1 . शिष्य ने पूछा --- " काँसा आवाज करता है , सोना क्यों नहीं ? " गुरु ने उत्तर दिया --- " आडंबर की आवश्यकता निस्सार वस्तुओं को ही पड़ती है l जिनके पास स्व -अर्जित ज्ञान होता है , उन्हें व्यर्थ हल्ला करने की आवश्यकता नहीं होती l "
1 July 2023
WISDOM ----
लघु कथा ----गिरगिट , कछुए और गिलहरी में वार्तालाप चल रहा था l अपनी शेखी बघारते हुए गिरगिट बोला ---- "देखो ! मैं कितना चतुर हूँ , जब चाहे अपना रंग बदल लेता हूँ और मेरी असलियत कोई नहीं जान पाता l " कछुआ कहाँ पीछे रहने वाला था , वो कहने लगा ---- " " अरे मित्रों ! मेरी जैसी विशेषता तो किसी में भी नहीं है l बाहर नगाड़े पिटते रहें , पर एक बार मैं अपने खोल में समा जाता हूँ तो मैं अलग और जमाना अलग l " गिलहरी बोली ---- " भाइयों ! मैं तुम दोनों की तरह स्वार्थी और अवसरवादी तो नहीं कि अपने को दुनिया से अलग मानने और मौका देखकर रंग बदलने को कोई गुण मानूँ l मुझे इतना पता है कि ऊँचे उदेश्य के लिए कार्य करने वाली मेरी ही जैसी गिलहरी की पीठ पर भगवान के हाथ पड़े थे l मेरी पीठ पर जो तीन रेखाएं तुम देख रहे हो , वह उन्हीं सत्कार्यों के लिए ईश्वर का वरदान है , जो पीढ़ी -दर -पीढ़ी हमारे साथ चला आ रहा है l " गिरगिट और कछुए के सिर यह सुनकर शरम से झुक गए l
30 June 2023
WISDOM ----
लघु कथा ---- एक राजा ने अपने राज्य में एक नए पुरस्कार की घोषणा की l मंत्रियों से सलाह करने पर उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य के किसी वृद्ध व्यक्ति को यह सम्मान दिया जाये l महामंत्री इस बात से सहमत नहीं थे , उनका कहना था कि लंबी उम्र की प्रशंसा करने से कोई उदेश्य पूर्ण नहीं होता , यदि सम्मान प्रदान करना है तो उसको दिया जाए , जिसने अपने जीवन में सत्कर्म किए हों , स्वयं सन्मार्ग पर चला हो और अपने आचरण से लोगों को शिक्षा दी हो l " पर राजा ने महामंत्री की बात नहीं मानी और अपने चाटुकारों की बात मानकर एक व्यक्ति को यह पुरस्कार देने की घोषणा की l वह व्यक्ति पूर्व में दुर्दांत अपराधी था और जेल की सजा भी काट चुका था l जब वह राजदरबार में पुरस्कार लेने आया तो महामंत्री ने उसके निकट फूलों को चढ़ाकर उन फूलों को प्रणाम किया l राजा को महामंत्री का यह व्यवहार विचित्र लगा , उन्होंने इसका कारण पूछा तो महामंत्री ने कहा --- " राजन ! प्रणाम मैंने उन पुष्पों को किया है , जो अल्प आयु में ही अपनी सुगंध सब ओर फैला जाते हैं l यदि आपने किसी ऐसे व्यक्ति को पुरस्कार दिया होता जिसने अपना जीवन सार्थक किया होता तो पुरस्कार की और आपकी गरिमा रह जाती l " राजा को अपनी गलती का भान हुआ l
29 June 2023
WISDOM -----
1 . संत रैदास की एक बार इच्छा हुई कि वे चित्तौड़ की रानी झाली के यहाँ जाएँ , जिसने काशीवास में आमंत्रण दिया था l संत के आने पर भंडारा हुआ l सभी विद्वानों को आमंत्रित किया गया l एक अछूत चमड़ा गांठने वाले का इतना सम्मान देखकर ब्राह्मणों ने यह निर्णय लिया कि आवश्यक खाद्य सामग्री लेकर वे स्वयं भोजन बनाएंगे l जब वे अलग से भोजन करने बैठे तो देखा कि हर ब्राह्मण पंडित की बगल में , एक रैदास बैठें हैं l यह देख सभी रैदास के चरणों में गिर पड़े और क्षमा मांगी l ईश्वर की नजर में कोई बड़ा , छोटा , ऊँच -नीच नहीं है l जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव तो मनुष्य ने अपने स्वार्थ और अहंकार की पूर्ति के लिए किया है l
