17 January 2022

WISDOM -----

 जीवन  में  ' संतोष  '  का  अर्थ  यह  नहीं  कि   हम  आगे  बढ़ने  की  कोशिश  ही  न  करें  l ' संतोष ' का  अर्थ  है  ---   हम  आगे  बढ़ने  की  सही  रास्ते  से  भरपूर  कोशिश  करें ,  इसके  साथ  जो  ईश्वर  ने  हमें  दिया  है   उसे  अपना  सौभाग्य  माने , ईश्वर  के  प्रति  कृतज्ञ  हों  l '   जब  व्यक्ति  अपनी  इच्छाओं  को  पूरा  करने  के  लिए  छल - कपट ,  धोखा , षड्यंत्र ,  दूसरे  का  हक  छीनना ,  साजिश  करना  जैसे  ओछे  कार्य  में  उलझ  जाता  है   तभी  से  वह  स्वयं  अपने  लिए  तनाव  और  बीमारी  मोल  ले  लेता  है  l  ------ एक  व्यक्ति  एक  संत  से  बोला ---- " महाराज  !  मेरे  जीवन  में  तनाव  बहुत  है   l   क्या  करूँ  ?  मेरी  कोई  इच्छा  पूर्ण  ही  नहीं  होती   और  तनाव  बढ़ता  जाता  है   l "  संत  बोले ---- " बेटा  !  रामचरितमानस  में  तुलसीदास जी  लिखते  हैं  --- " विषय  मनोरथ  दुर्गम  नाना  l   ते  सब  सूल   नाम  को  जाना  l "  अर्थात  इस  संसार  में  जितनी  भी  इच्छाएं  हैं  ,  वे  सब  कांटे  के  समान   हैं   l   वे  जितनी  बढ़ती  जाती  हैं  ,  उतना  ही  मन  पीड़ित  होता  जाता  है    l   इसलिए  इच्छाएं  पूरी  करने   की  दौड़  में  पड़ने  के  बजाय   जितना  है   उसमे  संतोष   करने  का  प्रयत्न  करो   तो  जीवन  स्वत:  ही  तनाव मुक्त  हो  जायेगा  l " 

16 January 2022

WISDOM -----

   चिकित्सा  के  क्षेत्र  में  आज  मनुष्य  ने  जितनी  तरक्की  कर  ली  ,  उससे  ज्यादा  नई - नई  बीमारियाँ   पैदा  हो   गईं   l   बीमारी  का  आक्रमण  तभी  होता  है  जब  हमारे  भीतर  नकारात्मकता  हो ,  प्रतिरोधक  शक्ति  कम   हो  l   बीमारी - महामारी   के लिए  किस - किसको  दोष  दें ---रासायनिक  खाद  बीज , कीटनाशक , वैज्ञानिक  आविष्कार ------- आदि   अनेक  कारणों  के  बीच  यदि   हमारी   सोच  सकारात्मक  है  ,  कोई  तनाव  नहीं  है   तो  हम  समस्याओं   पर   विजय  पा  सकते   हैं  l   आज  की   भाग - दौड़   की जिंदगी  में  व्यक्ति   तनावग्रस्त  है  ,  इस  कारण   उसे अनेक  बीमारियाँ   घेरने  लगती  हैं   l  ब्लड प्रेशर , अल्सर , हार्ट अटैक , डाइबिटीज  जैसी  अनेक  बीमारियों  के  कारण  व्यक्ति  की  प्रतिरोधक  क्षमता  कम  हो  जाती  है  ,  इस  कारण  नई   बीमारी  उस  पर  तेजी  से  आक्रमण  करती  हैं  l   यदि  व्यक्ति  अपनी  जीवनशैली  को  सुधार   ले  ,  मन  को  शांत  रखे , सादा - सरल  जीवन  जिए   तो    इन परिस्थितियों  के  बीच  भी स्वस्थ  रह  सकता  है   l 

WISDOM ------

   महाभारत  में  धर्मराज  युधिष्ठिर  से  यक्ष  ने  कई   प्रश्न  पूछे  ,  उनमे  एक  प्रश्न  था  ---- ' इस  संसार   का परम  आश्चर्य  क्या  है  ? '    युधिष्ठिर  ने  उत्तर  दिया  --- "  सबसे  बड़ा  आश्चर्य  है  कि  मृत्यु  को  सुनिश्चित  घटना  के  रूप  में   देखकर  भी   मनुष्य  इसे  अनदेखा  करता  है  l   यह  मृत्यु  की  नहीं ,   जीवन  की  तैयारी   कुछ  इस  ढंग  से  करता  है  ,  जैसे  विश्वास  हो  कि    वह कभी  नहीं  मरेगा   l   उसे  सदा - सदा  जीवित  रहना  है   l  "  लोग  सोचते  हैं  कि   मृत्यु  का कारण  कोई  रोग  या  दुर्घटना  है   l   यदि  उसका  समाधान  निकल  लिया  जाये  तो  मृत्यु  से  बचा  जा  सकता   है   लेकिन   '  मौत  के  अनेक  बहाने   होते हैं    और  जीवन  रक्षा  के  अनेक  सहारे  होते  हैं  l  "     आचार्य श्री  लिखते  हैं  ---- हमें  मृत्यु  को  निश्चित  मानकर  ,  जीवन  को  सार्थक  करने  का  प्रयास  करना  चाहिए   l  '

