21 June 2018

WISDOM ------

  अंगुलिमाल  कुख्यात  डाकू  था   l  उसने  भगवान  बुद्ध  के  सामीप्य  को  पा  कर  भिक्षु  धर्म  ग्रहण  कर  लिया  l  बुद्ध  ने  उसे  प्रव्रज्या  पर  भेजा  l  जब  वो  भिक्षा  मांगने  पहुंचा   तो  गाँव  के  लोगों  ने  उसे  पहचान  कर   उस  पर  पत्थरों  की  बरसात  शुरू  कर  दी   l   अंगुलिमाल  बुरी  तरह  घायल  होकर   आश्रम  लौटा   l  बुद्ध  उसकी  स्थिति  देखकर  बोले  --- " वत्स  !  ये  ठीक  है  कि  अब  तुम  अहिंसा  के  पथ  को   स्वीकार  कर  चुके  हो  ,   पर  हिंसा  को  उद्दत      अन्य    व्यक्तियों  से    रक्षार्थ  तुम   अपना  कठोर  स्वरुप   तो  कर  सकते  थे   l  यदि  तुम  केवल    क्रुद्ध    आँखों   से  उन्हें  देख  लेते  तो  तुम्हारी  ये  दशा  नहीं  होती  l " 
  अंगुलिमाल   बोला  ----- " प्रभु  मैं  ये  सोच  कर  कुछ  नहीं  बोला   कि  कल   मैं  बेहोश  था ,  आज  ये  बेहोश  हैं  l  कौन  किससे  किसकी  रक्षा  करे   ?  "

20 June 2018

WISDOM ------ पुत्र या पुत्री नहीं , मनुष्य के कर्म ही उसके सहायक होते हैं l

    हमारा  समाज  पुरुष  प्रधान  है  l  नारी  की  अपेक्षा  पुरुष  का  महत्व  अधिक  है  l  अधिकांश  परिवारों  में  आज  भी  पुत्र  होने  पर  खुशियाँ  मनाई  जाती  हैं   और  पुत्री  होने  पर  मायूसी  छा  जाती  है  l   हमारे  देश  की  अवरुद्ध  प्रगति  का  एक  कारण  यह  भी  है   कि  महिलाओं  के  कल्याण  की  अनेक  योजनाएँ  बनने  के  बावजूद  पुरुषों  की  मानसिकता ,  उनकी  संकीर्ण  सोच   नारी  की  प्रगति  में  अनेक  बाधाएं  उपस्थित  करती  है  l    आज  की  सबसे  बड़ी  जरुरत  है  कि  लड़के  और  लड़की  में  भेद  न  कर  के  उन्हें  अच्छे  संस्कार  दें   l  यदि  दोनों  में  से  कोई  भी  संस्कारवान  नहीं  है   तो  वह  अपने  परिवार  व  समाज  के  लिए  अभिशाप  की  तरह  है   l  
  इस  संदर्भ  में   एक  पौराणिक  कथा  है ------  मंकनक  नामक  एक  साधक   शिव  भक्त  था  l   लेकिन  उसकी  अनेक  सांसारिक  इच्छाएं  थीं  l अत:  उसने  शुभ  दिन   और  शुभ  मुहूर्त  पर  भगवान  शिव  की  आराधना  शुरू  की  l  आखिर  भगवान  भोलेनाथ  प्रसन्न  हुए , उसके  सामने  प्रकट  हुए  और  कहा --- " वर  मांगो  वत्स ! "   मंकनक   ने  उनके  सामने  पुत्र  की  कामना  प्रकट  की  l
 इस  पर  भगवान  शिव  ने  कहा  --- "  तुमने  तपस्या  पूर्ण  की  है  ,  इसलिए  वर  माँगना   तुम्हारा  नैसर्गिक  अधिकार  है ,  लेकिन  पुत्र  किसलिए ,  पुत्री  क्यों  नहीं  ?
इस  पर  मंकनक   ने  कहा  ---- " पुत्र  आगे  चलकर  सहायक  बनता  है  , जबकि  पुत्री  तो  विदा  होकर  ससुराल  चली  जाती  है  l  "
 यह  उत्तर  सुनकर  भगवान  शिव  बोले ---- " वत्स  मंकनक  !  तुम  तपस्वी   हो ,  तुम्हे  यह  बोध  होना  चाहिए  कि  सहायक  तो  मनुष्य  के  कर्म  होते  हैं  ,  कोई  व्यक्ति  विशेष  किसी  की  सहायता  नहीं  करता  l  घर  में  पुत्र  हो  या  पुत्री ,  उसे  संस्कार  देकर  , शिक्षा  प्रदान  कर  के  ,  उसके  व्यक्तित्व  को  समुन्नत  बनाकर  समाज  को  अर्पित  करना   माता - पिता  का  दायित्व  है  l  अपने  बच्चों  से  प्रतिदान  की  आशा  तो   पशु - पक्षी  भी  नहीं  करते ,  फिर  तुम  तो  मनुष्य  हो   l  "  
     भगवान   भोलेनाथ  की  बातों  से  मंकनक    को    जीवन    की    दिशा  मिली   l    यह  कथा  मनुष्य  समाज  को  यह  प्रेरणा  देती  है  कि  व्यक्ति  को  किसी  के  सहारे  न  चलकर   अपने  कर्मों  के  सहारे  चलना  चाहिए   l    पुत्र  व  पुत्री  में  भेदभाव  न  कर के    उन्हें  अच्छे  संस्कार  देना  चाहिए   l  