2 . रामकृष्ण परमहंस परस्पर चर्चा में शिष्यों को बता रहे थे --- मनुष्यों में कुछ देवता होते हैं , शेष तो नर पिशाच ही होते हैं l नरेंद्र ने पूछा --- भला इन नर पिशाचों , मनुष्यों और देवताओं की पहचान क्या है ? ' परमहंस जी ने कहा ----वे मनुष्य देवता हैं जो दूसरों को लाभ पहुँचाने के लिए स्वयं हानि उठाने के लिए तैयार रहते हैं l मनुष्य वे हैं जो अपना भी भला करते हैं और दूसरों का भी l नर पिशाच वे हैं जो दूसरों की हानि ही सोचते और करते हैं , भले ही इस प्रयास में उन्हें स्वयं भी हानि उठानी पड़े l "
28 June 2023
WISDOM -----
लघु कथा ---- एक गृहस्थ को सर्वोत्तम सौन्दर्य की खोज थी l सो वो एक तपस्वी के पास पहुंचे और अपनी जिज्ञासा प्रकट की l तपस्वी ने कहा --- श्रद्धा है तो पत्थर में भी भगवान हैं , मिटटी के ढेले से गणेश जी बन जाते हैं l एक भक्त से पूछा , तो उसने कहा --- प्रेम ही सुन्दर है साँवले कृष्ण गोपियों के प्राणप्रिय थे l उसका समाधान नहीं हुआ l वह आगे बढ़ा तो उसे एक सैनिक मिला , जो युद्ध भूमि से लौट रहा था l गृहस्थ ने उससे पूछा ---सच्चा सौन्दर्य कहाँ है ? " सैनिक का उत्तर था ----- ' शांति में l ' जितने मुँह उतनी बातें l निराश वह अपने घर लौटा l दो दिन से उसकी प्रतीक्षा में सभी व्याकुल थे l उसे देखकर दोनों छोटे बच्चे उछल -उछलकर अपनी ख़ुशी प्रकट कर उससे लिपट गए l माँ की आँखें इंतजार में रो -रोकर सूज गईं थीं , उन्होंने उसे ह्रदय से लगा लिया l पत्नी के मुरझाये चेहरे पर ख़ुशी लौट आई l गृहस्थ की सर्वोत्तम सौन्दर्य की खोज पूरी हुई l वह कहने लगा --- मैं कहाँ भटक रहा था l श्रद्धा , प्रेम और शांति --इन तीनों के दर्शन तो घर में ही हो रहे हैं l यही सबसे श्रेष्ठ और सर्वोत्तम सौन्दर्य है l
2 . लघु कथा --- एक देव मंदिर का पुजारी भगवान की पूजा तो पूरे विधि -विधान से करता था , किन्तु सुबह -शाम पूजा करने के बाद बचे हुए समय में वह स्वार्थ के वशीभूत होकर ऐसे कर्म करता जिससे अन्य प्राणी कष्ट पाते l और इतना कर्मकांड करने के बाद भी उसके जीवन में सुख -शांति नहीं थी l बहुत दुःखी होकर एक दिन उसने भगवान की प्रार्थना की --- 'हे प्रभु ! बताइए , इतनी पूजा -पाठ करने के बाद भी क्यों जीवन में दुःख है , अशांति है ? ' उसके ह्रदय में बैठे भगवान बोले , अंत:करण से आवाज आई ---' मूर्ख !मेरी पूजा करने के बाद भी यदि सेवा की इच्छा न हो तो ऐसी पूजा व्यर्थ है l क्या मैं इन पत्थर की मूर्तियों में ही हूँ , इन जीते -जागते प्राणियों में तुझे मेरा रूप नहीं दीखता l मेरी पूजा के बाद भी सत्कर्म करने की , सन्मार्ग पर चलने की और श्रेष्ठ विचारों को मन में रमने की प्रवृत्ति नहीं जागती तो ऐसी पूजा व्यर्थ है l ' अब पुजारी को पूजा का सही अर्थ समझ में आया और उसने पूजा के साथ लोकसेवा को अपने नित्य कर्म में सम्मिलित किया l
