22 September 2018

WISDOM ----- अनीति का प्रतिकार मानवीय गरिमा है

  जब  समाज  पर  दुर्बुद्धि  का  प्रकोप  होता  है  तब  अत्याचार  और  अन्याय  छूत  की  बीमारी  की  तरह  फैलने  लगता  है  I   समस्या  तब  विकट  हो  जाती  है  जब  समर्थ  लोग  गिरोह बद्ध  होकर  अपनी  शक्ति  का  दुरूपयोग  करने  में  कहीं  कोई  कसर  नहीं  रहने  देते    और  पीड़ित   कोई  प्रतिरोध  नहीं  करते  I
    ईश्वर  का  , प्रकृति  का  आक्रोश  तब  उभरता  है  जब  अनाचारी  अपनी  दुष्टता  से  बाज  नहीं  आते  और  सताए  जाने  वाले  कायरता , भीरुता  अपनाकर  टकराने  के  लिए  कटिबद्ध  नहीं  होते  I
  संसार  में  अनाचार  का  अस्तित्व  तो  है  ,  पर  उसके  साथ  ही  यह  भी  विधान  है  कि  सताए  जाने  वाले   बिना   हार - जीत  का  विचार  किये   प्रतिकार  के  लिए  , प्रतिशोध  के  लिए  तैयार  तो   रहें   I  दया , क्षमा  आदि  के  नाम  पर   अनीति  को  बढ़ावा  देते  चलना   सदा  से  अवांछनीय  माना  जाता  रहा  है   I  अनीति  के  प्रतिकार  को  मानवीय  गरिमा  के  साथ  जोड़ा  जाता  रहा  है   I  
  वर्तमान   युग   में   अनीति  और   अत्याचार  से   निपटने  के  लिए    संगठित  होकर   विवेकपूर्ण   ढंग  से   कार्य  करने  की   आवश्यकता  है    I

21 September 2018

WISDOM -----

 अर्नाल्ड  टायनबी  लिखते  हैं ---- "हमारे  कर्म  हमारे  लिए  एक  नैतिक  स्तर  का  बैंक   अकाउन्ट  बनाते  हैं   जिसमे  क्रैडिट  व   डैबिट  का  संतुलन  चलता  रहता  है  I हर  कर्म  के  साथ  ताजी  एंट्री  होती  रहती  है   व  दोनों  खाते  हर  बार  रिन्यू  होते  रहते  हैं  I "  वे  लिखते  हैं  कि---- " बड़ी निराली  व्यवस्था  भारतीय  ऋषियों  की  यह  है   जिसमे  व्यक्ति   गणितीय  सिद्धांत  के  अनुसार   शुभ  कर्म  करते  हुए   अपने  लिए  देवत्व  का  शुभ   मार्ग  चुन  सकता  है   l  "
 एक  स्वचालित  ' कर्म  पुरुषार्थ ' का  चक्र  सतत  चल  रहा  है  I

20 September 2018

WISDOM ---- सच्चा लोकसेवी अपने सिद्धांतों और मर्यादा पर दृढ़ रहता है

  महात्मा  गाँधी  के  जीवन  में  ऐसे  कई   प्रसंग  आये  ,  जब  उन्हें  अपने  सिद्धांतों  की  रक्षा  के  लिए  द्रढ़ता  बरतने  की  आवश्यकता  हुई   l  परन्तु   गांधीजी  बिना  किसी  प्रकार  की   कटुता  व्यक्त  किये  ,  अपने  सिद्धांतों  पर  दृढ़  रहे   l---- उनके  विदेशी  मित्रों  ने  एक  बार  प्रीतिभोज  का  आयोजन  किया   l  उस  समय  गांधीजी  विदेश  में  पढ़  रहे  थे  l  भोज  में  मांस  भी  पकाया  गया   और  परोसा  जाने लगा  ,  तो  उन्होंने  मना करते  हुए  कहा   कि  मैं  इसका  इस्तेमाल  नहीं  करता   l  मित्रों  ने  समझाया  कि  इसमें  क्या  नुकसान  है   I डाक्टर   लोग  तो  इसे  स्वास्थ्य  वर्धक   बताते  हैं  l  गांधीजी  ने  कहा --- " परन्तु  यह  मेरा  व्रत  है  कि  मैं  कभी मांसाहार  नहीं  करूँगा  I "
  मित्र  वाद विवाद  पर  उतर आये   और  तर्क  देने  लगे  l  बहुत  संभव  था  कि  गाँधीजी    भी  वाद विवाद  करने  लगते  I  मित्रों  ने  यह  कहकर  तर्क युद्ध  छेड़ने  का  प्रयास  किया  कि  उस  व्रत  की  क्या  उपयोगिता  जिससे  लाभदायक  कार्यों  को  न  किया  जा  सके  I  तो  गांधीजी  ने  यह  कहकर  विवाद  को  एक  ही   वाक्य  में  समाप्त  कर  दिया  किया  कि----- " इस  समय  मैं  व्रत  की  आवश्यकता , उपयोगिता  का  बखान  नहीं  कर  रहा  हूँ ,  बल्कि  मेरे  लिए   अपनी  माँ  को  दिया  गया  वह  वचन  ही  काफी  है  ,  जिसमे  मैंने  मांस  न  खाने  और  शराब  न  छूने  का  संकल्प  लिया  था   l " 
  गांधीजी  के  मित्र  वहीँ  चुप  रह  गए  I  वहां  सिद्धांत  रक्षा  भी  हो  गई  और  कटुता  भी  उत्पन्न  न  हुई   I

