12 June 2023

WISDOM -----

   लघु कथा ---- एक  नगर  में  एक  कुख्यात  चोर  रहा  करता  था  l  उसने  अपने  पुत्र  को  भी  चोरी  करना  सिखा  दिया  था  l मरते  समय  उसने  अपने  पुत्र  को  शिक्षा  दी  कि  -- ' बेटा  !  तू  चाहे  जो  कुछ  करना  , परन्तु  कभी  किसी  संत  से  सत्संग  का  हिस्सा  न  बनना  l  "  एक  बार  वह  लड़का  रात  में  चोरी  करने  निकला   तो  मार्ग  में  एक  संत  का  आश्रम  पड़ा  l  उसे  सुनाई  दिया  कि   संत  अपने  शिष्यों  से  कह  रहे  थे  ---- " इस  संसार  में  कर्म  की  गति  है  l  हर  व्यक्ति  को  अपने  शुभ  और  अशुभ  कर्मों  का  फल  भुगतना  पड़ता  है  l "  बस , इतना  सा  वाक्य  उसके  कान  में  पड़ने  की  देरी  थी   कि  उसके  मन  में  उथल -पुथल  मच  गई  l  चोरी  करना  भूलकर   वह  संत  के  पास  पहुंचा   और  उनसे  पूछने  लगा  कि  क्या  उसे  भी  उसके  दुष्कर्मों  का  फल  भुगतना  पड़ेगा  ? "  संत  बोले ---" निश्चित  रूप  से   l  "  संत  की  बात  सुनकर  उसे  अपनी  जिन्दगी  पर  बहुत  पश्चाताप  हुआ   और  अपने  कुकर्मों  का  प्रायश्चित  करने  हेतु  उसने  साधक  का  जीवन  अपना  लिया  l  क्षण  भर  के  सत्संग  से  उसका  पूरा  जीवन  बदल  गया  l  

11 June 2023

WISDOM ----

  ऋषि  का  वचन  है  कि  ----- ' जब  आप  अति  क्रोध में  , आवेश  में  हों   या    अत्यधिक  अपमान  हुआ  हो  , तो  ऐसी  स्थिति  में  कभी  भी  कोई   महत्वपूर्ण  निर्णय  नहीं  लेना  चाहिए  l  जब  मन: स्थिति  सामान्य  हो  जाये   तो  उस  विषय  पर  चिन्तन ,मनन  कर   और  अपने  निर्णय  से  मिलने  वाले  परिणामों  पर  संतुलित  मन  से  विचार  कर  ही  कोई  महत्वपूर्ण  कदम  उठाना  चाहिए  , बड़ा  निर्णय  लेना  चाहिए   l  ' ------- गंगा तट  पर  एक  ऋषि  अपनी  पत्नी  के  साथ  रहते  थे  l  उनका  एक  पुत्र  था  जो  ज्ञानी  तो  था , साथ  ही  बहुत  चिन्तन -मनन  भी  करता  था  l  एक  बार  ऋषि पति -पत्नी  में  किसी  बात  पर  विवाद  हुआ   तो  ऋषि  को  बहुत  क्रोध  आया   और  उन्हें  अपना  अपमान  महसूस  हुआ  l  क्रोध  में  आकर  उन्होंने   अपने  पुत्र  को  माँ  का   सिर  काटने   की  आज्ञा    दी  और  स्वयं  जंगल  चले  गए  l  पुत्र  विचारशील  था  वह  सोचने  लगा  कि  पिता  ने  अति  क्रोध  में    ऐसी  कथीर  आज्ञा  दी  है न, क्या  जन्म  देने  वाली  माँ  को  मारना  उचित  होगा   ?  या  पिता  की  आज्ञा  की  अवहेलना  करना  उचित  होगा  ?   वह  ऐसे  जघन्य  कार्य  और  उसके  परिणामों  के  बारे  में  सोच -विचार   में  डूब  गया  l  तभी  उसके  पिता  क्रोध  शांत  हो  जाने  पर  दौड़ते  हुए  आए   और  पत्नी  के  देखकर  उनका  मन  शांत  हुआ  l  उन्होंने  अपने  पुत्र  को  ह्रदय  से  लगा  लिया  l  उन्होंने  कहा  --क्रोध  में  मैं  अँधा  हो  गया  था , मेरी  बुद्धि  का  नाश  हो  गया  था   l  तुमने  मुझे   एक  भयानक  पापकर्म  से  बचा  लिया  l  

