20 April 2021

WISDOM -----

 ' मनुष्य  की  एक   मुट्ठी  में  स्वर्ग   और   दूसरी   में नरक  है  l   वह  अपने  लिए  इन  दोनों  में  से   किसी  को  भी  खोल  सकने   के लिए    स्वतंत्र है   l '        हम  क्या  चुनते  हैं  यह  हमारे  विवेक  पर  निर्भर  है  l   या  तो  हम  आधुनिक  सुख - सुविधाओं   में  जीवन  व्यतीत  करें  ,  जिसमे  विज्ञानं  द्वारा  प्रदत्त  साधनों  से  निकलने  वाली  तरंगे  हमारे  स्वास्थ्य  को  प्रभावित  करती  हैं   और  हमारी  प्रतिरोधक  शक्ति  को  कम  करती  हैं  ,---- या  हम   सीमित   मात्रा  में    सुविधाओं  का  उपभोग  करते  हुए   प्राकृतिक  जीवन  जिएं   l   आज  की  स्वास्थ्य  संबंधी   अधिकांश  समस्याएं  विज्ञान   की  देन   l    जब  संसार  के  बुद्धिजीवी  , विचारशील  व्यक्ति  आगे  बढ़कर   वैज्ञानिक  प्रगति  की  सीमा , एक  मर्यादा  निर्धारित  कर  देंगे   तभी  संसार  विभिन्न  आपदाओं  से  सुरक्षित  रह  पायेगा   l 

19 April 2021

WISDOM ------

    संसार  का  इतिहास  युद्धों  का  इतिहास  है   l  युद्ध  के   हथियार  बदलते  गए   लेकिन  परिणाम     होता  है  --- जन - धन  की  हानि  l   इसलिए  जब  भी   विशाल  पैमाने  पर  जन - धन  की  हानि  हो   तो  वह  युद्ध   का  ही  एक  रूप  है   l   वर्तमान  स्थिति  में  सभी  देश  इस  महामारी  से  ग्रस्त  हैं  तो  यह  एक  प्रकार  का  विश्व  युद्ध  है  l    यह  युद्ध  छद्म  युद्ध  है  , इसमें  न  तो  वार  करने  वाला  दिखाई  देता  है   और  न  ही  कोई  हथियार  दिखाई  देता  है  l   बस  !  मनुष्य  भयग्रस्त  होकर    इधर  से  उधर  भाग  रहा   है  l  पहले  युद्ध  होने  पर  ' ब्लैक  आउट '  होता  था  ,  सड़कों  पर  सन्नाटा  छा  जाता  था  ,  लोग  बम  के  भय  से  घरों  में  दुबके  रहते  थे   l   ठीक  वही  स्थिति  आज  भी  है    l   भयभीत  होना  एक  प्रकार  की  मृत्यु  ही  है  l   भयग्रस्त  व्यक्ति  की  चेतना  मूर्छित  हो  जाती  है   और  वह   सही  निर्णय  नहीं  ले  पाता  ,  अपने  जीवन  को  बचाने  की   चाह     में  वह  मृत्यु  को  आमंत्रित  कर  लेता  है   l   भय  के  कारण  जब  सोचने - समझने  की  शक्ति  नहीं  रहती    तब  वह  ' भेड़ - चाल  '  चलता  है   और  अपने  हाथों  अपना  अहित  करता  है  l'  भय '  भी   एक  प्रकार  का  हथियार  है  ---   मनुष्य       अपनी    बुद्धि   का  दुरूपयोग  करता  है   तब  अपने  लालच , स्वार्थ  और  अहंकार   के  कारण  वह  रावण  की  तरह   भय  का   कारोबार  करता  है  l   रावण  का  भय  दसों   दिशाओं  में  व्याप्त  था  l   यह  मानव  जाति   का  दुर्भाग्य  है  कि   हमने  रावण  की  बुराइयों  को  अपना  लिया   और   उसके  गुणों  को  नहीं  अपनाया  l   ऐसा  कर  के  मनुष्य  ने  अपने  ही  अस्तित्व  पर  संकट  उपस्थित  कर  लिया  l 