WISDOM ---- करुणा के साथ संकल्प जुड़ना चाहिए

  दुःखियों  को  देखकर  आंसू  बहाने  वाले  तो  ढेरों  हैं  ,  दुःख  को  मिटाने  का ,  समस्या  के  समाधान  का  संकल्प  जरुरी  है   l
 समाज  में  जब  भी  कोई  ह्रदय - विदारक  घटना  घटती  है  ,  अनेक  लोग  --सामान्य  से  लेकर  अनेक  प्रतिष्ठित  लोग  सहानुभूति  जताने ,  आंसू  बहाने पहुँच  जाते  हैं  I जुलूस  निकालते  हैं ,  नारेबाजी  करते  हैं  लेकिन  दुष्टता  को  मिटाने  का  ,  पापियों  के  अंत  का  संकल्प  कोई  नहीं  लेता  I  इस  कारण  दुःखद  घटनाओं  की  पुनरावृति  होती  है   I
 श्री रामचरितमानस  में  एक   प्रकरण  है ,  ऋषियों  की अस्थियों  के  समूह  को  देखकर   भगवान  राम  व्याकुल  हो  गए  l  अरण्यकाण्ड  में  गोस्वामीजी  लिखते  हैं  -----
      अस्थि  समूह  देख  रघुराया  I  पूछी  मुनिन्ह   लागि  अति   दाया  I I
      निसिचर  निकर  सकल  मुनि  खाए  I  सुनि  रघुबीर  नयन  जल  छाए   II
 रघुनाथजी  की  आँखों  में  यह  द्रश्य  देखकर   आंसू  आ  गए  l  वे  द्रवित  हो  उठे   और  तुरंत  उन्होंने  घोषणा  की ----
  निसिचर  हीन   करऊँ  महि  भुज  उठाइ  पन  कीन्ह
 सकल  मुनिन्ह  के  आश्रमहिं  जाइ  जाइ  सुख  दीन्ह  I
    सारी  धरती  को   राक्षसों  से  विहीन  करने  की   उनने  भुजा  उठाकर   प्रण  के  साथ  घोषणा  की  l
  भगवान  राम  की  सच्ची  भक्ति  यही  है  कि  करुणा , दया  को  दिखाकर  ,  सबको  प्रभावित  करके   नहीं  रह  जाना  चाहिए  I   करुणा  संकल्प  के  साथ   जुड़नी  चाहिए   और  फिर  सक्रियता  में  बदलनी  चाहिए  , तभी  उसकी  सार्थकता  है   I