27 June 2023
WISDOM -----
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ---- 'प्रशंसा के अनेक भेद हैं l प्रशंसा को अपना स्वार्थ साधने के लिए , अपना काम निकालने के लिए , देश-काल-परिस्थिति का ज्ञान किए बगैर करने को चाटुकारिता कहा जाता है l जो इनसान चाटुकारिता प्रिय होता है , उसमे विवेक का घोर अभाव होता है और वह बिना विचारे अपनी प्रशंसा करने वालों पर मेहरबान हो जाता है l ' राजतन्त्र में राजा को खुश करने के लिए विशेष रूप से चाटुकारों की व्यवस्था की जाती थी l उनका काम ही था कि वे राजाओं के विभिन्न कार्यों , गुणों आदि की प्रशंसा करें l वे लोग बड़े विशेषज्ञ होते थे और वही बोलते थे , जो राजा को पसंद हो फिर चाहे वह सत्य हो या झूठ हो l वर्तमान समय में चाटुकारिता का दायरा बहुत व्यापक हो गया है l अब केवल मुँह से बोलकर ही चापलूसी नहीं होती l कहीं अपार धन दे कर , चुनाव जिताने में योगदान देकर , अपने नेता की वाहवाही करने वालों की संख्या बढ़ाकर आदि अनेक तरीकों से चापलूसी की जाती है l अपने अधिकारी को खुश करने के लिए लोग उनकी पत्नी और बच्चों तक की खुशामद करते हैं l कहीं तो हाल ऐसा भी है कि सुबह जागने से रात को सुलाने तक चापलूस पीछा नहीं छोड़ते l इस कारण चाहे छोटा अधिकारी हो या बड़ा नेता , उनकी स्वयं की बुद्धि काम करना बंद कर देती है , पूरी व्यवस्था चाटुकारों के इशारे पर चलती है l वर्तमान युग में जब सम्पूर्ण विश्व एक मंच पर है , चाटुकारिता का एक नया रूप संसार में है जो मानव सभ्यता के लिए खतरे की घंटी है l स्वयं को चापलूस कहलाने से कद कुछ कम हो जाता है , इसलिए जिनके पास अपार धन -वैभव है , वे उस धन का दान -पुण्य भी करते हैं लेकिन इसमें उनका नि :स्वार्थ भाव नहीं होता , वे अपने धन के बल पर बड़े -बड़े नेताओं , अधिकारियों , संस्थाओं को भी अपने नियंत्रण में कर लेते हैं l मानव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित नीति निर्धारण में भी उनका दखल हो जाता है l फिर वे ही नीतियाँ लागू होती हैं जिसमे उनका हित हो , उनकी संपदा बढ़े l प्रजा का हित उपेक्षित हो जाता है l धन मानव जीवन के लिए अति आवश्यक है लेकिन जब यही धन मानव जीवन के विभिन्न क्षेत्रो ---शिक्षा , चिकित्सा , कृषि , मनोरंजन आदि पर अपना कब्ज़ा कर लेता है तो वह उसे व्यवसाय बन देता है और व्यापार का मुख्य उदेश्य ही लाभ कमाना है l
25 June 2023
WISDOM ----
पुराण में एक कथा है ---- समुद्रमंथन के दौरान भगवान शिव ने जगत कल्याण के लिए विष का पान कर लिया था l इससे उनका कंठ नीला पड़ गया l ऐसा माना जाता है कि जिस माह में महादेव ने विषपान किया , वह सावन माह था l विषपान से भगवान शिव के शरीर का ताप बढ़ने लगा , जिसे शांत करने के लिए देवों ने शीतलता प्रदान की , लेकिन इससे भी भगवान शिव की तपन शांत नहीं हुई , तब उन्होंने शीतलता पाने के लिए चंद्रमा को अपने सिर पर धारण किया l देवराज इंद्र ने घनघोर वर्षा की जिससे भगवान शिव को शीतलता मिले l इसी घटना के बाद से सावन के महीने में शिवजी को प्रसन्न करने और शीतलता प्रदान करने के लिए जलाभिषेक किया जाता है l