18 April 2021

WISDOM -------

  मनुष्य  की  मुसीबतों  का  सबसे  बड़ा  कारण  है  कि   आज  मनुष्य  नास्तिक  हो  गया  है  l  विज्ञानं  ने  जो  प्रगति  की  है    उसका  अहंकार  मनुष्य  को  हो  गया  है   और  वह  स्वयं  को  भगवान  समझने  लगा  है  l  यही  कारण  है  आज  समाज  में  तनाव , आत्महत्या ,  आतंक , अपराध , अकाल मृत्यु ,  बीमारी , महामारी ,  आपदाएं  बढ़  गई   हैं   l '  भगवान '  का  अर्थ  है  ---- सद्गुणों  का  सम्मुच्य  '  l   लेकिन    वैज्ञानिक    आविष्कार  यदि  मानव  समाज  को  नुकसान  पहुंचा  रहे  हैं  ,    तो  हमें  यह   समझना  होगा     कि   हम  अब  भगवान  किसे  माने  क्योंकि  ईश्वर   की  प्रत्येक  देन   पवित्र  है  l   ईश्वर  ने  हमें  शुद्ध  हवा  दी  है   यदि  हम  उसे  न  लेकर   मानव  निर्मित   किसी  डिब्बे  से  हवा  लेंगे  तो  यह  हमारा  कुसूर  है  l   माँ  ,  चाहे   वह  इनसान   हो  या  पशु - पक्षी  ,  जब  वह  बच्चे  को  अपना  दूध  जो  ईश्वरीय  देन     है  , पिलाती  है  तभी  बच्चा  स्वस्थ  रहता  है  l   यदि  मानव  निर्मित  डिब्बे  का  दूध  पिलायेंगे  तो  बच्चा   उतना स्वस्थ  नहीं  होगा  l   ईश्वर  की   यह  देन   कितनी  आश्चर्यजनक  है   कि   एक  से  एक  गरीब , भूखी - प्यासी  रहने  वाली  माताओं  के  स्तन  में  बच्चे  को  पिलाने  के  लिए  दूध  आ  जाता  है    लेकिन  अनेक  ऐसी  माताएं  भी  हैं   जो  बहुत  अमीर  हैं  ,  खाने - पीने  की  कोई  कमी  नहीं  है   ,  वे    ईश्वर   की   इस   देन   से  वंचित  रह  जाती  हैं   फिर  उन्हें   अन्य  उपायों  का  सहारा  लेना  पड़ता  है   l  संसार  में  आज  जितनी  समस्याएं  हैं   उसका  कारण  अमीरों  की  तृष्णा  है   जो  कभी  पूरी  नहीं  होती  ---  नशा  बेचने  वाला  चाहेगा   कि   उसका   ज्यादा  से ज्यादा  माल   बिक  जाये  जिससे   उसकी अमीरी  बढ़  जाए ,  हथियार   का व्यापारी   चाहेगा कि   खूब  दंगे - फसाद  हो  ,   युद्ध का खतरा  रहे  ताकि  माल  बिके ,   दवा  विक्रेता  चाहेगा   अधिक   से अधिक  लोग  बीमार  पड़ें  ताकि   दवाई  बिकेँ ,  फिल्म   वाले चाहेंगे  कि   कितने   अपराध के   और अश्लील  दृश्य  डालें   कि   करोड़ों  की  आमदनी  हो  जाये  ,  रासायनिक  खाद  वाले  चाहेंगे  कि   चाहे  लोगों  का  शरीर  जहरीला  हो  जाये    उनकी खाद  और  कीटनाशक  बिक  जाएँ  l   यह  सब  इसलिए  है  क्योंकि  आम   जनता जागरूक  नहीं  है   और  चतुर  लोग  मनुष्य  की  कमजोरी   का फायदा  उठाना  जानते  हैं  l   सुख - शांति  से  जीवन  जीने  का  एक  ही  रास्ता  है    कि   हम  ईश्वरविश्वासी  ( आत्मविश्वासी ) बनें  और  सद्बुद्धि   की प्रार्थना  करें   l 