19 June 2018

WISDOM ----- जीवनशैली और विचारों में परिवर्तन से ही पिछड़े , दलित और ऐसे किसी समाज का उत्थान संभव है l

    किसी  भी   पिछड़े  समाज   या  ऐसा  कोई  भी  समाज  जिसमे   असंतोष  है  , उपेक्षित  रहा  है ,  उसे  मुख्य  धारा  में  लाने  के  लिए  केवल  सरकारी  सहायता  ही  पर्याप्त  नहीं  हैं  l  उस  समाज  के  लोगों  की  जीवनशैली  में   परिवर्तन  करना  आवश्यक  है   l   जीवनशैली  में  परिवर्तन  करना  आसान  कार्य  नहीं  है  l  यह  अत्यंत  धैर्य पूर्वक  और  दीर्घ काल  तक  की  जाने  वाली  प्रक्रिया  है  ----  समाज  में  महिलाओं   एवं पुरुषों  को    केवल   पैसा  या  सहायता  देना  ही   पर्याप्त  नहीं  है    बल्कि  उस  पैसे  व  सहायता  से   उनके  अन्दर  की  क्षमता   एवं  रचनात्मकता   के  आधार  पर  स्वावलंबन  का  कार्य  आरम्भ  करना  चाहिए  ,  उन्हें  शुभ  कर्मों  से  जोड़ना  चाहिए   और  सेवा  कार्यों  में  भी  संलग्न  करना  चाहिए   l    इससे  उनकी  जीवनशैली  में  परिवर्तन  आएगा  ,  उनके  जड़  जमाये  नकारात्मक  विचार  बदलेंगे   l    शिक्षा   एवं  विभिन्न  प्रकार  की   सेवा  एवं  स्वावलंबन   कार्य  के  करने  से  उनके  अन्दर  आत्मविश्वास  जागेगा   एवं  वे  स्वयं  इन  कार्यों  में  प्रवृत  होंगे    l   

WISDOM ----- सकारात्मक सोच से ही जीवन सुखी हो सकता है l

 जो  परिस्थितियों  को  सकारात्मक  अवसर  के  रूप  में  देखते  हैं  ,  वे  प्रसन्नतापूर्वक    उनका  सामना  कर  पाते  हैं  , जबकि  इन्हें  प्रतिकूलताओं  के  रूप  में  देखने  वाले  ,  व्यर्थ  की  चिंता  में   अपने  समय  व  शक्ति  को  नष्ट  कर   दुःखी  ही  रहते  हैं   l  एक  प्रसंग  है ---- एक  दिन  एक  शिष्य  ने  अपने  गुरु  से  कहा ----- " गुरुदेव ! एक  व्यक्ति  ने  आश्रम  के  लिए  गाय  भेंट  की  है   l  "
  गुरु  ने  कहा --- " अच्छा  हुआ  ,  दूध  पीने  को  मिलेगा  l "
 एक  सप्ताह  बाद  फिर  शिष्य  ने  गुरु  से  आकर  कहा ---- "  गुरूजी  ! जिस  व्यक्ति  ने  गाय  दी  थी , वह  अपनी  गाय  वापस   ले  गया  l " 
  गुरु  ने  कहा --- " अच्छा  हुआ  !  गोबर  उठाने  के  झंझट  से  मुक्ति  मिली  l "
 बदलती  परिस्थितियों  के  साथ  सकारात्मकता  बनाये   रखना   ही  जीवन  में  सफलता   का  एकमात्र  सूत्र  है  l 

