भी  न  हटा    तब  क्रोध  में  आकर  मैंने  इसे  मारा  l  "  भगवान  राम  ने  सभी  सभासदों  से  पूछा   कि  इस  ब्राह्मण  को  क्या  दंड  दिया  जाए   l   कोई  कुछ  बोलता  उसके  पहले  कुत्ता  बोला ----- " " भगवान  !  आप  इसे  कलिंजर  का  मठाधीश  बना  दें  l  "  सुनकर  सभी  को  बहुत  आश्चर्य  हुआ   l     भगवान  तो  समझ  गए  पर  संसार  को  शिक्षण  देने  के  लिए   उन्होंने  सबके  समक्ष  कुत्ते  से  ही  इसका  कारण  पूछा    कि  इसे  भिक्षावृति   से  मुक्ति  दिलाकर    मठाधीश  क्यों  बनाना  चाहता  है  ? "  कुत्ता  बोला ---- "भगवन  ! मैं  भी  पिछले  जनम  में  कलिंजर  का  मठाधीश  था  l  मैं  पूजा -पाठ  करता  , लेकिन  चढ़ावे  की  सामग्री  मैं  व  मेरा  परिवार  खाता  l   इस  कारन  मुझे  कुत्ते  की  योनि  मिली  l  जो  व्यक्ति  देव , बालक ,  स्त्री  तथा  भिक्षुक  के  लिए   अर्पित  धन  और  खाद्य  सामग्री  का   संकीर्ण  स्वार्थ  के  साथ  उपभोग  करता  है   वह  नरकगामी  होता  है  l   क्रोधी  और  हिंसक  स्वभाव वाले  इस  ब्राह्मण  के  लिए    यही  सही  दंड  होगा   l   "   हँसकर  भगवान  श्रीराम  ने  उसे  वही  दंड  दिया   l    आचार्य श्री  लिखते  हैं --- 'आज  के  तथाकथित  मठाधीशों  की   अगले  जन्म  में  क्या  स्थिति  होने  वाली  है  ,  उसका  संकेत  यह  कथा  देती  है  l 

19 April 2022

WISDOM

 पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं  ---- 'पथ  तय  करता  है  कि  जीवन  की  मंजिल  कहाँ  है  l  नीति  की  राह   पर  चलें  और  उत्सव  मनाएं   l  ' आचार्य श्री  लिखते  हैं ----- 'अनीति  एवं  गलत  राह  से  कभी  भी  श्रेष्ठ  मंजिल  की  प्राप्ति  संभव  नहीं  है  l  गलत  राह  पर  चलकर  पाई  गई  यह  चाँद  दिनों  की  चकाचौंध   दूसरों  पर  अपना  प्रभाव  कितना  ही  क्यों  न  डाले  ,  परन्तु  अंतर्मन  खोखला  ही  रहता  है  , कभी  भी   तृप्ति  का  एहसास  नहीं  कर  पाता   है  l  '     कौरवों  के  पास  जो   ऐश्वर्य  और  वैभव  था  वह  पांडवों  के  अधिकारों  को  कुचलकर   प्राप्त  था  , इसलिए  उसका  अंत  भी  उससे  कई  गुना  दर्दनाक  था   l   धृतराष्ट्र  के  सौ  पुत्रों  में  से  एक  भी  जीवित  नहीं  बचा   l    जिनकी  नियत   में  खोट  होता  है   उनका  अंत  कभी  भी  भला  नहीं  हो  सकता  l  भगवान  ने  इंद्र  को  सिंहासन  देने  हेतु  वामन  रूप  धरकर    बलि  को  छला  l  अपने  छल  के  परिणाम  में  उन्हें  बलि  के  दरबार  में  द्वारपाल   होना  पड़ा   l    भगवान  राम  ने  सुग्रीव  को  बचाने  के  लिए   बाली  को  छुपकर  मारा  था  ,  अगले  जन्म  में   कृष्णावतार  के  समय  बाली  का  पुनर्जन्म  व्याध  जरा  के  रूप  में  हुआ   और  उसके  द्वारा   किए  गए  शर संधान   से  भगवान  कृष्ण  को  देह  त्यागनी  पड़ी   l   इनसान  हो  या  अवतार  , सभी  को  परिणामों  का  सामना  तो  करना  ही  पड़ता  है   l   