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         उउउउप['

   एक  गाँव  की  कहानी  है  --- वहां  एक  सूदखोर   जो  लोगों  को  धन  उधार  देता   रहता  था  l   वह  चाहता    बहुत  धनवान  हो  जाये   जिससे  बहुत  बड़े  क्षेत्र  में  धन  उधार   दे  सके   और  उसका  ब्याज  इतना  अधिक  आए   कि   वह  उससे  फिर   और   उधार  दे  l   इस  क्षेत्र  में  उसका  खूब  नाम  हो  l  वह  चाहता  था  कि   कोई  ऐसा  तरीका  हो  जिससे  वह  शीघ्र  धनवान  हो  जाये  l   इसके  लिए   उसने बहुत  साहित्य  का , धर्मग्रंथों  का  अध्ययन  किया  l   वह  मनुष्य  की  कोई   ऐसी  कमजोरी  जानना  चाहता  था    जो  सम्पूर्ण  मानव  समाज  की  हो  l  बहुत  अध्ययन  के  बाद  समझ  में  आया  कि   प्रत्येक  मनुष्य   चाहे  वह  अमीर  हो  या  गरीब , ऊंच  हो  या  नीच  , सब  जीना   चाहते हैं   l   बहुत  बड़ी  आयु  तक  भी  सुख -भोग  भोगना  चाहते  हैं  l   अब  उसे  रास्ता  मिल  गया  l   उसने  साधु  का  वेश  धरा  और  अपने  अनेक  चतुर  साथियों  को  गाँव - गाँव  में  भेजा  l   उन्होंने  प्रचार - प्रसार  किया  कि   हमारे  साधु  बाबा   के  पास  ' अक्षय पात्र ' है   उसमे  से   उनके  दिए  जल  को  पीने  से  व्यक्ति  की  आयु  सौ   वर्ष  और  बढ़  जाएगी  तथा  वह    स्वस्थ होकर  दीर्घ  अवधि  तक   आनंद   से  रहेगा   l   अब    उसके  दरवाजे  पर  भीड़  लगने  लगी  l   उस  सूदखोर  साधु  के  साथ  एक  छोटा  लड़का  था   , वह  लोगों  के  सामने  उस  छोटे  लड़के  के  हाथ , गर्दन  या  माथे  पर  एक  कीप   लगाकर     कुछ  बुदबुदाता  तो  कीप  में   पता  नहीं  कहाँ  से  पानी  गिरने  लगता  जिसे  वह  अक्षय पात्र  में  रखता   और  इच्छुक  लोगों  को  पिलाता  l   अब  क्या   था  धंधा  चल  निकला  l   वह  कहता   ---सौ   वर्ष  आयु   में  वृद्धि  करनी  है  तो  कुछ  कष्ट  तो  सहन  करना  ही  पड़ेगा  , इसके  लिए  वह  तरह - तरह   की दवाइयां  देता  l   वह  धनवान  होता   गया  और  लोग   बीमार , बुझे  हुए  चेहरे  और  अमानवीय  लक्षणों   से ग्रस्त  होने  लगे  l   अपनी  अज्ञानता  के  कारण  और  दवाइयां  उससे  लेते  और  अपने  शरीर   को गलाकर   उस  सूदखोर  को  और  अमीर  बनाने   में अपना  भरपूर  योगदान  देते   l    उसी  गाँव  का  एक  नवयुवक  जो  अध्ययन  के  लिए   दूर  किसी  नगर  में  गया  था  ,  जब  लौटा  तो  उसने  देखा   चारों  ओर   मौत  का  सन्नाटा  है  , खुशियां  जैसे  ख़त्म  हो   गईं ,  लोगों  के  चेहरे  अजीब  से  हो  गए  l   लोगों  से  पूछा  तो   उन  अज्ञानी  लोगों  ने   उस  बाबा  की   बहुत तारीफ  की   कि   वह  हमें  दवाई  भी  देता  है ,  धन  उधार  भी   देता है  ,  इस  गाँव  पर   कोई प्रकोप  हो  गया  

WISDOM ------- मन से दुर्भावनाएं दूर न हुईं तो फिर गंगा स्नान किस काम का ?