14 January 2022

WISDOM ------

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- ' अगर  आप  दूसरों  से  स्नेह , सम्मान , सहानुभूति  चाहते  हैं   तो  उनकी  आलोचना , बुराई  न  करें  l   किसी  की  आलोचना  करने  से  कोई  फायदा  नहीं  होता  l  आलोचना  से  कोई  सुधरता  नहीं  है  , बल्कि  इससे  संबंध   जरूर  बिगड़  जाते  हैं   l  ' अब्राहम  लिंकन  ने   अपने  जीवन  के  अनुभव  से   दूसरों  की  आलोचना  करने  के   बुरे  परिणाम  को  जाना  l   उनका  प्रिय  कोटेशन  था ---- " किसी  की  आलोचना  मत  करो ,  ताकि  आपकी   भी आलोचना  न  हो   l "  जब  भी  श्रीमती  लिंकन  और   दूसरे  लोग  दक्षिणी   प्रान्त  के  लोगों  की   आलोचना  करते  तो  लिंकन    जवाब   देते  थे  ---- " उनकी  आलोचना  मत  करो  ,  अगर  हम  उन  परिस्थितियों  में  होते   तो  हम  भी  वैसे  ही  होते  l  "  लिंकन  अपने  जीवन  के  कटु  अनुभव  से  जानते  थे   कि   तीखी  आलोचना  और   डांट  - फटकार    हमेशा  नुकसानदायक  होती  है   और  उससे  कोई  लाभ  नहीं  होता   l  आलोचना  यदि  दूसरों  को  सुधारने  के  लिए  भी  हो   तो  दूसरों  को  सुधारने  के  बजाय  खुद  को  सुधारना    ज्यादा  फायदेमंद   होता  है   और  कम  खतरनाक  भी   l  "     आचार्य श्री  लिखते  हैं  ---- " यदि  किसी  के  मन  में  स्वयं  के  प्रति  विद्वेष  पैदा  करना  है  ,  जो  दशकों  तक  पलता    रहे   और  मौत  के  बाद  भी  बना  रहे  ,  तो  इसके  लिए  कुछ  ख़ास  नहीं  करना  पड़ता  ,  सिर्फ  चुनिंदा  शब्दों  में   चुभती  हुई   आलोचना   करनी  होती  है   l   जाने - अनजाने   ज्यादातर  लोग  ऐसा  ही  करते  हैं   और  दूसरों  के  मन  में   खुद  के  प्रति  विषबीज  बो  देते  हैं  l "

WISDOM -----

   आज  जब  संसार  में  बीमारी ,  महामारी  का  कोहराम  है  ,  लोग  भयभीत  हैं  l   अपना  स्वाभाविक  जीवन  नहीं  जी    पा    रहे  हैं   l   यह  स्थिति  समस्त  संसार  के  लिए  एक  संकेत  है   कि   ' वेदों  की  ओर   लौट  चलो  '  प्रकृति  का  सम्मान  करो  ,  प्रकृति  हमें  पोषित  करेगी  l ------   ऋषियों  ने  हमें  ज्ञान  दिया  -----'   वेदों  में  सूर्य  किरण  चिकित्सा  का  वर्णन   बड़े  विस्तार  से  आता  है  l  मत्स्य पुराण  कहता  है   नीरोगता   की  इच्छा  है  तो   सूर्य  की  शरण  में  जाओ   l   वेदों  में   उदित  होते  सूर्य  की   किरणों  का  बड़ा  महत्व  बताया  गया  है   l   अथर्ववेद  में   वर्णन  है  कि  उदित  होता  सूर्य   मृत्यु  के  सभी  कारणों  , सभी  रोगों  को  नष्ट   कर  देता  है  l   इस  समय  की   किरणों  में  जीवनी  शक्ति  होती  है   l   ऋग्वेद  में  उल्लेख  है   कि   रक्त अल्पता  की  सर्वश्रेष्ठ  औषधि   है   उदित  होते  सूर्य  के  दर्शन, ध्यान  l   हृदय  की  सभी  बीमारियाँ   नित्य  उगते  सूर्य  के  दर्शन , ध्यान  एवं  अर्घ  से   दूर  हो  सकती  हैं   l  "  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य  जी  ने  लिखा  है --- जिन  देशों  में  सूर्योदय  के  दर्शन    किसी  कारण  से    संभव    नहीं  होते  हैं   तो  आप  मन  में  सूर्योदय  की  कल्पना   कर  सकते  हैं   कि   पवित्र  प्रकाश  हमारे  रोम - रोम  में  समा   रहा  है   और  ऐसी  कल्पना   के साथ  अर्घ  दे  सकते  हैं   l '