17 April 2022

WISDOM ------

                                                                                                                                                                             पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- " हमारे  जीवन  में  जो  कुछ  भी  है  ---- भौतिक  संपदा , आध्यात्मिक  संपदा , रिश्ते - नाते ,  हमारा  अपना  भौगोलिक  परिवेश ,  ये  सब  हमारे   ही  कर्मों  की  अभिव्यक्ति  है  l  दुनिया  में  हम  जिसे  भी  देखते  हैं   अर्थात   संतान , गुरु -शिष्य , संबंधी   जो  कोई  भी  हैं  , वे  सब  हमारे  ही  कर्मों  का  परिणाम  हैं  l   इस  विश्व  ब्रह्माण्ड  में   हम  जहाँ  कहीं  भी  हों   हमारे  कर्म  हमारा  पीछा  करते  हुए   हम  तक  पहुँच  ही  जाते  हैं  और  तब  तक  समाप्त  नहीं  होते  ,  जब  तक  हम  उन्हें  भोग  नहीं  लेते   l   कर्मफल  का  विधान    सबके  लिए  एक  समान  है   l "      कर्म   करना  मनुष्य  के  वश  में  है  लेकिन  उसका  फल  कब  मिलेगा  यह  काल  निश्चित  करता  है   l ------ भीष्म  पितामह  शरशैया  पर  लेते  हुए  थे  l  भगवान  कृष्ण  युधिष्ठिर  को  लेकर  पितामह  भीष्म  के  पास  गए   और  बोले ---- " युद्ध  के  कारण  धर्मराज  युधिष्ठिर   बहुत  शोकग्रस्त  हैं  , आप  इन्हे  धर्म  का  उपदेश  देकर   इनके  शोक  का  निवारण  करें  l  "  तब  भीष्म  पितामह  ने  कहा ---- " आप  कहते  हैं  तो  मैं  उपदेश  दूंगा  ,  किन्तु  हे  केशव  ! पहले  मेरी  शंका  का  समाधान  करो   l  मैं  जानता   हूँ  कि   शुभ - अशुभ  कर्मों  का  फल   अवश्य  मिलता  है   l   इस  जन्म  में  तो  मैंने   कोई  ऐसा  कर्म  नहीं  किया   और   पिछले   72   जन्मों  में  भी  ऐसा  कोई  क्रूर  कर्म  नहीं  किया  ,  जिसके  फलस्वरूप   मुझे  बाणों  की  शैया  पर  शयन  करना  पड़े  l   "  उत्तर  में  भगवान  श्रीकृष्ण  ने  कहा  ---- " यदि  आप   एक  और  जन्म  देख  लेते  तो  आपकी  जिज्ञासा  शांत  हो  जाती   l  पिछले  73  वे  जन्म  में   आपने  पत्ते  पर  बैठे   हरे  रंग  के  टिड्डे  को  पकड़  कर   उसको  बबूल   के  कांटे  चुभोये  थे  ,  आज  आपको  वही  कांटे  बाण  के  रूप  में  मिले  हैं   l 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                        

16 April 2022

WISDOM --------

   एक  बार  माता  सीता  ने   हनुमान जी  से  प्रसन्न  होकर   उन्हें  हीरों  का  एक  हार  दिया  l   कुछ  समय  पश्चात्  सीताजी  ने  देखा   कि  हनुमान जी  ने  प्रत्येक  हीरे   को  माला  से  अलग  कर  दिया   और  उन्हें  चबा - चबाकर   जमीन   पर  फेंकते  जा  रहे  हैं  l   यह  देख  माता  सीता  को  बहुत  क्रोध  आ  गया   उन्होंने  कहा ---- ' इतना  बेशकीमती  हार  तुमने  नोच - खसोटकर  नष्ट  कर  दिया   l   यह  सुन  हनुमान जी  बोले --- " माते  !  मैं  तो  केवल  इन  रत्नों  को   खोलकर  यह  देखना  चाहता  था  कि   इनमे  मेरे  आराध्य  प्रभु  राम   और  माँ  सीता   बसते   हैं  अथवा  नहीं  l   आप  दोनों  के  बिना   इन  पत्थरों  का  मेरे  लिए  क्या  मोल  है  l  "  हनुमानजी  के  भक्तिपूर्ण  वचनों  को  सुनकर  सीताजी  का  हृदय  द्रवित  हो  गया   और  उन्होंने  अपना  वरदहस्त  उनके  मस्तक  पर  रख  दिया   l 

WISDOM------

   श्री रामचरितमानस  में  गोस्वामी जी  कहते  है  ---- ' मैं  सच्चे  भाव  से  दुष्टों  को  प्रणाम  करता  हूँ  , जो  बिना  ही  प्रयोजन  , अपना  हित   करने  वाले  के  भी  प्रतिकूल  आचरण  करते  हैं  , जिनको  दूसरों  के  उजड़ने  में  हर्ष   और  बसने  में  विषाद   होता  है  l  गोस्वामी जी  कहते  हैं  संत  व्यक्ति  कमल  के  समान   होते  हैं  जिनका  दर्शन  और  स्पर्श  सुख  देता  है  लेकिन  असंत  व्यक्ति  जोंक  की  तरह  होते  हैं  , जोंक  शरीर  का  स्पर्श  पाते  ही  रक्त  चूसने  लगती  है   l  '   आचार्य श्री  लिखते  हैं  --- 'इस  संसार  में   जो  वेषधारी  ठग  हैं , उन्हें  भी  साधु - संत  का  वेश  बनाए   देखकर  संसार  पूजता  है  ,  लेकिन  अंत  तक  उनका  कपट  नहीं  चलता  l  उदाहरण  के  लिए   कालनेमि  ने  ऋषि  का  वेश  बनाया   और  हनुमानजी  के  साथ  छल  किया ,  रावण  ने  साधु  का  वेश  बनाया  और  सीताजी  के  साथ  छल  किया   और  राहु  ने  देवता  का  रूप  बनाया  और  देवताओं  के  साथ  छल  किया  ,  लेकिन  इन  तीनों  को   इस  छल  का  भयंकर  दंड  भुगतना  पड़ा   l  '         कलियुग   में  लोगों  में  दुर्बुद्धि  है   कि   वे   लोगों  के  बाहरी  रूप , वेश -भूषा  को  देखकर  उसे  सम्मान  देते  हैं  ,  उसके  पीछे  जो  उनकी  असलियत  है  उसे   समझ  नहीं  पाते  l   सत्कर्म  करने  से , सन्मार्ग  पर  चलने  से  विवेक  जाग्रत  होता  है  l   विवेक  दृष्टि  जाग्रत  होने  पर  ही  हम  वो  समझ  सकते  हैं   जो  सामान्य  आँखों  से  नहीं  दिखाई  देता  l   रामचरितमानस   से  हमें  यही  शिक्षा  मिलती  है  कि   हम  गुणों  की ,  मन  और  विचारों  की  पवित्रता  का  सम्मान  करें  ,  जामवंत  जी  रीछ  शरीर धारी   होने  पर  भी  सम्मान  के  पात्र  हैं  ,  श्री हनुमानजी  वानर  रूप  में  भी  सारे  संसार  में  पूजित  हैं  l