     कबीर दास  जी  के  जीवन  का  प्रसंग  है  ---- प्रात:  का  समय  था  l  भक्त  लोग  स्नान  कर  रहे  थे  l   कुछ  ब्राह्मण  भी  गंगा  स्नान  करने  आए  l   पानी  काफी  गहरा   था इसलिए  घुसकर  स्नान  करने  का  साहस  नहीं  हो  रहा  था   l   एक  किनारे  पर  संत  कबीर  स्नान  कर  रहे  थे  l    उन्होंने  देखा  तो  अपना  लोटा  मांज - धोकर   एक  व्यक्ति  को  दिया   और  कहा  कि   जाओ , ब्राह्मणों  को  दे  आओ   ताकि  वे  भी  सुविधा  से  स्नान  कर  सकें   l   कबीर  का  लोटा  देखकर   ब्राह्मण  चिल्ला  उठे  --- " अरे  !  जुलाहे  के  लोटे  को  दूर  रखो   l  "  कबीर  बोले  --- " इस  लोटे  को  कई  बार  मांजा   और  गंगाजल  से  धोया   फिर  भी  पवित्र  नहीं  हुआ  ,  तो  यह  मानव  शरीर   जो  दुर्भावनाओं  से  भरा  है  ,  गंगाजी  में  स्नान  करने  से  कैसे  पवित्र  होगा   ? "  कबीर  के  ये  शब्द  सुनकर   ब्राह्मण  बड़े  लज्जित  हुए    और  एक  दूसरे  का  मुंह  ताकने  लगे   l  

15 April 2021

WISDOM -----

     एक  बार  की  बात  है    सब  बीमारियों  में  बहुत  लड़ाई  हुई  ,  प्रत्येक  बीमारी  अपने  आपको  बड़ा  कह  रही  थी   और  अपना   महत्व    बता  रही  थी  कि   वो  जिसके  लग  जाये   उसका  क्या  हाल  हो  जाता  है   l  आपसे  के  भेदभाव ,  ऊंच - नीच    के  कारण  वे  सभी  परेशान   थीं   l   अपनी  समस्या  के  समाधान  के  लिए  वे  पहाड़  के  पास   गईं  l    पहाड़  ( पर्वत )  पहाड़  उनकी  समस्या  सुनकर  हँसने   लगा  l  उसने  कहा  --- ' तुम   मूर्ख   हो  l   मनुष्य  इसी  भेदभाव  और  ऊंच - नीच    के  दुर्गुण  से  आपस  में  लड़कर  अपनी  ऊर्जा  गँवा  देता  है  , इस  कारण   तुम  मनुष्य  पर   हावी  होकर    , उनको  चूसकर  अपना  भोजन  प्राप्त  करती  हो   और   चतुर  लोग  तुम्हारे  माध्यम   से अपना  खजाना  भरते  हैं  l   अब  यदि  तुम  आपस  में   लड़ोगी   तो  कमजोर  हो  जाओगी  ,   और मनुष्य   यदि   जागरूक  हो  गया   और  मेरे  पास   छाई   इस  हरियाली  के  संरक्षण  में  आ  गया   तो  तुम्हे  कहीं  ठिकाना  नहीं  मिलेगा  l  "  यह  सुनकर  बीमारियों  को  बात  तो  समझ  में  आ  गई    वे  बोलीं  --- लेकिन  हम  क्या  करें  ,   किसी  का  ऊँचा  नाम  और  महत्व   देखकर  हमें  ईर्ष्या  होती  है  ,  इस ईर्ष्या  को  कैसे  दूर  करें  ? '   पहाड़  ने  बहुत  सोच - विचार  कर  कहा  --- '  समस्या   का    मूल  कारण   नाम  और  उपनाम  है  l   अब  तुम  सब  एक  ही  नाम  से  मनुष्य  पर  लग  जाओ  l   मनुष्य  अपनी  गलत  आदतों  से  अपनी  प्रतिरोधक    शक्ति  गँवा  देता  है   और  अनजाने    ही    तुम्हे  आमंत्रित  करता  है   इसलिए  आपस  में  लड़कर  अपने  अस्तित्व  को  मत  मिटाओ  l  '