13 January 2022

WISDOM -----

    पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं  ---- " सकारात्मक  भावना  व्यक्तित्व  को   मजबूत  एवं  आशावान  बनती  हैं  l   ऐसे  व्यक्ति  का  व्यक्तित्व   अविभक्त  होता  है   और  वही  भक्त  कहलाता  है  l   भक्त  हर  परिस्थिति  में  सुखी  , संतुष्ट  एवं  शांत  रहता  है  ,  वह  कभी  शिकायत  नहीं  करता  ,  कभी  परेशान    नहीं  होता  और   न  किसी  को  परेशान    करता  है   l "------- बहराम  बड़ा  ही  धनवान  था   l   उसका  कारवाँ   डाकुओं   ने  लूट  लिया  ,  बहुत  नुकसान  हो  गया  l  संत  अहमद  उसके  समीप  ही  रहते  थे  , एक  दिन  उससे  मिलने  गए  l   बहराम  ने  भोजन  लाने  का  आदेश  दिया  l  संत  बोले ---- " भाई  !  तुम्हारा  इतना  नुकसान  हुआ  है  l   मैं  भोजन  करने  नहीं  ,  तुम्हे  सांत्वना  देने  आया  हूँ   l  "  बहराम  बोला ---- "  आप  निश्चिन्त  होकर  भोजन  कर  लें   l   यह  सच  है  कि   मेरा  बहुत  बड़ा  नुकसान  हुआ  ,  डाकुओं  ने  मुझे   लूटा   है  ,  पर  मैंने  कभी  किसी  को  नहीं  लूटा ,  किसी  का  अहित   नहीं किया  l   मैं  अल्लाह   का एहसानमंद  हूँ  कि   मात्र  मेरी  नश्वर  सम्पति  लूटी  गई  है  l   मेरी  शाश्वत  सम्पति  है  --- ईश्वर  के  प्रति  मेरा  दृढ  विश्वास   l  यही  मेरे  जीवन  की  सच्ची  सम्पति  है   और  वह  मेरे  पास  है   l "  संत  बोले  --- ' भाई  !   सच्चे अर्थों  में  तुम  संत  हो   l l '

WISDOM ------

   स्वस्थ  जीवन  बिताने  के  लिए   सूर्य  से  सहायता  लेने  की  बड़ी  आवश्यकता  है  l   भगवान  भास्कर  में  इतनी  प्रचंड  रोगनाशक  शक्ति  है  ,  जिसके  बल  से  कठिन  से  कठिन   रोग  दूर  होते  हैं  l  जब  से  हमने  सूर्य  रश्मियों  का  अनादर  किया  ,  बंद  जगहों  में  निवास   करना  सभ्यता  में  शामिल  किया  ,  तब  से  हमने  अपने  बहुमूल्य  स्वास्थ्य  को  गँवा  दिया  l   पृथ्वी  का  केंद्र  सूर्य  है  , इस   महत्व    को  समझकर  ही  हमारे  प्राचीन  आचार्यों  ने   सूर्य  प्राणायाम , सूर्य  नमस्कार  , सूर्य  चक्र  बेधन  आदि   अनेक  क्रियाओं  को  धार्मिक  स्थान  दिया  l  प्रसिद्ध   दार्शनिक  न्योची   का  मत  है ---- " जब  तक  दुनिया  में  सूरज  मौजूद  है  ,  तब  तक  लोग   व्यर्थ  ही  दवाओं  की  तलाश  में  भटकते  हैं  l   उन्हें  चाहिए   कि   इस  शक्ति , सौंदर्य  और  स्वास्थ्य   के  केंद्र  सूर्य  की  और  देखें   और  उसकी  सहायता  से  अपनी  असली  अवस्था  को  प्राप्त  करें   l  "   गायत्री  मन्त्र  के  देवता   सविता  देव  ( सूर्य )  ही  हैं  l  मनुष्य  का  अहंकार   नकली  सूर्य  बनाने  का  दावा   करता  है   लेकिन   गायत्री  मन्त्र  के  जप  और  सविता  देव  की  उपासना  से  जो  विवेक  जाग्रत  होगा ,  सद्बुद्धि  आएगी   वह  नकली  सूर्य  से   कभी  नहीं  आएगी  l   विज्ञानं  और  वैज्ञानिक  आविष्कारों  का  अपना  महत्व   है   लेकिन   जो  शक्ति  मानव  मन  को  रूपांतरित  कर  उसे   इनसान   बनाये , उच्च  अवस्था  में  पहुंचाए   , वह  शक्ति  भारतीय  अध्यात्म  में  है  l