10 June 2023

WISDOM--------

 पं.  श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं --- "मन  को  कुविचारों  और  दुर्भावनाओं   से  बचाए  रखने  के  लिए   स्वाध्याय  और  सत्संग    अनिवार्य  है  l  संग  का  प्रभाव  इतना  गहरा  होता  है  कि  जिससे  जीवन  की  दिशा धारा  ही  परिवर्तित  हो  जाती  है  l " तुलसीदास जी  लिखते  हैं --- सत्संग  के  बिना  विवेक  जाग्रत  नहीं  होता   और  राम कृपा  के  बिना  यह  सत्संग  सहज  में  नहीं  मिलता  l '  आचार्य श्री  लिखते  हैं ---- 'क्रोध , अहंकार  और  कुसंग    ऐसे  महाविष  हैं  , जो  पवित्र  दिव्य  प्रेम  पर  भी  ग्रहण  लगा  देते  हैं  l  "     महारानी  कैकेयी  को  मंथरा  जैसी  दासी  का  कुसंग  मिला  l  महारानी  कैकेयी  अपनी  प्रकृति  से  अभिमानी  और  अहंकारी  थीं  ,  फिर  मंथरा  जैसी  दासी  के  कुसंग  ने   उनके  अहंकार  और  क्रोध  को  इतना  उभार  दिया  कि  वे  राजा  दशरथ  से  अपने  प्रिय  पुत्र   राम  के  लिए  चौदह  वर्ष  का  वनवास  मांगने  लगीं  l  कैकेयी  भरत  से  भी  अधिक  राम  के  प्रति  स्नेह  रखतीं  थीं  लेकिन  कुसंग  का  ऐसा  असर  हुआ   कि  वे  भरत  के  लिए  राजसिंहासन  और  राम  के  लिए  वनवास  मांग  बैठीं  l   इसी  कारण  कहते  हैं  कि  व्यक्ति  योगियों  के  साथ  रहकर  योगी  और  भोगियों  के  साथ  रहकर  भोगी  बन  जाता  है  l  नारद जी  का  सत्संग  पाकर  वाल्मीकि  --- महर्षि  कहलाए   l  भगवान  बुद्ध  का  सत्संग  पाकर  अंगुलिमाल  डाकू  से  भिक्षु  बन  गया  l