18 September 2018

WISDOM -------

  महर्षि  दयानन्द   फर्रुखाबाद  में  रुके  हुए  थे   ल  एक  व्यक्ति  दाल- चावल  बना  कर  लाया  I  वह  गृहस्थ  था  और  मजदूरी  कर  के  परिवार  का  पालन - पोषण  करता  था   I  स्वामीजी  ने  उसके  हाथ  का  अन्न  जो  वह  बड़ी  श्रद्धा  से  लाया  था  ,  ग्रहण  किया   I  ब्राह्मणों  को  बुरा  लगा   l  वे  बोले  आप  संन्यस्त  हैं  I  इस  हीन  कुल  के  व्यक्ति  के  हाथ   का  भोजन  लेकर  आप  भ्रष्ट  हो  गए   l  स्वामीजी  बोले  ---- " कैसे ,  क्या  अन्न  दूषित  था  ? "  ब्राह्मण  बोले  --- " हाँ ,  आपको  लेना  नहीं  चाहिए  था  I "
  स्वामीजी  बोले ----- " अन्न  दो  प्रकार  से  दूषित  होता  है  -- एक  तो  वह  जो   दूसरों  को  कष्ट  देकर    शोषण  द्वारा  प्राप्त   किया  जाता  है   इ  और  दूसरा  वह  ,  जहाँ  कोई  अभक्ष्य  पदार्थ  उसमे  गिर  जाता  है   इस  व्यक्ति  का  अन्न  तो  दोनों  ही  श्रेणी  में  नहीं  आता  ल इसका  अन्न  परिश्रम  की  कमाई  का  है  ,  फिर  दूषित  कैसे  हुआ  ,  मैं  भ्रष्ट  कैसे  हो  गया   ?  आप  सबका  मन  मलिन  है  ,  इसी  से  आप  दूसरों  की  की  चीजें  मलिन  मानते  हैं   I  मैं  जाति  जन्म  से नहीं ,   कर्म  से  मानता  हूँ  I  भेदभाव  त्याग  कर  सबके  लिए  जीना  सीखना  चाहिए   I

16 September 2018

WISDOM ------ सम्पति का सदुपयोग जरुरी है

' आवश्यकता  से  ज्यादा   एकत्रित  सम्पदा   स्वयं  के  लिए  और  परिवार  के  लिए   पतन  का  कारण  बनती  है   I  '      आज    के  समय  में   भोग - विलास  का  जीवन   जीना  और  उसके  लिए  हर  तरह  के  अनैतिक  प्रयासों  में   निरत  रहना  ही   लोगों  की  मानसिकता  है  I इस  कारण  जीवन  मूल्य  तो  गिरते  ही  हैं  ,  शोषण ,  लूट - खसोट ,   ,  अपराध ,  आर्थिक  विषमता ,  आतंक ,  अपराध ,  लाइलाज  बीमारियाँ    आदि   समस्याएं  उत्पन्न  हो  जाती  हैं 
      एक  शिष्य  ने  गुरु  से  पूछा  ----  "  सम्पति  का  सदुपयोग  न  करने  पर  क्या   होता    है  I "
  गुरु  ने  उत्तर दिया --- वत्स  !  तुमने  रेशम  का  कीड़ा  देखा  है  ?  एक  रेशम  का  कीड़ा  रेशम  इकट्ठी  कर  के  भारी - भरकम  हो  जाता  है   और  अपने  ही  बनाये  जाल  में  जकड़कर  मर  जाता  है  I  उसके  पास  की  जमा  पूंजी   दूसरों  का  जी  ललचाती  है   और  वे  लालची  उसके  ही  जीवन  का  नाश  करते  हैं   I
             धन  का  सदुपयोग  न  करने  वाले  सम्पतिवान   भी  उस  रेशम  के  कीड़े  की  तरह  हैं  ,  जो  स्वयं  तो   आवश्यकता  से  अधिक  सम्पति  का  उपयोग  कर  नहीं  पाते,  परन्तु  इसके  कारण  मात्र  लालचियों  और  दुष्टों  के  भरण - पोषण  का  माध्यम  बनते  हैं   I

15 September 2018

WISDOM ----- बड़े आदमी बढ़ रहे हैं , लेकिन महामानव अब नहीं मिलते

 अब  ऐसे  व्यक्तियों  को  ढूंढ  पाना  बहुत  मुश्किल  है  , जिन्हें  सच्चे  अर्थों  में  मनुष्य  कहा  जा  सके   I  अपराध  तो  अपराध  है  चाहे  छोटा  हो  या बड़ा  I   जो  जितना  ज्ञानवान  है  वो  इस  ढंग  से  अपराध  करेगा
  कि  वह   बच   जाये ,  उसका  कहीं  नाम  भी  न  आये   और  उसके  किये  अपराध  में    सोची   समझी  योजना  के  अनुसार   दूसरा  फंस  जाये   l अब  अपराध   एक  शानदार   कृत्य ,  एक  फैशन     बन  गया  है  ,  इसे  कर  के  अब  कोई  लज्जित  नहीं  होता  ,  बल्कि  अपनी  चतुरता  की  प्रशंसा    पाने  की  आशा  करता  है   और  जो  इसमें  सम्मिलित  नहीं  होता  वह  बुद्धू  और  त्यागने  योग्य  है   l  इसी  वजह  से   समाज  में  अनेक  कठिनाइयाँ  और  समस्याएं  बढ़  गईं  हैं   I