14 April 2021

WISDOM -----

 पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  का  कहना  है  ---- ' अत्याचार  और  अन्याय  के  विरुद्ध  प्राणों  की  बाजी  लगा  देने  वाले  को  परमात्मा  अपनी  शक्ति  दे  देता  है   l  '   जो  अत्याचारी  है , निर्दयी  है   उसे   कमजोर  को  सताने  में  ही  आनंद   आता  है  लेकिन  यह  भी  सत्य  है  कि   यदि  हम  चुपचाप  अत्याचार  को  सहन  करते  जाएंगे  तो  अत्याचारी  की  हिम्मत   और  बढ़  जाएगी ,  असुरता  और  प्रबल  होगी  l  धर्म - कर्म  रुक  जाने   असुरता  और  अधिक  मजबूत  होती  है   l   अत्याचार  तो  हर  युग  में  होता  है  l   समय  के  साथ  उसका  रूप  बदल  जाता  है  l   जो  वीर  होते  हैं   वो सामने  से  और  चुनौती  देकर   ही वार  करते  हैं   लेकिन  जब   संसार  में  कायरता  बढ़  जाती  है   तब  छुपकर  वार  होते  हैं   और   हम  जागरूक  और   निर्भय  होकर  ही  समझ  सकेंगे   की   बाह्य  रूप  से  सबके   हित   की  बात  करने  वाला   वास्तव  में  हितैषी  है    या  उसकी  मंशा  कुछ   और  है   ?   महाभारत  में  एक  कथा  है  -----  जब  पांचों  पांडव  माता  कुंती   समेत वनवास  में  थे  , तब  उन्होंने  एक  ब्राह्मण    परिवार के  घर  में  आश्रय  लिया  था  l   एक  दिन  उन्हें  ब्राह्मण  परिवार  के  रोने  की  आवाज  आई  l   तब  माता  कुंती  ने   भीम  से  कहा  कि   जाओ  पता  करो   कि   यह  ब्राह्मण  परिवार  इतना  दुःखी    क्यों है   ?  माता  कुंती  भी  भीम  के  साथ  गईं   और  ब्राह्मण  परिवार  को  सांत्वना  दी   तथा  दुःख  का  कारण  पूछा  l   तब  ब्राह्मण  ने   कहा  ---- माता  !   इस  क्षेत्र  में  एक  बहुत  भयानक  दैत्य  का  आतंक  है  l   वह  पहले  प्रतिदिन  जहाँ  से  जिसको  चाहता   था  खाने  के  लिए  पकड़  ले  जाता  था  l   जिससे   सम्पूर्ण  क्षेत्र  में  , प्रत्येक  घर   में  भय   व्याप्त  था  l   शिक्षा , चिकित्सा , धर्म - कर्म , सामान्य  जीवन क्रम , सामाजिक  जीवन  सभी  कुछ  अस्त - व्यस्त  हो  गया  था  l  इसलिए  जनता  ने   पंचायत  कर  के  दैत्य  से  यह  समझौता  कर  लिया   कि   वह  बस्ती  में  न  आये   ,  प्रतिदिन   क्रम  से  एक  घर  से  एक  आदमी   और  भोजन  का  सामान  उसके  पास  पहुँच  जाया  करेगा   l  इसी   क्रम में  आज  उसके  परिवार    की  बारी  है   l   हम  पुत्र  वियोग  का  दुःख  सहन  नहीं  कर  सकते  इसलिए  हम  सबने  एक  साथ  दैत्य   के पास  जाकर  मरने  का  निश्चय  किया  है  l  "  कुंती  ने  उन्हें  सांत्वना  दी   और कहा  कि ----  आप  निश्चिन्त  रहें  ,  आपने  अपने  घर  में  हमें  आश्रय  दिया  है  ,  आपकी  रक्षा  करना  हमारा  कर्तव्य  है  l   आज  मेरा  पुत्र  भीम   जायेगा l  भीम  बहुत  बलवान  थे  ,  फिर  सत्प्रयासों  में  बहुत  शक्ति  होती  है   l   भीम  ने  दैत्य  का  वध  कर  दिया   और  वह  क्षेत्र  दैत्य  के  आतंक  से  मुक्त  हो  गया   l 