8 June 2023

WISDOM ----

 संवेदना -करुणा -मानव धर्म ------ पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं --- " संवेदना  होश  का  बोध  का  दूसरा  नाम  है  l  जिसके  ह्रदय  में  संवेदना  है , आसपास  का  दुःख  उसे  बेचैन  करता  है  l  विकास  की  अंतिम  सीढ़ी  संवेदना , करुणा  का  विस्तार  है   और  यही  मानव  धर्म  है  l " ---------  एक  बार  युद्ध  के  मैदान  में  दो  घायल  सैनिक  पास -पास  पड़े  थे  l  एक  सिपाही  था  दूसरा  उसका  अफसर  l  अफसर  बुरी  तरह  घायल  हो  चुका  था , उसका  प्यास  से  गला  सूख  रहा  था l  उसने  अपनी  कमर  से  बंधी   पानी  की  बोतल  निकाली   और  प्रयत्न  कर  के   उसे  पीने  ही  जा  रहा  था   कि  उसकी  द्रष्टि   अपने  पास  उससे  भी  अधिक  घायल  हुए  सिपाही  पर  पड़ी  l  वह  मरणासन्न  था , मुंह  से  बोल  भी  नहीं  फूट  रहे  थे  , लेकिन  टकटकी  लगाकर  वह  सिपाही   उसके  पानी  की   बोतल   की  ओर  देख  रहा  था  l  उसकी  आँखों  में  याचना  थी  l  वह  जीवन  के  अंतिम  क्षणों  में   पानी  की  एक  बूंद  चाहता  था  l  अफसर  में  इंसानियत  जागी  l  उसके  अंदर  के  इनसान  ने  कहा  कि  मुझसे  ज्यादा  पानी  की  जरुरत  इस  सिपाही  को  है  l  वह  घिसटता  हुआ  सिपाही  के  पास  पहुंचा   और  पानी  की  बोतल   किसी  तरह   घायल  सिपाही  के  मुंह  से  लगा  दी  l  सिपाही  ने  पानी  पिया , उसे  तृप्ति  हुई  , उसने  अपनी  आधी  बंद  पलकें  पूरी  खोल  दीं  l    आचार्य  श्री  कहते  हैं  यही  मानव  धर्म  है  l  दूसरों  के  हित  के  लिए  कार्य  करने  से  ही  जीवन  सार्थक  और  सफल  बनता  है  l  l "          आज  के  युग    की  सबसे  बड़ी  विडंबना  है  कि  मनुष्य  संवेदनहीन  हो  गया  है  l  बिना  वजह  के  युद्ध , साम्प्रदायिक  दंगे   और  विभिन्न  अमानवीय  तरीकों  से  नकारात्मकता  फ़ैलाने  के  कारण   मानवता  और  सम्पूर्ण  प्रकृति  ही  घायल  है  !  ' समरथ  को  नहीं  दोष  गुंसाई  '  l  संसार  को  नवजीवन  कौन  दे  ?  

7 June 2023

WISDOM -----

   लघु  कथा ---- एक    राजा  वेश  बदलकर  नगर  में  यह  जानने  के  लिए   अक्सर  निकलता  था  कि  उसकी  प्रजा  सुखी  है  या  नहीं  l  एक  दिन  वह  एक  ग्रामीण   के  वेश  में  था  l  उसने  देखा  कि  एक  बहुत  बूढ़ा  आदमी   एक  बाग़  के  किनारे  काजू  का  पेड़  लगा  रहा  है  l  राजा  रुक  गया  l  उसने  उस  बूढ़े  आदमी  से  पूछा  --- "  बाबा  !  यह  पेड़  तुम  किसके  लिए  लगा  रहे  हो  ?  जब  इसमें  फल  लगेंगें  , तब  तुम  इसे  देखने  के  लिए  नहीं  रहोगे  l  फल  भी  तुम्हारे  किसी  काम  न  आएंगे  l  तुम्हारे  जीवन  के  थोड़े  से  ही  दिन  शेष  रह  गए  हैं  , फिर  इसे  लगाने  से  तुम्हे  क्या  फायदा  ? "   वृद्ध  ने  सहज  स्वर  में  उत्तर  दिया --- " फलों  के  पेड़  इसलिए  नहीं  लगाए  जाते   कि  हम  लगाते  ही  उनके  फल  खायेंगे  l  पेड़  को   लगाता    कोई  और  है  और  खाता  कोई  और  है  l  यह  दुनिया  की  बहुत  पुरानी    रीत  है  l  जो  फल  मैं  आज  खा  रहा  हूँ  , उसके  पेड़  मेरे  पूर्वजों  ने  लगाए  थे  l  मेरे  इस  पेड़  के  फल  आने  वाली  पीढियां  खाएँगी  l "  नदी  अपने  लिए  नहीं  बहती  ,  पेड़  अपने  फल  नहीं  खाता  l  इससे  यह  सीख  मिलती  है  कि  व्यक्ति  को  सदैव  दूसरों  के  हित  के  लिए  कार्य  करना  चाहिए  l  सबके  हित  में  ही   हमारा  हित  है  l   