17 June 2018

WISDOM -----

 रामकृष्ण परमहंस  कहा  करते  थे ---चील  कितनी  ही  ऊपर  ऊँचाइयों  पर  उड़ती  रहे   फिर  भी  उसकी  द्रष्टि   धरती  पर  पड़े  मृत  जानवर  पर  ही  लगी  रहती  है   l  इससे  कोई  अंतर  नहीं  पड़ता  कि  उसका  शरीर  उतंग  ऊँचाइयों  पर   उड़  रहा  है  ,  पर  मन  फिर  भी  जमीन  पर  अटका  रहता  है  , मांस  के  लोथड़े  तलाशता  रहता  है   l  यह  मन  का  स्वभाव  है  ,  उसे  अधोगामी   बनने  में  रस  आता  है  l  मन  का  परिष्कार  जरुरी  है   l  

16 June 2018

WISDOM---- सभी समस्याओं का एक मात्र हल है ---- संवेदना

   जब  संवेदना  होती  है   तब  दूसरों  के  कष्ट  तकलीफ  अपनी  पीड़ा  के  समान  लगते  हैं  ,  मन  में  बेचैनी  होती  है  ,   और  जब  तक  उसकी  पीड़ा  के     निवारण  के  लिए  कुछ  कर  न  दिया  जाये   तब  तक  मन  को  शांति  नहीं  मिलती  है   l 
  देश  के  लिए  जीवन  समर्पित  करने  से  पूर्व  एक  बार  महात्मा  गाँधी  ने  देश  का  भ्रमण  किया   और  देश  की  स्थिति  से  परिचित  होने  पर    वे  अपने  शरीर  पर  आजीवन  पूरी   धोती  भी  नहीं  पहन  सके  l  क्योंकि  देश  की  पीड़ा  को  देखकर    ,  महसूस  कर  के    पूरे  कपड़े  पहनने  के  सुख  का  उन्होंने  त्याग  कर  दिया  ,  और  धीरे - धीरे   अपने  जीवन  में  किये  जाने  वाले   छोटे - छोटे  त्याग  के  फलस्वरूप   वे  ' महात्मा  '  के  पद  से  विभूषित  हुए   l  

15 June 2018

WISDOM ---- अच्छे कर्मों पर भरोसा रखना चाहिए , मुफ्त के चमत्कारों पर नहीं

   मनुष्य  का  यह  स्वभाव  है   कि  वह  सरलता  से  बहुत  कुछ  पाना  चाहता  है   l  ईश्वर  सर्वशक्तिमान  है    उसकी  कृपा  माला  घुमाकर ,  फूल - प्रसाद  चढ़ाकर  और  सबसे  बढ़कर  संतों  और  धर्म  के  ठेकेदारों  को  खुश  कर  के  मिल  जाये  तो  क्या  बुराई  है ,  ऐसी  सोच  के  कारण   ही   धर्म  का  सच्चा  स्वरुप  खो  गया  और  आज  धर्म  ने  भी  एक  व्यवसाय  का  रूप ले  लिया  ,  जिसमे  लाखों  लोगों  को  रोजगार  मिल  जाता  है   l  जिसको  कहीं  कोई  रोजगार  नहीं  है  उसके  लिए  यह  क्षेत्र  खुला  है   l 
  पूजा - पाठ ,  भजन - पूजन ,  कर्मकांड  आदि  सब  कुछ  बहुत  अच्छा  ,  पवित्र  भावना  से  यह  सब  कुछ  होने  से  वातावरण  शुद्ध  होता  है    लेकिन    आज  की  सबसे  बड़ी  समस्या  यही  है  कि  आज  पवित्र  भावना  का  अभाव  है   l  स्वार्थ ,  लालच , अनीति , अत्याचार , शोषण , कर्तव्य  की  चोरी  जैसी   दुष्प्रवृतियों  , अनैतिक  इच्छाओं  की  पूर्ति  व्यक्ति  धर्म  की  आड़  में  ही  करता  है   l
    संसार  में  केवल  पर्यावरण  प्रदूषण नहीं  है  ,  विचारों  और  भावनाओं  का  प्रदूषण  बहुत  गहरा   है    l   यदि  कोई  व्यक्ति   बहुत  दुष्ट ,  पापी  है  ,  कपटी  है  तो  उसकी  नकारात्मकता  के  कारण  उसकी  उपस्थिति  ही  कष्टकारक  होती   है  ,  जब  ऐसे  लोगों  की  अधिकता  हो  जाती  है   तो  पूरा  वातावरण  ही  कितना   कष्टकारी  हो  जाता    है  इसका  अनुमान  लगाया  जा  सकता है  l  l  समाज  में बढ़ते  अपराध      भी  इसी  का  परिणाम  है  l