13 April 2021

WISDOM ------

   विचारों  में  परिवर्तन  और  परिमार्जन  होते  ही  जीवन  कैसे  बदल  जाता  है  ,  इसके    उदाहरण  हैं  --- महात्मा  टालस्टाय   l   टालस्टाय  जन्मजात  महात्मा  नहीं  थे  l   वे  एक   सामन्तवंशी    राजकुमार  थे  l   रुसी  सेना   में सेना नायक  के  पद  पर  कार्य  करते  रहे  l   सामंत  सेनापतियों  की   सारी   बुराइयां  उनमे  भरी  पड़ी  थीं  l  जीवन  के  कई  वर्ष  उन्होंने  मद्दपान , क्रूरता , हत्या  तथा  भोग - विलास  में  बिताये  l   जब  वे  रुसी   तोपखाने  में  थे   तब  युद्ध  में  जाकर  हजारों  मनुष्यों  का  वध  किया  करते  थे  , गांव  और  नगर  वीरान  कर  देते  थे  l  तब  उन्हें  अनाथ  हुए  बच्चों , विधवाओं   और  पुत्रहीन  माताओं  का  क्रंदन   और  घायलों  की  कराह  सुखद  लगती  थी  l   खेत  और  खलिहानों  को  जलाती   हुई  आग  की  लपटें   सुहावनी  लगती  थीं  l  टालस्टाय  के  जीवन  की  यह   अंधकार  की  स्थिति  बहुत  समय  तक  न  चल  सकी  l   उन्होंने  महात्माओं , संतों  और  सज्जनों  के  जीवन  से   अपनी  तुलना  की   तो  उन्होंने  अनुभव  किया  कि   वे  मानों  मनुष्य  हैं  ही  नहीं  ,  वे  पशु  हैं  l   व्यसन  और  विलासिता  के  दास   हैं  l   ऐसे  विचार   आते ही  उन्हें  अपने  जीवन  पर  ग्लानि  होने  लगी  l   वे  जब  सेना  में  थे  ,  उन   दिनों को  याद  कर  के  रो   देते  थे  l  सत्य   का  प्रकाश   आते  ही  उन्होंने  अपने  जीवन  की  धारा   बदल  दी   और  अब  वे  बुरे  से  अच्छे  बनकर   प्रेम , करुणा ,  सहृदयता ,  सहानुभूति    तथा  त्याग - तपस्या  की  मूर्ति  बन  गए  l   आत्म ग्लानि  की  वेदना  को  कम  करने  के  लिए   उन्होंने  कलम  का  सहारा   लिया  और  ' बचपन '  नामक  उपन्यास  लिखा  , जिसकी  बहुत  प्रशंसा  हुई   l  उन्होंने  रूस  में  विद्द्या  प्रसार  का  बहुमूल्य  कार्य  किया   l