6 June 2023

WISDOM -----

लघु  -कथा -----1 .  एक  धनी    व्यक्ति  बहुत  कंजूस  था  l  उसने  घर  की  स्त्रियों  को  भी  कुछ  दान  देने  से  मना  कर  रखा  था  l  एक  दिन  एक  भिखारी  उसके  यहाँ  भीख  मांगने  आया   तो  धनिक  की  नव विवाहिता   पुत्र वधू   भिखारी  से  बोली --- " हमारे  यहाँ  तुम्हे  देने  के  लिए  कुछ  नहीं  है  l "  भिखारी  बोला --- "फिर  तुम  लोग  क्या  खाते  हो  ?  "  वह  बोली ---- " हम  बासी  खाना  खाते  हैं  , जब  यह  भी  समाप्त  हो  जायेगा   तो  हम  भी  तुम्हारी  तरह  भीख  मांगेंगे  l  "  सेठ  ऊपर  बैठा  भिखारी  और  पुत्र वधू  की  बातें  सुन  रहा  था  l  उसने  अपनी  पुत्रवधू  से  कहा कहा ---- " तुम  यह  क्या  कह  रही  हो  कि  हम  भी  भीख  मांगेंगे  l "  पुत्रवधू  बोली ---- " पिताजी  , हमारे  पास  अभी  जो  धन  है  , उसे  हमने  पिछले  जन्म  में  किए  गए  परमार्थ  कार्यों  के  पुण्य स्वरुप  पाया  है  , परन्तु  अब  हम  परमार्थ रूपी  पुण्य  कार्य   नहीं  कर  रहे  हैं  , इसलिए   पिछला  पुण्य  समाप्त  होते  ही   हमें  भीख  मांगनी  पड़ेगी  l  "   यह  सुनकर  सेठ  को  अपनी  भूल  का  भान  हुआ  , उसका  जीवन  बदल  गया  और  उसने  निर्धनों  , जरुरतमंदों  की  नि:स्वार्थ  भाव  से  सेवा -सहायता   करना  शुरू  कर  दिया  l  

5 June 2023

WISDOM ---

   1 . ' मन  से  भी  संयमी  बनो '----  एक  व्यक्ति  ने  कन्फ्यूशियस  से  प्रश्न  किया ---- 'संयमित  जीवन  बिताकर  भी  मैं  रोगी  हूँ  , महात्मन ! ऐसा  क्यों  ? '  कन्फ्यूशियस  ने  कहा ---- "भाई , तुम  शरीर  से  संयमित  हो  ,  पर  मन  से  नहीं  l  अब  जाओ  ईर्ष्या , द्वेष , छल -कपट   करना  बंद  कर  दो   तो  तुम्हे  संयम  का  पूर्ण  लाभ  मिलेगा  l " 

2 .' ह्रदय  शुद्धि  ' -----  भक्त  कर्माबाई  भगवान  पंढरीनाथ  को  पुत्र भाव  से  पूजती  थीं   और  प्रेम  करतीं  l  वे  प्रात:काल  बिना  स्नान  किए  ही  खीर  बनातीं   और  भगवान  का  बाल -भोग  इस   भाव  से   लगातीं  कि  भगवान  को  शैया  त्यागते  ही  भूख  लगती  है  l   एक  दिन  एक  पंडितजी   ने  उन्हें  इस  तरह  बिना  स्नान  के  भोग  लगाते  देखा  तो  कहा --- कर्माबाई  !  भगवान  को  भोग   नहा -धोकर  ही  लगाना  चाहिए  , बिना  स्नान   के  भोग  लगाना  उचित  नहीं  l " कर्माबाई  को  बात  समझ  में  आ  गई   और  उस  दिन  उन्होंने  स्नान  कर  के  ही  भोग  लगाया  l  स्वाभाविक  है  स्नान  आदि  से  निवृत्त  होने  में  कुछ  देर  हो  गई  l  रात  उन्होंने  स्वप्न  में  देखा  ---भगवान  पंढरीनाथ  खड़े  भूख -भूख  चिल्ला  रहे  हैं  l  कर्माबाई  ने  पूछा --- " देव  !  आज  खीर  नहीं  खाई  क्या  ? "  भगवान  बोले ---- " माँ  !  खीर  तो  मैंने  खा   ली  ,  पर  आज  तेरा  वह  प्रेम ,  वह  भावना  नहीं  मिली   जो  रोज  मिला  करती  थी  l "  कर्माबाई  उस  दिन  से   बिना  नहाए  ही   फिर  भोग  चढ़ाने  लगीं  l